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वैज्ञानिकों का समर्थन, कहा आर्थिकी के साथ हिमालय को मिलेगी संजीवनी

16/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच गैस समेत ऊर्जा ईधनों की सप्लाई पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रही है. साथ ही क्रूड ऑयल के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने की वजह से देश की आर्थिकी पर भी असर पड़ रहा है. इसके चलते प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ऊर्जा संसाधनों का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की है. जिससे देश की आर्थिकी मजबूत होने के साथ ही ये पहल हिमालय के लिए संजीवनी साबित होगी. क्योंकि कोविड काल के दौरान जब लॉकडाउन लगा था, उस दौरान हिमालय पूरी तरह से स्वस्थ हो गया था. यही वजह है कि वैज्ञानिक भी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पीएम मोदी की अपील का जनता को पालन करना चाहिए. ऐसे करना हिमालय के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होगा.देश दुनिया में ईंधन की सप्लाई प्रभावित है, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इसके चलते भारत पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की है कि वह ऊर्जा संसाधनों का सीमित इस्तेमाल करें. साथ ही अगले एक साल तक गोल्ड न खरीदें. दरअसल गैस और ईंधन के साथ ही गोल्ड को इंपोर्ट करना पड़ता है. इसके लिए भारत सरकार को डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. ऐसे में अगर ऊर्जा संसाधनों का सीमित इस्तेमाल होगा और गोल्ड की खरीदारी कम होगी, तो फिर इसका इंपोर्ट भी कम होगा. इससे देश का डॉलर अधिक खर्च नहीं होगा और भारतीय रुपया भी मजबूत रहेगाप्रधानमंत्री ने देशवासियों से जो अपील की है, उसका असर सिर्फ देश की आर्थिकी पर नहीं पड़ेगा, बल्कि ऊर्जा संसाधनों के कम इस्तेमाल से पर्यावरण और हिमालय पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. दरअसल, अत्यधिक वाहनों का उपयोग और ऊर्जा संसाधनों के इस्तेमाल की वजह से ग्लोबल वार्मिंग हो रही है. वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज, भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. यही वजह है कि अगर ऊर्जा संसाधनों का सीमित इस्तेमाल किया जाता है, तो ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने में काफी फायदेमंद साबित होगी. खासकर पर्यावरण और हिमालई क्षेत्रों पर इसका काफी सकारात्मक प्रभाव देखने का मिलेगा. इसका एक जीत जागता उदाहरण कोरोना काल के दौरान लगा लॉकडाउन है.वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान, भारत सरकार ने जनता को सुरक्षित रखने के लिए चरणबद्ध तरीके से देश भर में लॉकडाउन लागू कर दिया था. हालांकि, उस दौरान शुरुआती दौर में आम जनता को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा. लेकिन देश भर में लागू लॉकडाउन का हिमालय और पर्यावरण पर काफी अधिक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला था. लॉकडाउन के दौरान न सिर्फ देश भर में पॉल्यूशन का असर घट गया था, बल्कि क्लाइमेट चेंज जैसी समस्या से भी लोगों को कुछ समय के लिए निजात मिली थी. खास बात यह रही कि गंगा, हरिद्वार तक पूरी तरह से साफ हो गई थी. पर्वतीय क्षेत्रों में नए पौधों के उगने और वन्य जीवों के भ्रमण की गतिविधियां भी बढ़ गई थी. इसी वजह से माना जा रहा है कि अगर देश की जनता पीएम की अपील को मानती है, तो ये हिमालय के लिए संजीवनी साबित होगी.  प्रधानमंत्री की यह अपील केवल ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर, सक्षम और जिम्मेदार भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प है। जब देशहित सर्वोपरि हो, तब प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का दायित्व है कि वह अपने स्तर पर संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे।मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों, नप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी कहा है कि वे अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचें, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दें तथा ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री के इस आह्वान को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू करेगी, ताकि संसाधनों की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्य भी हासिल किए जा सकें।इससे पहले खुद प्रधानमंत्री ने इस पर अमल करते हुए बुधवार को कैबिनेट की बैठक में सिर्फ चार गाड़ियों के काफिले से पहुंचे। उन्होंने अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने पर जोर दिया। पीएम की अपील पर भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री ने अपने काफिले को आधा कर दिया है।गौरतलब है कि पीएम मोदी ने हैदराबाद के सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से अपील की थी कि वे अगले एक साल तक सोने की खरीद कम करें, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की सके। इसके अलावा पीएम मोदी ने ईंधन की खपत कम करने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा था कि जहां संभव हो, वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहनों का उपयोग करें। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का सामना भी एकजुट होकर करना होगा। पश्चिम एशिया संकट का असर ईंधन, खाद्य और उर्वरक आपूर्ति पर पड़ सकता है, इसलिए हर नागरिक को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील को ध्यान से पढ़ें, चिंतन, मनन व चर्चा करें तथा उसके पश्चात निष्कर्ष निकालें। उन्होंने कहा कि “देश रहेगा तो हम सब रहेंगे, प्रदेश सुरक्षित रहेगा तो हम सब सुरक्षित रहेंगे।”. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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