• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

देवभूमि का दर्द विकास के नाम पर विनाश का दस्तावेज़

24/08/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
26
SHARES
33
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तरकाशी जिले के धराली  से, चमोली के थराली में बादल फटने से हुई भीषण तबाही उत्तराखंड के पर्यावरणीय संकट की गंभीर चेतावनी है। विकास के नाम पर हो रही पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई, अवैज्ञानिक निर्माण और बेतरतीब पर्यटन ने पहाड़ों की सहनशीलता को खत्म कर दिया है। जमीन की लूट, संस्कृति का क्षरण और लगातार बढ़ता तापमान, उत्तराखंड को विनाश की ओर धकेल रहे हैं। यह लेख केवल एक त्रासदी का बयान नहीं, बल्कि उस गूंगी प्रकृति की पुकार है जिसे हमने वर्षों से नजरअंदाज किया। अब वक्त है रुकने, सोचने और सुधरने कावरना अगली आपदा आपके दरवाज़े पर होगी।उत्तरकाशी के धराली  में बादल फटा। चार लोग मारे गए, पचास से अधिक लापता हैं। पूरा का पूरा गांव मिट्टी में मिल गया। पहाड़ एक बार फिर चीख पड़ा है मगर इस बार उसकी चीख में सिर्फ पीड़ा नहीं, बल्कि आक्रोश है। वर्षों से सहते-सहते अब पहाड़ों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। और यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी बनाई हुई त्रासदी है। हमने पहाड़ों को छेड़ा, उन्हें काटा, उन्हें चीर दियाऔर अब वे टूटने लगे हैं, बिखरने लगे हैंउत्तराखंड, जिसे देवभूमि कहा जाता था, अब आपदाओं की भूमि बन गया है। बारिश, भूस्खलन, बादल फटना, नदी का रुख बदल जाना अब ये आम हो गया है। हर मानसून एक गांव बहा ले जाता है, हर बरसात किसी के घर उजाड़ जाती है, और हर बारिश एक नई लाश गिनती है। लेकिन इसके बावजूद सरकारें चुप हैं, योजनाएं गूंगी हैं और जनता बेबस।जिसे हम विकास कहते हैं, दरअसल वह विनाश का दूसरा नाम बन चुका है। पहाड़ों पर सड़कें बनाने के लिए डायनामाइट से विस्फोट किए जाते हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होती है। पूरी की पूरी पर्वत कीमत पर? प्रकृति की शांति और संतुलन को तोड़कर हम क्या हासिल कर रहे हैं? जो सड़कें सुरक्षा लानी चाहिए थीं, वे अब मौत की राह बन गई हैं। जो टनल सुगमता का वादा करती थीं, वे अब आपदा का द्वार बन चुकी हैं।पर्यटन के नाम पर उत्तराखंड का जिस तरह से दोहन किया जा रहा है, वह अभूतपूर्व है। सैकड़ों गाड़ियाँ, हजारों पर्यटक, प्लास्टिक का पहाड़, ट्रैफिक की कतारें यह सब मिलकर उत्तराखंड के पर्यावरण पर ऐसा बोझ डाल रहे हैं, जिसे अब पहाड़ सह नहीं पा रहे। कभी यहां गर्मियों में पंखा नहीं चलता था, अब अक्टूबर में भी लोग एसी चला रहे हैं। यह सिर्फ जलवायु परिवर्तन नहीं, यह चेतावनी है कि हमने अपनी सीमाएं पार कर दी हैं।बाहरी लोग भारी संख्या में आकर जमीनें खरीद रहे हैं, घर बना रहे हैं, कॉलोनियां उगा रहे हैं। स्थानीय लोगों की जमीनें औने-पौने दामों में छीनी जा रही हैं। संस्कृति खतरे में है, भाषा गुम हो रही है, और पहचान मिट रही है। उत्तराखंड अब उत्तर-हाउसिंग प्रोजेक्ट बन चुका है। जो भूमि कभी साधु-संतों की थी, अब रियल एस्टेट माफिया की गिरफ्त में है। और सरकारें बस तमाशबीन बनी बैठी हैं।दिल्ली से उत्तराखंड तक एक्सप्रेसवे बनने वाला है। इस पर कोई गर्व महसूस कर सकता है, लेकिन जो लोग उत्तराखंड की आत्मा को जानते हैं, उन्हें पता है कि यह सड़क उस दरवाजे की आखिरी कड़ी होगी जो शांति की ओर जाता था। यह मार्ग विकास के नाम पर उत्तराखंड की आत्महत्या की कहानी बन जाएगा। अभी तो वीकेंड में ही दिल्ली से हजारों लोग आते हैं, सोचिए जब यह सड़क पूरी होगी और हर दिन लाखों की भीड़ पहाड़ों पर चढ़ेगी तब क्या बचेगा यहां?विनाश का यह सिलसिला नियमों की कमी से नहीं, नियत की कमी से है। पर्यावरणीय रिपोर्टें बस एक औपचारिकता बन चुकी हैं। परियोजनाओं को मंजूरी देने वाले अधिकारी जानते हैं कि उनका हर हस्ताक्षर एक पेड़ को मार रहा है, एक चट्टान को कमजोर कर रहा है, एक गांव को डुबो रहा है। लेकिन धन, पद और प्रभाव के आगे ये सारी चेतावनियां बेअसर हो जाती हैं। इसीलिए तो आज स्थिति यह है कि हिमालय जैसा अचल पर्वत भी थरथराने लगा है।यह केवल प्राकृतिक संकट नहीं, यह हमारी नैतिक विफलता भी है। हमने न सिर्फ पेड़ काटे, बल्कि भरोसे भी काट डाले। नदियों की धारा मोड़ी, तो साथ में भविष्य भी मोड़ दिया। हम भूल गए कि हिमालय सिर्फ बर्फ से नहीं बना, वह आस्था से बना है, संतुलन से बना है। और इस संतुलन को तोड़ने की हमारी कोशिश अब हर बरसात में लाशों की गिनती बढ़ाकर जवाब दे रही है।समाधान कठिन है, पर असंभव नहीं। हमें तत्काल प्रभाव से नई निर्माण परियोजनाओं पर रोक लगानी होगी। पहाड़ों की सहनशीलता को विज्ञान से नहीं, विवेक से समझना होगा। पर्यटन को सीमित करना होगा उसके लिए ‘जैसी अवधारणाओं को गंभीरता से लागू करना होगा। पर्यटकों की संख्या तय हो, वाहनों की सीमा तय हो, और सबसे जरूरी स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना कोई भी निर्णय न लिया जाए।जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगानी होगी। यह जरूरी है कि कोई बाहरी व्यक्ति पहाड़ में जमीन खरीदने से पहले उस भूमि की संस्कृति और पारिस्थितिकी को समझे। नहीं तो वह सिर्फ एक नया खतरा लेकर आएगा।शिक्षा के स्तर पर हमें जलवायु संकट और पर्यावरणीय जागरूकता को स्कूलों से जोड़ना होगा। बच्चों को यह सिखाना होगा कि पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन नहीं देते, वे पहाड़ों को थामे रहते हैं। नदी सिर्फ पानी नहीं देती, वह जीवन देती है। चट्टानें सिर्फ पत्थर नहीं होतीं, वे इतिहास, भूगोल और संस्कृति की नींव होती हैं।इस समय जब थराली का गांव कीचड़ में दबा पड़ा है, और सैकड़ों परिजन अपनों को ढूंढ रहे हैं हमें यह समझना चाहिए कि यह शुरुआत नहीं है, यह आखिरी चेतावनी है। अगर अब भी हम नहीं रुके, तो अगली बार यह हादसा किसी और गांव में नहीं, आपके दरवाजे पर दस्तक देगा। दिल्ली, देहरादून, हल्द्वानी, मसूरी कोई सुरक्षित नहीं बचेगा।उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, वह एक चेतना है। उसे बचाना केवल स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी नहीं, यह पूरे देश की जिम्मेदारी है। सरकारों को अब सिर्फ घोषणाएं नहीं, कठोर और साहसी निर्णय लेने होंगे। वरना वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड का हर गांव एक धराली  और थराली बन जाएगा और फिर हम सिर्फ शोक सभा कर पाएंगे, समाधान नहीं।आज समय है संकल्प लेने का। समय है यह स्वीकार करने का कि हमने गलती की हैऔर समय है उसे सुधारने का। अगर अभी नहीं चेते, तो हम इतिहास में दर्ज हो जाएंगेउन लोगों के रूप में, जिन्होंने देवभूमि को विनाशभूमि बना दिया। अभी उत्तरकाशी की धराली आपदा से उबरा भी नहीं था, कि चमोली जिले के थराली इलाके में बीती रात बादल फटने से भयंकर तबाही हुई. इस आपदा में चेपडों गांव का पूरा बाजार तबाह हो गया. कई आपदा पीड़ितों में अपनी दुख भरी कहानी बताई. कैसे व्यापारियों के सामने उनकी दुकानों का नामोनिशान मिट गया. वहीं एक व्यापारी ने बताया कि आधी रात उनकी आंखों के सामने उनके पिता पानी के तेज बहाव में बह गए और वो उन्हें बचा भी नहीं पाए. इलाके में आपदा के बाद हालात इतने खराब हैं कि प्रशासन की टीम भी ग्राउंड जीरो पर नहीं पहुंचा पा रही है. अब यह समझना होगा कि हिमालय कोई निर्माण क्षेत्र नहीं है,यह जीवनदायी पारिस्थितिक तंत्र है, जो न केवल सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा भी है. यह समय है जब हम विकास की परिभाषा पर पुनर्विचार करें. सरकार के आज होते काम भी आपदा से मजबूरी में ली गई सीख ही मानी जा सकती है। । *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

Share10SendTweet7
Previous Post

आपदाग्रस्त थराली का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दौरा कर नुकसान का जायजा लिया

Next Post

थराली से चेपड़ो तक थराली -देवाल-वांण मोटर सड़क यातायात के लिए खुला

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: लच्छीवाला टोल प्लाजा पर किसानों ने दिया धरना

September 12, 2026
103
उत्तराखंड

बधाण की नंदादेवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली आठवें पड़ाव पहुंची

September 12, 2026
7
उत्तराखंड

डोईवाला: ऑपरेशन प्रहार में दो शराब तस्कर गिरफ्तार

September 12, 2026
31
उत्तराखंड

पिथौरागढ़ में बाढ़ में बहा 170 फीट लंबा बैली ब्रिज, चीन सीमा से संपर्क दुनिया कटा

September 12, 2026
14
उत्तराखंड

कुलदीप सिंह अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष निर्वाचित

September 12, 2026
28
उत्तराखंड

एनएसएस के सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवी सौरभ और भूमिका को मिलेगा साईं सृजन पुरस्कार’

September 12, 2026
16

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67734 shares
    Share 27094 Tweet 16934
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38077 shares
    Share 15231 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37457 shares
    Share 14983 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: लच्छीवाला टोल प्लाजा पर किसानों ने दिया धरना

September 12, 2026

बधाण की नंदादेवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली आठवें पड़ाव पहुंची

September 12, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.