• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

खिसक रहा है पहाड़ों का गुरुत्वाकर्षण केंद्र

04/08/21
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
127
SHARES
159
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला:

प्राकृतिक आपदा के लिहाज से उत्तराखंड बेहद संवेदनशील राज्य है। कभी भूकंप, कभी ग्लेशियर खिसकने तो कभी भूस्खलन की घटनाएं यहां आए दिन सामने आती रहती हैं। केदारनाथ आपदा हो या फिर चमोली त्रासदी, इन घटनाओं ने पहाड़ को ऐसे जख्म दिए हैं, जो कभी भर नहीं पाएंगे। अब भू वैज्ञानिकों ने हमारे पहाड़ों को लेकर एक और डराने वाला खुलासा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है पहाड़ों का गुरुत्वाकर्षण केंद्र अपनी जगह से खिसकने लगा है।

आबादी वाले पहाड़ खोखले भी होने लगे हैं। जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश में पहाड़ों के खिसकने की घटनाएं और बढ़ेंगी। सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि हिमाचल, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में बसे पहाड़ी इलाकों और नेपाल, भूटान, तिब्बत जैसे देशों में भी ऐसी घटनाओं के बढ़ने की संभावना ज्यादा है। जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व महानिदेशक ने कहा कि पहाड़ों की टो कटिंग और ज्यादा बारिश से प्रदेश में हालात बिगड़ रहे हैं। पहाड़ों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण से पहाड़ों का पूरा गुरुत्वाकर्षण केंद्र डिस्टर्ब हो गया है। पहाड़ों की टो कटिंग और बेतरतीब तरीके से हो रहे निर्माण की वजह से हालात बिगड़ रहे हैं।

पहाड़ तभी टिका रह सकता है, जब उसका गुरुत्वाकर्षण केंद्र स्थिर हो। पहाड़ों पर बेवजह बोझ और तोड़फोड़ से पहाड़ को स्थिर रखने वाला गुरुत्वाकर्षण केंद्र अपनी जगह छोड़ देता है। नतीजा पहाड़ खिसकने लगते हैं, लैंडस्लाइड की घटनाएं होती हैं। उत्तराखंड-हिमाचल में भूस्खलन और पहाड़ों के खिसकने की घटनाएं बढ़ रही हैं। आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी। बात करें उत्तराखंड की तो यहां पहाड़ों के खिसकने का सिलसिला लगातार जारी है। जिससे लोगों की जान जा रही है, पहाड़ी इलाकों में आवागमन भी ठप हो गया हो गया है। डॉ. चंदेल ने इसे लेकर एक शोध किया है। उन्होंने अपनी इस रिपोर्ट को पहाड़ी राज्यों को भी सौंपा था।

साथ ही कहा था कि पहाड़ी राज्यों में पहाड़ों की कटिंग में बैलेंस का पूरा ध्यान रखा जाए। वो कहते हैं कि पहाड़ पर अधिक बारिश होने की वजह से लैंड स्लाइडिंग होना सामान्य बात है, लेकिन जब यह घटनाएं किसी मानव निर्मित निर्माण के साथ होती हैं तो इस पर चिंता करने की आवश्यकता बढ़ जाती है। हमें इस ओर ध्यान देना होगा, ऐसा न किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ेंगे। उखीमठ से पर्यटक स्थल चोपता जा रहे हैं तो पहले यह वीडियो देख लीजिए।

लगातार बारिश से चोपता जाने वाली सड़क बुरी तरह धंस गई है। आपको बता दें कि यह सड़क पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आती है। सड़क का हाल पहले से ही बुरा था लेकिन अब इस सड़क पर जाना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। चोपता में हर साल हजारों-लाखों की संख्या में सैलानी आते हैं लेकिन यहा सुवधाओं का हमेशा से ही टोटा रहा है। यहां भारी बारिश के बाद सड़क का एक बड़ा हिस्सा काफी नीचे धंस गया है। इस वजह से लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

आज यानी 3 अगस्त को भी उत्तराखंड के 10 जिलों में भारी बारिश, भूस्खलन और बिजली गिरने की संभावना है। आज उत्तराखंड के चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर जिलों में भारी बारिश भूस्खलन और बिजली करने की संभावनाएं हैं। मौसम विभाग का अनुमान है की इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश या फिर तीव्र बौछार के साथ बारिश हो सकती है। संवेदनशील इलाकों में मध्यम से विशाल भूस्खलन और चट्टान गिरने जैसी खबरें सामने आ सकती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं सड़कें अवरूद्ध हो सकती हैं।

नदियों और नालों का अतिप्रवाह देखने को मिल सकता है जिससे मैदानी क्षेत्रों के निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है। मौसम विभाग ने सुझाव दिया है कि नदी नालों के समीप रहने वाले लोग सावधान रहें। वाहन चलाते समय यात्रियों की या वाहन से जाने वाले लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। मौसम विभाग ने लोगों कि वे आकाशीय बिजली चमकने या फिर गर्जना के समय सुरक्षित स्थानों में शरण की सलाह दी है

केदारनाथ धाम में रावल और पुजारियों को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए केदारनाथ धाम में  तीन मंजिला भवन का निर्माण करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इसके लिए 10 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है।  केदारनाथ धाम से करीब 300 मीटर सरस्वती नदी के समीप बनने वाले तीन मंजिला इमारत में 18 कक्षों का निर्माण किया जाएगा। 6.39 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस इमारत में रावल निवास, पुजारी आवास, भोग मंडी, पंथेर आवास, समालिया आवास, वेदपाठी आवास, पूजा कार्यालय आदि की व्यवस्था की जाएगी।

जिसके लिए शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये की धनराशि उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड को दी गई है। सचिव पर्यटन ने बताया कि तीन मंजिला इमारत का निर्माण होने के बाद यात्रा के साथ पूजा का सफल आयोजन हो सकेगा। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम में रावल व अन्य पुजारियों, हक हकूकधारियों के लिए कोई सुविधा नहीं थी इसलिए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि 265 वर्ग मीटर में होने वाले भवन निर्माण के लिए जिलाधिकारी की ओर से मंदिर परिसर के समीप जमीन उपलब्ध कराई गई है। निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है

प्रफुल्लचंद्र राय का जन्म 2 अगस्त, 1861 ई. में जैसोर ज़िले के ररौली गांव में हुआ था। यह स्थान अब बांग्लादेश में है तथा खुल्ना ज़िले के नाम से जाना जाता है। उनके पिता हरिश्चंद्र राय इस गाँव के प्रतिष्ठित जमींदार थे। वे प्रगितशील तथा खुले दिमाग के व्यक्ति थे। आचार्य राय की माँ भुवनमोहिनी देवी भी एक प्रखर चेतना-सम्पन्न महिला थीं। जाहिर है, प्रफुल्ल पर इनका प्रभाव पड़ा था। आचार्य राय के पिता का अपना पुस्तकालय था।

उनका झुकाव अंग्रेज़ी शिक्षा की ओर था। इसलिए उन्होंने अपने गांव में एक मॉडल स्कूल की स्थापना की थी जिसमें प्रफुल्ल ने प्राथमिक शिक्षा पायी। बाद में उन्होंने अल्बर्ट स्कूल में दाखिला लिया। सन 1871 में प्रफुल्ल ने अपने बड़े भाई नलिनीकांत के साथ डेविड हेयर के स्कूल में प्रवेश लिया। डेविड हेयर खुद शिक्षित नहीं थे परंतु उन्होंने बंगाल में पश्चिमी शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राय ने अपनी आत्मकथा में ज़िक्र किया है कि किस तरह हेयर स्कूल में उनके सहपाठी उनकी खिल्ली उड़ाया करते थे।

छात्र उन्हें ‘बंगाल’ उपनाम से चिढ़ाने थे। राय उस स्कूल में ज़्यादा दिन नहीं पढ़ सके। बीमारी के कारण उन्हें न सिर्फ स्कूल छोड़ना पड़ा बल्कि नियमित पढ़ाई भी छोड़ देनी पड़ी। लेकिन उस दौरान उन्होंने अंग्रेज़ी-क्लासिक्स और बांग्ला की ऐतिहासिक और साहित्यिक रचनाओं का अध्ययन किया। अंग्रेजी हुकूमत से विज्ञान तपस्वी की उपाधि प्राप्त करने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की बुधवार को जयंती डाक्टर प्रफुल्ल चंद्र राय का जन्म प्रदेश के खुलना जिलांतर्गत ररूली कतिपरा गांव में दो अगस्त, 1861 को हुआ था। वे भारत के महान रसायनज्ञ, उद्यमी तथा महान शिक्षक थे।

आचार्य राय केवल आधुनिक रसायन शास्त्र के प्रथम भारतीय प्रवक्ता (प्रोफेसर) ही नहीं थे बल्कि उन्होंने ही इस देश में रसायन उद्योग की नींव भी डाली थी। Þसादा जीवन उच्च विचार’वाले इस महान वैज्ञानिक की आत्मकथा लाइफ एंड एक्सपीरियेंसेस ऑफ बंगाली केमिस्ट के प्रकाशित होने पर अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका नेचर’ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए लिखा था कि लिपिबद्ध करने के लिए संभवत: प्रफुल्ल चंद्र राय से अधिक विशिष्ट जीवन चरित्र किसी और का नहीं हो सकता है। उन्होंने अपना अनुसंधान कार्य पारद के यौगिकों से प्रारंभ किया था। सर्वप्रथम सन 1896 में पारद नाइट्राइट नामक यौगिक तैयार किया, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि मिली।

इसकीसहायता से 80 नए यौगिक तैयार किए और कई महत्वपूर्ण एवं जटिल समस्याओं को सुलझाया। ऐमोनियम, ¨जक, कैडमियम, कैल्सियम, स्ट्रांशियम, वैरियम, मैग्नीशियम इत्यादि के नाइट्राइटों के साथ संबंध में भी महत्वपूर्ण खोज करते हुए ऐमाइन नाइट्राइटों को विशुद्ध रूप में तैयार कर, उनके भौतिक और रासायनिक गुणों का पूरा विवरण दिया।आपने ऑर्गेनोमेटालिक यौगिकों का भी विशेष रूप से अध्ययन कर कई उपयोगी तथ्यों का पता लगाया तथा पारद, गंधक और आयोडीन का एक नवीन यौगिक, तैयार किया तथा दिखाया कि प्रकाश में रखने पर इसके क्रिस्टलों का वर्ण बदल जाता है और अँधेरे में रखने पर पुन: मूल रंग वापस आ जाता है।

सन् 1904 में बंगाल सरकार ने आपको यूरोप की विभिन्न रसायनशालाओं के निरीक्षण के लिये भेजा। इस अवसर पर विदेश के विद्धानों तथा वैज्ञानिक संस्थाओं ने सम्मानपूर्वक आपका स्वागत किया था। सादा जीवन उच्च विचार’ वाले उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने कहा था, “शुद्ध भारतीय परिधान में आवेष्टित इस सरल व्यक्ति को देखकर विश्वास ही नहीं होता कि वह एक महान वैज्ञानिक हो सकता है।प्रेसीडेंसी कालेज में विद्यार्थियों को रसायन की कक्षा में व्याख्यान देते समय भी आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय यह कहना नहीं भूलते थे कि “साइंस कैन वेट वट स्वराज कैन नाट” अर्थात्‌ विज्ञान प्रतीक्षा कर सकता है परन्तु स्वराज नहीं। 1892 में उन्होंने इस देश की प्रथम रासायनिक उद्योग कम्पनी “बंगाल केमिकल्स एण्ड फार्मास्युटिकल्स वर्क्स” की स्थापना की जो आज भी बंगाल केमिकल्स के नाम से कार्यरत है।

उन्हें भारतीय समाज से भी अत्यधिक प्रेम था।1922 के बंगाल के भीषण अकाल में आचार्य राय अपने सभी कार्यों को छोड़कर पीड़ितों की सहायता के लिए निकल पड़े। व्यक्तिगत प्रयासों से उन्होंने तीन लाख रुपये की सहायता राशि एकत्रित की।उनके आह्वान पर बंगाली ललनाओं ने महंगे रेशमी वस्त्र और आभूषण आदि सभी कुछ उनकी झोली में डाल दिए। उनके अथक प्रयासों को देखकर किसी ने सच ही कहा था कि यदि महात्मा गांधी दो प्रफुल्ल चंद्र और उत्पन्न कर सकते तो भारत को स्वराज शीघ्र ही मिल जाता।

इनके सहपाठियों में रसायन के सुप्रसिद्ध विद्वान् प्रोफेसर जेम्स वाकर एफ. आर. एस., ऐलेक्जैंडर स्मिथ तथा हफ मार्शल आदि थे, जिनके संपर्क से रसायनशास्त्र की ओर आपका विशेष झुकाव हुआ। इस विश्वविद्यालय की केमिकल सोसायटी के ये उपसभापति भी चुने गए।सन् 1887 में आप डी. एस.सी. की परीक्षा में सम्मानपूर्वक उत्तीर्ण हुए। तत्पश्चात् आपने इंडियन एडुकेशनल सर्विस में स्थान पाने की चेष्टा की, पर अंग्रेजों की तत्कालीन रंगभेद की नीति के कारण इन्हें सफलता न मिली।आगे चलकर सन् 1892 में 800 रूपए की अल्प पूँजी से, अपने रहने के कमरे में ही, विलायती ढंग की ओषधियाँ तैयार करने के लिये बंगाल कैमिकल ऐंड फार्मास्युटिकल वक्र्स का कार्य आरंभ किया, जो प्रगति कर आज करोड़ों रूपयों के मूल्य का कारखाना हो गया है और जिससे देश में इस प्रकार के अन्य उद्योगों का सूत्रपात हुआ है।

भारत में केवल रसायन शास्त्र ही नहीं, आधुनिक विज्ञान के भी प्रस्तोता थे। वे भारतवासियों के लिए सदैव वन्दनीय रहेंगे। आचार्य का सपना था कि देश इस मुकाम पर खड़ा हो, जहां उसे जीवन रक्षक दवाओं के लिए पश्चिमी देशों का मुंह न ताकना पड़े और आज दुनिया की कई बड़ी महाशक्ति कोरोना से निपटने के लिए भारत से मदद की गुहार लगा रही है। ऐसे विषम हालातों में उन महान हस्ती , महान वैज्ञानिक, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारकर रहे आचार्य प्रफुल्ल का आभार क‍या जाना चाहि‍ए जिनकी एक सोच ने भारत को आज कोविड-19 के खिलाफ इतना अहम बना दिया।

प्रफुल्ल चन्द्र रे सिर्फ अपने विज्ञान से ही नही बल्कि राष्ट्रवादी विचारों से भी लोगों को प्रभावित करते, उनके सभी लेख लंदन के अखबारों में प्रकाशित होते थे, वे अपने लेखों से ये बताते कि अंग्रेजों ने भारत को किस तरह लूटा और भारतवासी अब भी कैसी यातनाएं झेल रहे हैं। रसायन के क्षेत्र में आचार्य ने १२० शोध-पत्र प्रकाशित किए। मरक्यूरस नाइट्रेट एवं अमोनियम नाइट्राइट नामक यौगिकों के प्रथम विरचन से उन्हें अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई। शोध सम्बन्धी जर्नलों में राय के लगभग 200 परचे प्रकाशित हुए। इसके अलावा उन्होंने कई दुर्लभ भारतीय खनिजों को सूचीबद्ध किया। उनका उद्देश्य मेंडलीफ की आवर्त-सारिणी में छूटे हुए तत्वों को खोजना था। उनका योगदान सिर्फ रसायन विज्ञान सम्बंधी खोजों तथा लेखों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अनेक युवकों को रसायन विज्ञान की तरफ प्रेरित किया।

आचार्य राय ने एक और महत्त्वपूर्ण काम किया। उन्होंने दो खण्डों में ‘हिस्ट्री आफ़ हिन्दू केमिस्ट्री’ नामक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ लिखा। इससे दुनिया को पहली बार यह जानकारी मिली कि प्राचीन भारत में रसायन विज्ञान कितना समुन्नत था। इसका प्रथम खण्ड सन् 1902 में प्रकाशित हुआ तथा द्वितीय खण्ड 1908 में। इन कृतियों को रसायनविज्ञान के एक अनूठे अवदान के रूप में माना जाता है। आचार्य राय ने बांग्ला तथा अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में लेखन किया। सन 1893 में उन्होंने ‘सिम्पल ज़ुआलजी’ नामक पुस्तक लिखी जिसके लिए उन्होंने जीव विज्ञान की मानक पुस्तकें पढ़ीं, तथा चिड़ियाघरों और संग्रहालयों का स्वयं दौरा किया। उन्होंने ‘बासुमति’, ‘भारतवर्ष’, ‘बंगबानी’, ‘बांग्लारबानी’, ‘प्रवासी’, ‘आनंदबाज़ार पत्रिका’ और ‘मानसी’ जैसी पत्रिकाओं में बहुत सारे लेख लिखे। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपनी आय का 90 प्रतिशत दान कर दिया।

सन् 1922 में उन्होंने महान भारतीय कीमियागार नागार्जुन के नाम पर वार्षिक पुरस्कार शुरू करने के लए दस हज़ार रुपये दिए। सन 1936 में उन्होंने आशुतोष मुखर्जी के नाम पर भी एक शोध-पुरस्कार शुरू करने के लिए दस हज़ार दिए। कलकत्ता विश्वविद्यालय को उन्होंने रसायन विभाग के विस्तार तथा विकास के लिए 1,80,000 रूपए का अनुदान दिया।आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय का 16 जून, 1944 को कलकत्ता में देहावसान हो गया।

उनके बारे में यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ साइंस, लंदन के प्रोफेसर एफ.जी. डोनान ने लिखा था : सर पी. सी. राय जीवन भर केवल एक संकीर्ण दायरे में बँधे प्रयोगशाला-विशेषज्ञ बन कर नहीं रहे। अपने देश की तरक्की तथा आत्मनिर्भरता हमेशा उनके आदर्श रहे। उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं चाहा, तथा सादगी एवं मितव्ययिता का कठोर जीवन जीया। राष्ट्र एवं समाज सेवा उनके लिए सर्वोपरि रहे। वे भारतीय विज्ञान के प्रणेता थे। उन्होंने सन्न्यस्त तथा व्रती का जीवन बिताया। उ

न्होंने परिवार नहीं बसाया, तथा आजीवन अविवाहित रहे। सांसारिक बंधनों तथा मोहमाया एवं परिग्रह से अपने को कोसों दूर रखा। अपने देहावसान से पूर्व आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने अपनी समस्त संपत्ति सामाजिक कार्यों के लिए दान कर दी थी। ऐसा था ऋषितुल्य एवं प्रेरणादायी उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व। सचमुच, वे भारतीय विज्ञान जगत के ज्वाजल्यमान नक्षत्र हैं।

Share51SendTweet32
Previous Post

हर माह हो मुख्यमंत्री घोषणा की समीक्षा बैठक : जिलाधिकारी जोगदण्डे

Next Post

शिविर में स्थानीय ग्रामीणों के एनएसएस स्वयंसेवकों ने ली वैक्सीन

Related Posts

उत्तराखंड

राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों में सर्वाधिक कॉर्पोरेट आयकरदाता बना यूजेवीएन लिमिटेड

July 29, 2026
29
उत्तराखंड

देहरादून-मसूरी रोड की गुणवत्ता पर बार-बार उठ रहे सवाल

July 29, 2026
8
उत्तराखंड

हर्षिल घाटी, फिर भी पर्यटन मानचित्र से दूर

July 29, 2026
5
उत्तराखंड

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन

July 29, 2026
4
उत्तराखंड

डोईवाला: सिमलास ग्रांट में प्राकृतिक खेती को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

July 29, 2026
27
उत्तराखंड

डोईवाला: बसपा ने विधानसभा कमेटी का किया गठन

July 29, 2026
78

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67714 shares
    Share 27086 Tweet 16929
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38070 shares
    Share 15228 Tweet 9518
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों में सर्वाधिक कॉर्पोरेट आयकरदाता बना यूजेवीएन लिमिटेड

July 29, 2026

देहरादून-मसूरी रोड की गुणवत्ता पर बार-बार उठ रहे सवाल

July 29, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.