• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में बुग्यालों के लिए खतरा बनते जा रहे ट्रेकर्स

02/06/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
14
SHARES
17
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
किसी दिन आप रुद्रप्रयाग के बुग्यालों में ट्रैकिंग करने जाएं और आपको वहां बिना पूंछ वाला चूहा दिख जाए तो आप क्या करेंगे? यकीन मानिए आप चिल्लाए बिना नहीं रहेंगे और उस चूहे को देखते ही रह जाएंगे. बुग्यालों में जैव विविधता को बनाये रखने में इस छोटे हिमालयन पिका की महत्वपूर्ण भूमिका है. वहां के इको सिस्टम का यह अभिन्न अंग है. लेकिन, टूरिस्टों की लापरवाही के चलते हिमालयन पिका के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है.दरअसल, केदारनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गंदगी भी फैलने लगी है. तीर्थयात्री धाम पहुंचने के बाद यहां-वहां कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं, जो भविष्य के लिए किसी खतरे से कम नहीं है. साल 2013 की केदारनाथ आपदा आज भी सभी को याद है. जिस कारण हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और सैकड़ों लोग बेघर हो गये थे. बावजूद इसके अभी भी सबक नहीं लिया जा रहा है, जो चिंता का विषय है. किसी दिन आप रुद्रप्रयाग के बुग्यालों में ट्रैकिंग करने जाएं और आपको वहां बिना पूंछ वाला चूहा दिख जाए तो आप क्या करेंगे? यकीन मानिए आप चिल्लाए बिना नहीं रहेंगे और उस चूहे को देखते ही रह जाएंगे. बुग्यालों में जैव विविधता को बनाये रखने में इस छोटे हिमालयन पिका की महत्वपूर्ण भूमिका है. वहां के इको सिस्टम का यह अभिन्न अंग है. लेकिन, टूरिस्टों की लापरवाही के चलते हिमालयन पिका के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है.दरअसल, केदारनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गंदगी भी फैलने लगी है. तीर्थयात्री धाम पहुंचने के बाद यहां-वहां कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं, जो भविष्य के लिए किसी खतरे से कम नहीं है. साल 2013 की केदारनाथ आपदा आज भी सभी को याद है. जिस कारण हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और सैकड़ों लोग बेघर हो गये थे. बावजूद इसके अभी भी सबक नहीं लिया जा रहा है, जो चिंता का विषय है. किसी दिन आप रुद्रप्रयाग के बुग्यालों में ट्रैकिंग करने जाएं और आपको वहां बिना पूंछ वाला चूहा दिख जाए तो आप क्या करेंगे? यकीन मानिए आप चिल्लाए बिना नहीं रहेंगे और उस चूहे को देखते ही रह जाएंगे. बुग्यालों में जैव विविधता को बनाये रखने में इस छोटे हिमालयन पिका की महत्वपूर्ण भूमिका है. वहां के इको सिस्टम का यह अभिन्न अंग है. लेकिन, टूरिस्टों की लापरवाही के चलते हिमालयन पिका के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है.दरअसल, केदारनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गंदगी भी फैलने लगी है. तीर्थयात्री धाम पहुंचने के बाद यहां-वहां कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं, जो भविष्य के लिए किसी खतरे से कम नहीं है. साल 2013 की केदारनाथ आपदा आज भी सभी को याद है. जिस कारण हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और सैकड़ों लोग बेघर हो गये थे. बावजूद इसके अभी भी सबक नहीं लिया जा रहा है, जो चिंता का विषय है. बाबा केदारनाथ के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए खोल दिये गए. तब से लेकर अब तक बाबा के दरबार में दो लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. हर दिन हजारों की संख्या में केदारनाथ पहुंच रहे श्रद्धालु पैदल मार्ग से लेकर धाम तक चारों ओर फैले बुग्यालों में प्लास्टिक कचरा फेंक रहे हैं. जिसके कारण धाम की सुंदरता भी बदरंग होती जा रही है. प्लास्टिक कचरे को लेकर भी जिला प्रशासन कोई बड़ा कदम नहीं उठा रहा है. यह प्लास्टिक कचरा आपदा की दृष्टि से भी संवेदनशील है. प्लास्टिक कचरे के कारण इसके जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा है. केदारनाथ धाम के बगल से मंदाकिनी नदी बह रही है. प्लास्टिक कचरे से नदी को भी भारी नुकसान पहुंचता है. यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों को प्लास्टिक कचरे को अपने साथ वापस ले जाना चाहिए. अन्यथा इस प्लास्टिक कचरे के कारण भविष्य में बहुत बड़ी घटना हो सकती है. उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फैले मखमली घास से लिपटे बुग्याल जो कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध थे, वह अब खतरे की जद में हैं. भारी संख्या में पहुंच रहे पर्यटक और बदलते जलवायु चक्र ने इन बुग्यालों की प्राकृतिक बनावट और पर्यावरणीय संतुलन को गहरा नुकसान पहुंचाया है. वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हिमालयी पारिस्थितिकी और औषधीय वनस्पतियां नष्ट हो सकती हैं.गौर हो कि तुंगनाथ धाम के साथ चंद्रशिला पहुंच रहे पर्यटक व ट्रेकर्स रास्ते भर में प्लास्टिक कचरा बिखेर रहे हैं. जो बुग्यालों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. यहां पाए जाने वाले जीव जंतुओ के अस्तित्व पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, ऐसे में वैज्ञानिक, पर्यावरणविद खासे चिंतित नजर आ रहे हैंउत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फैले मखमली घास से लिपटे बुग्याल जो कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध थे, वह अब खतरे की जद में हैं. भारी संख्या में पहुंच रहे पर्यटक और बदलते जलवायु चक्र ने इन बुग्यालों की प्राकृतिक बनावट और पर्यावरणीय संतुलन को गहरा नुकसान पहुंचाया है. वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हिमालयी पारिस्थितिकी और औषधीय वनस्पतियां नष्ट हो सकती हैं.प्लास्टिक कचरा बन रहा चिंता का कारणगौर हो कि तुंगनाथ धाम के साथ चंद्रशिला पहुंच रहे पर्यटक व ट्रेकर्स रास्ते भर में प्लास्टिक कचरा बिखेर रहे हैं. जो बुग्यालों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. यहां पाए जाने वाले जीव जंतुओ के अस्तित्व पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, ऐसे में वैज्ञानिक, पर्यावरणविद खासे चिंतित नजर आ रहे हैं यहां हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. वन विभाग ने तारबाड़ और निगरानी की व्यवस्था की है, फिर भी पर्यटक शॉर्टकट रास्तों का इस्तेमाल कर बुग्यालों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जहां कभी मखमली घास की हरियाली थी, वहां अब मिट्टी के रास्ते और कचरे के ढ़ेर नजर आने लगे हैं. यह ना सिर्फ सौंदर्य को बिगाड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और जलवायु संतुलन को भी प्रभावित कर रहा है. यहां हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. वन विभाग ने तारबाड़ और निगरानी की व्यवस्था की है, फिर भी पर्यटक शॉर्टकट रास्तों का इस्तेमाल कर बुग्यालों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जहां कभी मखमली घास की हरियाली थी, वहां अब मिट्टी के रास्ते और कचरे के ढ़ेर नजर आने लगे हैं. यह ना सिर्फ सौंदर्य को बिगाड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और जलवायु संतुलन को भी प्रभावित कर रहा है.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share6SendTweet4
Previous Post

केदारनाथ यात्रा में चलने वाले घोड़े-खच्चर की लीद पर घमासान

Next Post

चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र हो ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद‘ – मुख्यमंत्री

Related Posts

उत्तराखंड

उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन की दर्दभरी तस्वीर और अपनों के इंतजार में गुजरती बुजुर्गों की जिंदगी को फिल्म ‘पायरे

November 3, 2026
12
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने खटीमा में 14.97 करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण परियोजना का किया भूमि पूजन

November 3, 2026
11
उत्तराखंड

भुली (BHULI) कार्यक्रम के अंतर्गत 33 उद्यमियों का भौतिक सत्यापन संपन्न, 26 के दस्तावेज पूर्ण पाए गए

November 3, 2026
77
उत्तराखंड

डोईवाला: सिंचाई गूल की भूमि पर अतिक्रमण से किसान परेशान

November 3, 2026
15
उत्तराखंड

कनालीछीना में श्रमिक जागरूकता अभियान संपन्न

November 3, 2026
10
उत्तराखंड

मोहित बिष्ट को मिला ‘राष्ट्र का युवा पथप्रदर्शक सम्मान’

November 3, 2026
10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67760 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45795 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37462 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37388 shares
    Share 14955 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन की दर्दभरी तस्वीर और अपनों के इंतजार में गुजरती बुजुर्गों की जिंदगी को फिल्म ‘पायरे

November 3, 2026

मुख्यमंत्री ने खटीमा में 14.97 करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण परियोजना का किया भूमि पूजन

November 3, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.