• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

सुमित्रानंदन पंत एक युगांतकारी कवि

20/05/21
in अल्मोड़ा, उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
381
SHARES
476
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

हरीश चन्द्र अन्डोला
महा कवि सुमित्रानंदन पंत जी का जन्म वर्ष उन्नीस सौ में 20 मई को अल्मोड़ा जिले के कौसानी ग्राम में हुआ था। महा कवि सुमित्रानंदन पंत जी के जन्म से कुछ ही समय बाद इनकी माता जी का निधन हो गया। सुमित्रानंदन पंत जी के पिता का नाम गंगा दंत पंथ था और उनकी माता का नाम सरस्वती देवी था। संपूर्ण भारत वर्ष में अब तक ऐसे अनेक प्रकार के कवि हुए जिन्होंने हिंदी साहित्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, परंतु महा कवि सुमित्रानंदन पंत जी एक ऐसे कवि माने जाते हैं, जिनके बिना हिंदी साहित्य का विकास अधूरा माना जाता है। सुमित्रानंदन पंत जी हिंदी साहित्य के महान कवि थे। सुमित्रानंदन पंत जी ने हिंदी साहित्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

महान कवि सुमित्रानंदन पंत जी के जन्म स्थान कौसानी अत्यधिक खूबसूरत गांव था। वह एक ऐसा गांव है जहां पर प्रकृति सुंदर रंग विखरे पड़े हैं। 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के भारतीयों से अंग्रेजी विद्यालयों, महाविद्यालयों, न्यायालयों एवं अन्य सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने के आह्वान पर उन्होंने महाविद्यालय छोड़ दिया और घर पर ही हिन्दी, संस्कृत, बँगला और अंग्रेजी भाषा.साहित्य का अध्ययन करने लगे। उनका जन्म ही बर्फ से आच्छादित पर्वतों की अत्यंत आकर्षक घाटी में हुआ था, जिसका प्राकृतिक सौन्दर्य उनकी आत्मा में आत्मसात हो चुका था। झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भंवरा, गुंजन, उषा किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या, ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने। निसर्ग के उपादानों का प्रतीक व बिम्ब के रूप में प्रयोग उनके काव्य की विशेषता रही।

उनका व्यक्तित्व भी आकर्षण का केंद्र बिंदु था, गौर वर्ण, सुंदर सौम्य मुखाकृति, लंबे घुंघराले बाल, उंची नाजुक कवि का प्रतीक समा शारीरिक सौष्ठव उन्हें सभी से अलग मुखरित करता था। साहित्यकार किसी भी देश या समाज का निर्माता होता है। वह समाज और देश को वैचारिक पृष्ठभूमि देता है, जिसके आधार पर नया दर्शन विकसित होता है। वह शब्द शिल्पी ही साहित्यकार कहलाने का गौरव प्राप्त करता है। जिसके शब्द मानवजाति के हृदय को स्पंदित करते रहते हैं। यह बात पंत के व्यक्तित्व एवं कृृतित्व पर अक्षरतः सत्य साबित होती है। दो और दो चार होते हैं, यह चिर सत्य है, पर साहित्य नहीं है। क्योंकि जो मनोवेग तरंगित नहीं करता, परिवर्तन एवं कुछ कर गुजरने की शक्ति नहीं देता, वह साहित्य नहीं हो सकता। अतः अभिव्यक्ति जहां आनंद का स्रोत बन जाए, वहीं वह साहित्य बनता है। इस दृष्टि से पंत का सृजन आनन्द के साथ जीवन को एक नयी दिशा देता है।

सुमित्रानंदन पंत की सृजन एवं साहित्य की यात्रा का लक्ष्य केवल महफिल सजाना और मनोरंजन का सामान जुटाना नहीं रहा। वे देशभक्ति और राजनीति के पीछे चलने वाली सचाई भी नहीं है, बल्कि उनसे भी आगे मशाल दिखाती हुई चलने वाली सचाई है। उनकी कविताएं मानव.मन, आत्मा की आंतरिक आवाज, जीवन.मृत्यु के बीच संघर्ष, आध्यात्मिक पहलुओं की व्याख्या, नश्वर संसार में मानवता का बोलबाला जैसे अनादि सार्वभौम प्रश्नों से जुड़ी है। ऐसे भी महान कवि सुमित्रानंदन पंत जी को भी इस घनघोर प्रकृति का यथार्थ प्रेम मिला, जिसके कारण उन्होंने अपनी रचनाओं में अधिकतर झरने, बर्फ, पुष्प, उषा, किरण, लता, भ्रमण, गुंजन, शीतल पवन, तारों इत्यादि का उपयोग करके अपनी रचनाओं को अत्यधिक प्रभावशाली बनाया। सुमित्रानंदन पंत जी ने वर्ष 1938 में एक और मासिक पत्रिका का संपादन किया। इस पत्रिका का नाम रूपाभ था। सुमित्रानंदन पंत जी वर्ष 1955 से 1962 तक आकाशवाणी के साथ जुड़े रहे और उन्होंने इस चैनल पर मुख्य निर्माता का पद भी संभाला। सुमित्रानंदन पंत जी का पल्लव कविता सर्वाधिक प्रसिद्ध हुआ। सुमित्रानंदन पंत जी ने अनेकों प्रकार की पत्रिकाओं का संपादन किया और उन्होंने अपनी पत्रिकाओं में अनेकों प्रकार की कविताओं को भी लिखा। जिसके लिए उन्हें अनेकों प्रकार के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सुमित्रानंदन पंत जी को 1961 ईस्वी में पद्म विभूषण, 1968 ईस्वी में ज्ञानपीठ इसके अलावा सुमित्रानंदन पंत जी को साहित्य अकादमी तथा सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार इत्यादि जैसे उच्च श्रेणी के सम्मानित पुरस्कारों के साथ सम्मानित किया गया।

सुमित्रानंदन पंत जी इतने महान कवि थे कि जिस घर में सुमित्रानंदन पंत जी का जन्म और उनका बचपन बीता था, उस घर को सुमित्रानंदन पंत जी की याद में सुमित्रानंदन पंत वीथिका के नाम से एक संग्रहालय बनाया गया। इस संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत जी के व्यक्तित्व प्रयोग की वस्तुएं जैसे कि उनके उपयोग किए गए कपड़े, कविताओं के मूल पांडुलिपि, पुरस्कार, छायाचित्र, पत्र इत्यादि को रखा गया है। सुमित्रानंदन पंत जी के नाम पर एक पुस्तकालय भी है और यह पुस्तकालय इसी संग्रहालय में बनाया गया है। इन पुस्तकालयों में सुमित्रानंदन पंत जी के व्यक्तित्व तथा उनसे संबंधित पुस्तकों का संग्रह है। इस संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत जी की स्मृति में प्रत्येक वर्ष एक दिवस मनाया जाता है, इसे पंत व्याख्यानमाला के नाम से जाना जाता है। इसी संग्रहालय से सुमित्रानंदन पंत जी की व्यक्तित्वता और कृतित्व के नाम पर एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई थी। इसी पुस्तक के अनुसार इलाहाबाद शहर में स्थित हाथी पार्क को सुमित्रानंदन पंत उद्यान कर दिया गया। सुमित्रानंदन पंत जी पुणे साहित्यिक एवं सत्य शिव के आदर्शों से अत्यधिक प्रभावित हुए थे, इसी के साथ सुमित्रानंदन पंत जी का जीवन आचरण सदैव बदलता रहा। यहां से महा कवि सुमित्रानंदन पंत जी ने अपनी प्रारंभिक कविताओं में प्रकृति और सौंदर्य के रमणीय चित्र को दर्शाया थाए वही इसके विपरीत उन्होंने दूसरे चरण में अपनी कविताओं में छायावाद की सूक्ष्म सूक्ष्म परिकल्पना और बड़ी ही प्रभावशाली भावनाओं को दर्शाया था और उन्होंने अपने अंतिम चरण में समाज सुधार करने वाले प्रगतिवाद और विचार शीलता को भी दर्शाया था। सुमित्रानंदन पंत सच्चे साहित्यकार एवं राष्ट्रवादी कवि थे, उनकी यह अलौकिकता है कि वे स्वयं को विस्मृत कर मस्तिष्क में बुने गये ताने.बाने को कागज पर अंकित कर देते थे। युगीन चेतना की जितनी गहरी एवं व्यापक अनुभूति उनमें थीए उतनी अन्यत्र कहीं भी दिखाई नहीं देती। उनका मानना है कि अनुभूति एवं संवेदना साहित्यकार की तीसरी आंख होती है। इसके अभाव में कोई भी व्यक्ति साहित्य.सृजन में प्रवृत्त नहीं हो सकता क्योंकि केवल कल्पना के बल पर की गयी रचना सत्य से दूर होने के कारण पाठक पर उतना प्रभाव नहीं डाल सकती।सुमित्रानंदन पंत भारत की एक अमूल्य थाती है, जब तक सूर्य का प्रकाश और मानव का अस्तित्व रहेगाए उनकी उपस्थिति का अहसास होता रहेगा।

Share152SendTweet95
Previous Post

लाकडाउन के दौरान राज्यभर में आटे की चक्कियांं खोलने की मांग

Next Post

वेनाकुली-हनुमान चट्टी में बादल फटने दबे कई वाहन

Related Posts

उत्तराखंड

राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों में सर्वाधिक कॉर्पोरेट आयकरदाता बना यूजेवीएन लिमिटेड

July 29, 2026
22
उत्तराखंड

देहरादून-मसूरी रोड की गुणवत्ता पर बार-बार उठ रहे सवाल

July 29, 2026
5
उत्तराखंड

हर्षिल घाटी, फिर भी पर्यटन मानचित्र से दूर

July 29, 2026
3
उत्तराखंड

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन

July 29, 2026
4
उत्तराखंड

डोईवाला: सिमलास ग्रांट में प्राकृतिक खेती को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

July 29, 2026
10
उत्तराखंड

डोईवाला: बसपा ने विधानसभा कमेटी का किया गठन

July 29, 2026
61

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67714 shares
    Share 27086 Tweet 16929
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38070 shares
    Share 15228 Tweet 9518
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों में सर्वाधिक कॉर्पोरेट आयकरदाता बना यूजेवीएन लिमिटेड

July 29, 2026

देहरादून-मसूरी रोड की गुणवत्ता पर बार-बार उठ रहे सवाल

July 29, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.