कमल बिष्ट/उत्तराखण्ड समाचार।
पौड़ी गढ़वाल। जिला कारागार पौड़ी गढ़वाल में आयोजित 21 दिवसीय पिरूल हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। जन कल्याण सेवा समिति, कोटद्वार के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम में बंदियों ने ही उत्साह, अनुशासन व समर्पण के साथ पिरूल (चीड़ की पत्तियों) से मास्टर ट्रेनर से आकर्षक व उपयोगी हस्तशिल्प तैयार करना सीखा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वरोजगारपरक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा उनके पुनर्वास की दिशा में सार्थक प्रयास करना था।
मास्टर प्रशिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में बंदियों ने पिरूल से टोकरियां, ट्रे, फ्लावर पॉट, कोस्टर जैसी विभिन्न सजावटी वस्तुएं, उपयोगी घरेलू सामग्री एवं अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए। उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि उचित अवसर, मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो प्रत्येक व्यक्ति अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है।
इस प्रशिक्षण ने बंदियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच एवं कार्यकुशलता को नई दिशा प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों में सीखने की गहरी रुचि, टीम भावना, अनुशासन तथा गुणवत्तापूर्ण कार्य करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर उत्कृष्ट हस्तशिल्प सामग्री तैयार की, जिसकी सभी उपस्थित अतिथियों एवं अधिकारियों ने सराहना की।
पिरूल को सामान्यतः जंगलों में अनुपयोगी समझा जाता है और जो वनाग्नि का एक प्रमुख कारण भी बनता है, जिसे उपयोगी एवं आकर्षक हस्तशिल्प उत्पादों में परिवर्तित कर बंदियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया। हस्तशिल्प प्रशिक्षण आत्मनिर्भर भारत एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी सशक्त करता है।
यह कार्यक्रम केवल एक कौशल विकास प्रशिक्षण नहीं, बल्कि बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने, उन्हें सम्मानजनक आजीविका के लिए तैयार करने तथा समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे प्रशिक्षण भविष्य में बंदियों को स्वरोजगार एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे तथा उनकी पुनर्वास प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाएँगे।
जेल अधीक्षक श्री कौशल कुमार ने कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, शिक्षा, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता का केंद्र भी है। बंदियों को ऐसे प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के लिए तैयार करना तथा समाज की मुख्यधारा से से जोड़ने तथा पुनर्स्थापित करने में कारागार प्रशासन महत्वपूर्ण निभाते हैं।
जिला कारागार पौड़ी गढ़वाल सुधारात्मक एवं पुनर्वासात्मक कारागार व्यवस्था की अवधारणा को साकार करने के लिए निरंतर कौशल विकास, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं मानव – केंद्रित सुधारात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, ताकि प्रत्येक बंदी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर एक जिम्मेदार एवं आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में समाज में पुनः स्थापित हो सके।
आयोजित हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर सरोज बिष्ट और प्रियतमा चौधरी को उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने हेतु प्रशस्तिपत्र प्रदान किया गया।











