डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में हर साल तंबाकू उत्पादों से 1217 टन से अधिक कचरा पैदा हो रहा है। यह खुलासा उत्तराखंड स्टेट फैक्ट शीट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक सिगरेट, बीड़ी व धुआं रहित तंबाकू उत्पादों से निकलने वाला कचरा राज्य में पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गया है।रिपोर्ट बताती है कि राज्य में सबसे अधिक 561.82 टन कचरा धुआंरहित तंबाकू उत्पादों से निकलता है। इसके बाद 420.05 टन कचरा सिगरेट व 235.76 टन कचरा बीड़ी से उत्पन्न होता है।सर्वे में पाया गया कि तंबाकू उत्पादों के कारण हर साल 458.93 टन प्लास्टिक, 358.96 टन कागज, 62.48 टन फायल और 14.16 टन फिल्टर कचरा पैदा होता है। सिगरेट के फिल्टर व प्लास्टिक पैकेजिंग अवशेष लंबे समय तक पर्यावरण में रहकर मिट्टी तथा जल स्रोतों को प्रदूषित कर बड़ी चुनौती पैदा कर रहे हैं।तंबाकू उत्पादों से निकलने वाला प्लास्टिक कचरा करीब 4.59 लाख प्लास्टिक बाल्टियों के बराबर है। आंकड़ा बताता है कि तंबाकू का पर्यावरणीय असर गंभीर प्लास्टिक प्रदूषण के रूप में सामने आ रहा है।ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे के अनुसार, उत्तराखंड में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या 26.5 प्रतिशत है। इनमें 4.9 प्रतिशत लोग सिगरेट व 15.7 प्रतिशत लोग बीड़ी का सेवन करते हैं।तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग के लिए हर वर्ष करीब 8873 पेड़ों की कटाई करनी पड़ती है। यह उतने कागज के बराबर है, जिससे लगभग 4.8 लाख नोटबुक तैयार की जा सकती हैं।तंबाकू उत्पाद निर्माताओं की जवाबदेही तय कर पैकेजिंग अपशिष्ट के लिए प्रबंधन की प्रणाली विकसित हो। जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। अन्यथा तंबाकू से निकलने वाला कचरा आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की जैव विविधता के लिए बड़ा संकट बन जाएगा। अगर हम साल 2025-2026 के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कच्चे तंबाकू के शीर्ष खरीदारों में चीन करीब 1.78 बिलियन डॉलर के भारी-भरकम आयात के साथ पहले पायदान पर काबिज है. इस रेस में बेल्जियम भी बहुत पीछे नहीं है, जो लगभग 1.67 बिलियन डॉलर के आयात के साथ दूसरे स्थान पर है. चीन अकेले ही पूरी दुनिया की कुल तंबाकू खेती का लगभग 40% हिस्सा खुद पैदा करता है, लेकिन अपने विशाल घरेलू बाजार के कारण वह दुनिया का सबसे बड़ा अंतिम उपभोक्ता भी है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान की “भारत में तम्बाकू उत्पादों के कचरे का पर्यावरणीय बोझ” पर एक रिपोर्ट के अनुसार, सिगरेट और उसके फिल्टर कुल समुद्री मलबे में 19 प्रतिशत का योगदान करते हैं. यह समुद्री जीवन को खतरे में डाल रहा है, क्योंकि यह विषाक्त पदार्थ छोड़ता है. यह पर्यावरण के लिए विनाशकारी है.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











