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स्वर्गीय सोबन सिंह जीना कुशल वक्ता, कूटनीतिज्ञ के अलावा पर्वतीय विकास के पैरोकार भी रहे

04/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
सोबन सिंह जीना का जन्म 4 अगस्त 1909 को अल्मोड़ा जिले के सुनोली गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम प्रेम सिंह और माता का नाम किशनी देवी था. प्रेम सिंह के चार बेटों में शेर सिंह, भीम सिंह, साधु सिंह में शोबन सिंह दूसरे नंबर के थे. जबकि, उनकी चार बहनें बचुली देवी, सरला देवी, गंगा देवी और आनंदी देवी थी. प्राथमिक शिक्षा सुनोली में लेने के बाद जीना आगे की शिक्षा के लिए नैनीताल चले गए. साल 1926 में प्रथम श्रेणी में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने जीआईसी अल्मोड़ा से इंटर की परीक्षा पास की. इलाहाबाद से स्नातक करने के बाद उन्होंने कानून की शिक्षा ली और बाद में अल्मोड़ा आकर वकालत शुरू की. जीना साल 1936 से 1948 तक जिला परिषद के सदस्य भी रहे. इस दौरान उन्होंने शिक्षा के विकास के लिए अनेक कार्य किए और अनेक स्थानों पर स्कूल खुलवाने में अहम योगदान दिया.साल 1977 में जीना अल्मोड़ा बारामंडल से यूपी विधानसभा के लिए विधायक चुने गए और उन्हें पर्वतीय विकास मंत्री बनाया गया. इस कार्यकाल में भी जीना ने समाज और वंचित तबके के लिए काफी कुछ किया उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा अपनी संस्कृति के साथ-साथ यहां जन्मी कई महान विभूतियों की वजह से भी जानी जाती है. जो राजनीतिज्ञ ही नहीं बल्कि कुशल वक्ता, कूटनीतिज्ञ के अलावा पर्वतीय विकास के पैरोकार भी रहे. स्वर्गीय सोबन सिंह की. सोबन सिंह जीना का जन्म 4 अगस्त 1909 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सुनोली गांव में हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा गांव से हुई और माध्यमिक शिक्षा के लिए वह नैनीताल गए. इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा और कानून की डिग्री हासिल की. वकालत के साथ वह शैक्षिक और सामाजिक विकास में अपना अहम योगदान देते थे. इसके अलावा भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य और फिर वह भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष भी रहे.स्व. सोबन सिंह जीना आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. वह उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय विकास मंत्री भी रहे थे. खास बात यह भी है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी होने के बावजूद भी उन्होंने राजनीति के लिए पहाड़ से कभी भी मोह नहीं छोड़ा. गुलामी के दौर में जिला परिषद के सदस्य चुने जाने पर सबसे पहले पर्वतीय क्षेत्र में विद्यालय स्थापित कराए ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके. वर्तमान में कुमाऊं में उनके नाम के कॉलेज और अस्पताल भी हैं, जिसमें अल्मोड़ा का सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान अल्मोड़ा और हल्द्वानी का सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल है. अल्मोड़ा के निवर्तमान नगर पालिकाध्यक्ष ने बताया कि सोबन सिंह जीना अल्मोड़ा के बहुत ही सम्मानित और प्रबुद्ध वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में रहे. प्रख्यात अधिवक्ता होने के साथ-साथ वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचा करते थे. वह भारतीय जनसंघ के अल्मोड़ा में संस्थापकों में से रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे. उत्तराखंड राज्य की स्थापना में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा था. समाज में उनके योगदान की वजह से ही कॉलेज-अस्पताल के नाम उनके नाम पर हैं. सोबन सिंह जीना एक शिक्षाव्रत रहे. अल्मोड़ा इंटर कॉलेज के प्रबंधक भी रहे और कई विद्यालय से वह संबद्ध रहे. शिक्षा के प्रचार प्रसार में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है, तो इसीलिए आज भी उनको याद किया जाता है.  स्व. सोबन सिंह जीना को हर वक्त पहाड़ के विकास की चिंता सताती थी. आजादी से पहले जीना 1936 से 1948 तक जिला परिषद के सदस्य भी रहे. इस दौरान उन्होंने शिक्षा के विकास के लिए अनेक कार्य किए और पहाड़ों में अनेक स्थानों पर स्कूल खुलवाए. उन्हीं के प्रयासों से पहाड़ों के दुर्गम क्षेत्रों तक शिक्षा की रोशनी पहुंच पाई.इतिहाकार बताते हैं कि उनके संबंध उस दौर के बीजेपी के बड़े नेताओं अटल बिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी से लेकर उस समय के आरआरएस के बड़े नेताओं से थी. वे लोग जब भी अल्मोड़ा पहुंचते थे तो वह सोबन सिंह जीना के आवास में ही रुकते थे. क्योंकि, उनके पास यहां रहने के सारे इंताजाम थे.उन्होंने बताया कि स्व. सोबन सिंह जीना ने आपातकाल का दौर भी झेला था. अटल जी जब भी कटु अनुभव भुलाने के बहाने पहाड़ की यात्रा पर अल्मोड़ा पहुंचे तो जीना से जरूर मिले. तब सोबन सिंह ने अटल जी के सामने अविकसित पहाड़ की तस्वीर बदलने की इच्छा जाहिर की. पर्वतीय अंचलों के विकास हेतु समर्पित, जनसंघ के संस्थापक सदस्य एवं प्रख्यात कानूनविद स्व. सोबन सिंह जीना जी की जयंती पर कोटिशः नमन।। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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