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नोटिस, जुर्माना सब दिखावा, पहाड़ कटता रहा, सिस्टम सोता रहा

05/02/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
केदारनाथ नेशनल हाईवे के तिलवाड़ा क्षेत्र में हो रही अवैध पहाड़ कटाई अब केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने, पर्यावरणीय अपराध और प्रशासनिक चुप्पी का गंभीर उदाहरण बन चुकी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक तथाकथित ठेकेदार द्वारा हाईवे किनारे निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर अंधाधुंध पहाड़ काटा गया और यह सब एनएच विभाग और जिला प्रशासन की आंखों के सामने चलता रहा.सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि विभागीय नोटिस और जुर्माना लगाए जाने के बावजूद कटिंग का काम लगातार जारी रहा. इससे साफ जाहिर होता है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही, जबकि जमीन पर नियमों को रौंदा जाता रहा. न तो हाईवे से तय सुरक्षित दूरी का पालन किया गया और न ही पर्यावरणीय बफर जोन की कोई परवाह की गई. भारी मशीनों की दिन-रात गड़गड़ाहट से सड़क की संरचना कमजोर हो रही है और आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ता जा रहा है.स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस अंधाधुंध कटाई से धूल और मलबे के कारण दृश्यता प्रभावित हो रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है. साथ ही भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ गया है. हिमालय जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही को सीधे-सीधे जनजीवन से खिलवाड़ बताया जा रहा है. दिसंबर 2025 में तिलवाड़ा और अगस्त्यमुनि बाजार में अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली थी, लेकिन इसी प्रशासन की चुप्पी हाईवे किनारे हो रही इस अवैध पहाड़ कटाई पर सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां अन्य क्षेत्रों में 24 मीटर कटिंग मानक लागू हैं, वहीं तिलवाड़ा क्षेत्र में अतिरिक्त 14 मीटर तक मनमानी कटिंग की गई.एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता द्वारा ठेकेदार का एनओसी निरस्त करते हुए 2 लाख 5 हजार 178 का जुर्माना लगाए जाने की बात कही गई है, लेकिन जनता का सवाल है कि क्या हिमालय जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र को काटने की कीमत क्या सिर्फ दो लाख रुपए है. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जब नोटिस जारी हो चुका था, तो कटिंग तत्काल प्रभाव से क्यों नहीं रोकी गई.भरदार विकास मंच से जुड़े भगत चौहान का आरोप है कि ठेकेदार ने अवैध कटिंग के नाम पर लोगों से मोटी रकम की वसूली की और सभी मानकों की खुलेआम अनदेखी की. एनएच विभाग, तहसील और जिला प्रशासन की चुप्पी ने ठेकेदार के हौसले और बुलंद कर दिए.अब सवाल यह नहीं रह गया है कि पहाड़ कितना कटा, बल्कि यह है कि यह सब किसके संरक्षण में हुआ. नोटिस और जुर्माने यदि केवल औपचारिकता बनकर रह जाएं, तो ऐसी कार्रवाइयों का कोई अर्थ नहीं रह जाता. यदि समय रहते इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह लापरवाही आने वाले समय में किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है. चारधाम परियोजना के तहत पहले भी हाईवे विस्तार में कटिंग के मानकों को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तिलवाड़ा में 14 मीटर तक कटिंग की जा रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में 24 मीटर का मानक है ।स्थानीय लोगों की स्पष्ट मांग क्षेत्रवासियों और प्रभावित नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है किएनएच विभाग तत्काल निष्पक्ष जांच शुरू करे।अवैध कटाई पर तुरंत पूर्ण रोक लगाई जाए।कटाई में लगी मशीनरी जब्त कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।हाईवे से जुड़े सभी तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला न केवल नेशनल हाईवे की संरचना और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनेगा, बल्कि पूरे रुद्रप्रयाग जिले में अवैध कटाई और खनन को बढ़ावा देने वाला खतरनाक उदाहरण भी बन सकता है।जनता को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान लेगा और ठोस कार्रवाई कर हाईवे की सुरक्षा तथा लोगों का भरोसा कायम रखेगा।।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

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