• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड की वनराजी जनजाति विलुप्त होने के कगार पर

24/07/25
in उत्तराखंड, देहरादून, पिथौरागढ़
Reading Time: 1min read
20
SHARES
25
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में पांच जनजातियां मूल रूप से निवास करती हैं. अन्य सभी को छोड़कर सिर्फ वनराजी जनजाति ही ऐसी है जो सबसे पिछड़ी और सबसे कम जनसंख्या वाली है, यह जनजाति उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित पिथौरागढ़ और चम्पावत जिले के दूरस्थ जंगलों के बीच बसे गांवों में रहते हैं. इसके अतिरिक्त नेपाल के पश्चिम अंचल में भी इनके कुछ छोटे गांव बसे हैं.हालांकि इनकी सर्वाधिक आबादी पिथौरागढ़ जिले में ही है. जहां पर डीडीहाट, धारचूला और कनालीछीना विकासखंडों में इनके करीब आठ-दस गांव हैं.वनराजी जनजाति जंगलों में रहने वाली जनजाति है जिन्होंने अपनी पीढ़ी गुफाओं में बिताई है. अब धीरे-धीरे इनका रहन सहन तो अन्य लोगों जैसा होने लगा है लेकिन अभी भी यह जनजाति विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है. वनराजी जनजाति की महिला पदमा देवी ने अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए बताया कि वह लोग स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार से काफी दूर है.सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए भी उनके पास कोई सरकारी कागज भी नहीं है. खेती करने लायक जमीन भी उनके पास नहीं है. पांच जनजातियों में से सबसे कम जनसंख्या वाली इस जनजाति के संरक्षण के लिए तमाम संगठन प्रयास कर रहे हैं. इन पर हुए शोध के अनुसार इस जनजाति के लोगों की औसत आयु 50 से 55 साल है, पिथौरागढ़ जिले में करीब 1500 लोग ही इस जनजाति में हैं. साक्षरता दर भी इस जनजाति के लोगों में काफी कम है, जिस वजह से सरकार ने इन्हें सरकारी नौकरी में विशेष आरक्षण तो दे रखा है लेकिन उसका फायदा भी इन्हें नहीं मिल पाता है, और सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं भी यहां धरातल पर कम ही दिखाई देती हैं. वनराजी जनजाति के तमाम परिवारों को अभी तक आरक्षित जनजाति का सर्टिफिकेट भी नहीं मिल पाया है जिस कारण सरकार की जितनी भी योजनाएं इस जनजाति के लोगों के लिए चली हुई है. उनका लाभ इन्हें नहीं मिल पाता है. आधुनिक युग मे भी इस जनजाति के लोग आदम युग में ही जी रहे हैं. वनरावत आदिवासी उत्तराखंड के तीन जिले पिथौरागढ़, चम्पावत और उधम सिंह नगर में रहते हैं. साथ ही इनका मुख्यधारा से कोई भी संपर्क नहीं है.इन आदिवासियों की जनसंख्या 850 है. इसका मतलब की यह आदिवासी समुदाय लुप्त होने की कगार पर है. इसके अलावा यह किसी भी मूलभूत सुविधाएं जैसे शिक्षा, चिकित्सा, बिजली और सड़क का लाभ नहीं उठाते हैं.साथ ही इन्हें सरकार की कोई भी हेल्थ केयर योजनाओं के साथ अन्य किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलता. इसलिए इनकी औसत आयु 55 वर्ष ही रह गई है वहीं पूरे देश की औसत आयु 70.19 वर्ष है.रिपोर्ट के मुताबिक इन आदिवासियों के लिए शिक्षा तो बहुत दूर की बात है इन्हें सही तरीके से चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल पा रही है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी यहां से 20 से 25 किलोमीटर की दूरी पर है. अगर सरकार ने जल्द ही कोई एक्शन नहीं लिया तो हो सकता है की उत्तराखंड की यह जनजाति लुप्त न हो जाए. उत्तराखंड का कमजोर होता आदिवासी समुदाय ‘वनरावत’, जो हमेशा बाकी दुनिया से कटा रहता था, को अपनी आवाज नैनीताल हाई कोर्ट में मिली है. कोर्ट ने राज्य सरकार और केंद्र से सवाल किया कि समुदाय को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से क्यों वंचित रखा गया है. उत्तराखंड स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी की ओर से इस मामले में जनहित याचिका दायर की गई है। जनहित याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड में वन रावत व वन राजि जनजाति का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। इस जनजाति की जनसंख्या लगातार घटती जा रही है। जिसकी वर्तमान जनसंख्या सिमट कर अब लगभग 900 रह गयी है। हालाँकि सरकारी पुनर्वास कार्यक्रमों ने राजी समुदाय की जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं, फिर भी उनमें से कई अभी भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। दूरदराज के इलाकों में रहने के कारण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढाँचे जैसी बुनियादी सुविधाओं तक उनकी पहुँच अभी भी दुर्लभ है। इन चुनौतियों और उनकी वंचित सामाजिक स्थिति के कारण, उनके जीवन स्तर में सुधार की प्रक्रिया धीमी रही है।हालाँकि, राजी जनजाति ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। कई परिवार अपनी आजीविका चलाने के लिए कृषि, पशुपालन और छोटे पैमाने के व्यापार में लगे हुए हैं। चुनौतियों के बावजूद, उनकी सांस्कृतिक प्रथाएँ, भाषा और पारंपरिक ज्ञान उनके जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहते हैं। अपनी विरासत को संजोते हुए आधुनिक समाज की माँगों के अनुकूल ढलने की राजी जनजाति की क्षमता उनकी स्थायी शक्ति और अपनी पैतृक जड़ों से जुड़ाव को रेखांकित करती है। राजी जनजाति के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए, उनके समुदायों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढाँचे तक पहुँच में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उनकी आजीविका को बेहतर बनाने, उनकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और सतत विकास के विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से सरकारी कार्यक्रम उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, उनके अधिकारों, पर्यावरणीय स्थिरता और पारंपरिक संसाधन प्रबंधन प्रथाओं के बारे में जागरूकता और चेतना को बढ़ावा देने से राजी जनजाति को तेज़ी से बदलती दुनिया में फलने-फूलने में मदद मिल सकती है। समृद्ध विरासत के प्रमाण हैं, जहाँ पुरानी परंपराएँ और रीति-रिवाज उनके आसपास की बदलती दुनिया के बीच भी फलते-फूलते रहतेहैं।हालाँकि पुनर्वास पहलों के कारण कई परिवार अब निर्वाह खेती के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन चट्टान तोड़ने और लकड़ी के सामान बनाने जैसी पारंपरिक गतिविधियाँ उनके दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनी हुई हैं। इन परिवर्तनों के बावजूद, राजी समुदाय अपने लचीलेपन और शक्ति के लिए जाना जाता है, जो आधुनिक चुनौतियों के साथ तालमेल बिठाते हुए अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान को गर्व से बनाए रखता है। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

Share8SendTweet5
Previous Post

वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा किए जा रहे हैं लगातार प्रयास

Next Post

बच्चों के बहुभाषी गायन समूह के लिए ऑडिशन शुरू

Related Posts

उत्तराखंड

जुगनू ऐप घर बैठे बुक होगी गाड़ी

April 18, 2026
9
उत्तराखंड

धार्मिक तथा औषधीय गुणों से भरपूर है तिल

April 18, 2026
7
उत्तराखंड

कालीदास पर केन्द्रित कार्यक्रम का आयोजन दून पुस्तकालय में

April 18, 2026
10
उत्तराखंड

भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने से पूर्व मान्य परंपरा के अनुसार शनिवार को तिमुण्डा मेला बड़े ही उत्साह के साथ संपन्न

April 18, 2026
8
उत्तराखंड

पिथौरागढ़ जनपद में समस्त राजकीय/अशासकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन

April 18, 2026
15
उत्तराखंड

ग्राम पंचायत तलवाड़ी में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

April 18, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67671 shares
    Share 27068 Tweet 16918
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38050 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37329 shares
    Share 14932 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

जुगनू ऐप घर बैठे बुक होगी गाड़ी

April 18, 2026

धार्मिक तथा औषधीय गुणों से भरपूर है तिल

April 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.