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आदि कैलाश ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

27/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पौराणिक हिंदू ग्रंथों के अनुसार आदि कैलाश पंच कैलाशों में से एक माना गया है। आदि कैलाश को भगवान शिव का घर कहा जाता है। हिंदू पुराणों के अनुसार, पांच कैलाशों में से एक है आदि कैलाश, जो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से सटी भारत-चीन सीमा पर स्थित है। आदि कैलाश और ओम पर्वत दोनों ही व्यास घाटी का हिस्सा है। आदि कैलाश यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है। इस दौरान रास्ते में गुंजी, कुटी, नाभि जैसे सुंदर गांव पड़ते हैं जहां आप होम स्टे ले सकते हैं और यात्रा के बीच प्रकृति के मनोरम दृश्य देखने को मिलते हैं इसीलिए इसकी यात्रा का महत्व काफी होता है। बता दें कि साल 2023 में प्रधानमंत्री ने भी आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए थे। पीएम मोदी के दर्शन करने के बाद देशभर से लोगों में यात्रा को लेकर काफी उत्साह दिखाई दे रहा है।  पूरी दुनिया में भारत की पहचान एक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल के तौर होती है। यहां के हर राज्य में दर्जनों तीर्थ स्थान हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। उन्हें तीर्थ स्थानों में से एक है, आदि कैलाश यात्रा या ओम पर्वत की यात्रा। हिंदू पुराणों में आदि कैलाश को भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी का निवास स्थान बताया गया है, जिसके चलते हर साल हजारों श्रद्धालु आदि कैलाश की यात्रा करने जाते हैं  आदि कैलास और ऊं पर्वत दर्शन यात्रा के लिए क्षमता से अधिक यात्रियों के पहुंचने से आवास व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। यात्रियों को जगह नहीं मिल पाने के कारण खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। आने वाले दिनों में इस समस्या के ओर गंभीर होने की पूरी संभावना है।एक मई से शुरू हुई आदि कैलास यात्रा में अब 23 हजार से अधिक यात्री पहुंच चुके हैं। मैदानी क्षेत्रों में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते पहाड़ आ रहे यात्रियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।आदि कैलास और ऊं पर्वत दर्शन यात्रा के लिए एक हजार तक इनर लाइन परमिट प्रतिदिन जारी हो रहे हैं। गुंजी निवासी ने बताया कि क्षेत्र में यात्रियों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।हर रोज 300 से 400 वाहन यात्रियों को लेकर क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। वाहन नहीं मिलने से कई यात्रियों को धारचूला में भी इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अभी आवासीय व्यवस्था सीमित है। क्षेत्र में होटल नहीं हैं। केएमवीएन के आवास गृहों के अलावा ग्रामीणों ने होम स्टे की व्यवस्था की है, इनमें पांच सौ से छह सौ यात्रियों के रूकने की ही क्षमता है।आदि कैलाश यात्रा के बीच वाहनों का दबाव बढ़ने से नगर में जाम की समस्या परेशानी का सबब बनती जा रही है। पार्किंग न होने से यात्रियों और पर्यटकों को वाहन खड़ा करने के लिए जगह नहीं मिल रही है जिससे वे परेशान हैं। सड़कों के किनारे वाहन पार्क होने से नगर में आए दिन जाम लग रहा है। यात्रियों को मार्ग में अलग-अलग पड़ावों में रूकने की व्यवस्था की जाये साथ ही क्षेत्र में आवासीय सुविधाओं का विस्तार भी किया जाये। साेमवार को कई यात्रियों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। सुबह होम स्टे में रूके यात्रियों के वापस लौटने के बाद इनके लिए आवास की व्यवस्था हो पाई। कैलाश पर्वत न केवल हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के बीच प्रसिद्ध है, बल्कि शांति और रोमांच की तलाश करने वालों के बीच भी विख्यात है। 19,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित, हीरे के आकार का यह पर्वत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की दूरस्थ हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं में बसा है और दुनिया की सबसे आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण चोटियों में से एक है। इसे पृथ्वी का केंद्र, अक्ष मुंडी माना जाता है और यह स्वर्ग की सीढ़ी तथा अनेक देवी-देवताओं का निवास स्थान है। हिंदू परंपरा के अनुसार, कैलाश पर्वत सर्वोच्च भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास स्थान है। जैन धर्म में, इसे अष्टपद के नाम से जाना जाता है और जैन धर्म की जन्मभूमि के रूप में पूजा जाता है, जहां प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने ज्ञान प्राप्त किया था  कैलाश यात्रा सीजन जोरों पर चल रहा है। देशभर से प्रतिदिन कई यात्री आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शनों के लिए धारचूला तहसील के उच्च हिमालयी इलाकों की ओर रवाना हो रहे हैं। सरकारी वाहन उपलब्ध होने के बावजूद परिवहन निगम आदि कैलाश के लिए बस सेवा शुरू नहीं कर पा रहा है। मानो समूचा भारत यहां की फिजाओं में रच बस गया हो। अब तो पर्यटन तथा तीर्थाटन को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है। इस पर ही उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का भविष्य टिक गया है।आदि कैलाश ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पौराणिक हिंदू ग्रंथों के अनुसार आदि कैलाश पंच कैलाशों में से एक माना गया है। आदि कैलाश को भगवान शिव का घर कहा जाता है। हिंदू पुराणों के अनुसार, पांच कैलाशों में से एक है आदि कैलाश, जो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से सटी भारत-चीन सीमा पर स्थित है। आदि कैलाश और ओम पर्वत दोनों ही व्यास घाटी का हिस्सा है। आदि कैलाश यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है। इस दौरान रास्ते में गुंजी, कुटी, नाभि जैसे सुंदर गांव पड़ते हैं जहां आप होम स्टे ले सकते हैं और यात्रा के बीच प्रकृति के मनोरम दृश्य देखने को मिलते हैं इसीलिए इसकी यात्रा का महत्व काफी होता है। बता दें कि साल 2023 में प्रधानमंत्री ने भी आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए थे। पीएम मोदी के दर्शन करने के बाद देशभर से लोगों में यात्रा को लेकर काफी उत्साह दिखाई दे रहा है।  पूरी दुनिया में भारत की पहचान एक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल के तौर होती है। यहां के हर राज्य में दर्जनों तीर्थ स्थान हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। उन्हें तीर्थ स्थानों में से एक है, आदि कैलाश यात्रा या ओम पर्वत की यात्रा। हिंदू पुराणों में आदि कैलाश को भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी का निवास स्थान बताया गया है, जिसके चलते हर साल हजारों श्रद्धालु आदि कैलाश की यात्रा करने जाते हैं  आदि कैलास और ऊं पर्वत दर्शन यात्रा के लिए क्षमता से अधिक यात्रियों के पहुंचने से आवास व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। यात्रियों को जगह नहीं मिल पाने के कारण खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। आने वाले दिनों में इस समस्या के ओर गंभीर होने की पूरी संभावना है।एक मई से शुरू हुई आदि कैलास यात्रा में अब 23 हजार से अधिक यात्री पहुंच चुके हैं। मैदानी क्षेत्रों में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते पहाड़ आ रहे यात्रियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।आदि कैलास और ऊं पर्वत दर्शन यात्रा के लिए एक हजार तक इनर लाइन परमिट प्रतिदिन जारी हो रहे हैं। गुंजी निवासी ने बताया कि क्षेत्र में यात्रियों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।हर रोज 300 से 400 वाहन यात्रियों को लेकर क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। वाहन नहीं मिलने से कई यात्रियों को धारचूला में भी इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अभी आवासीय व्यवस्था सीमित है। क्षेत्र में होटल नहीं हैं। केएमवीएन के आवास गृहों के अलावा ग्रामीणों ने होम स्टे की व्यवस्था की है, इनमें पांच सौ से छह सौ यात्रियों के रूकने की ही क्षमता है।आदि कैलाश यात्रा के बीच वाहनों का दबाव बढ़ने से नगर में जाम की समस्या परेशानी का सबब बनती जा रही है। पार्किंग न होने से यात्रियों और पर्यटकों को वाहन खड़ा करने के लिए जगह नहीं मिल रही है जिससे वे परेशान हैं। सड़कों के किनारे वाहन पार्क होने से नगर में आए दिन जाम लग रहा है। यात्रियों को मार्ग में अलग-अलग पड़ावों में रूकने की व्यवस्था की जाये साथ ही क्षेत्र में आवासीय सुविधाओं का विस्तार भी किया जाये। साेमवार को कई यात्रियों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी। सुबह होम स्टे में रूके यात्रियों के वापस लौटने के बाद इनके लिए आवास की व्यवस्था हो पाई। कैलाश पर्वत न केवल हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के बीच प्रसिद्ध है, बल्कि शांति और रोमांच की तलाश करने वालों के बीच भी विख्यात है। 19,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित, हीरे के आकार का यह पर्वत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की दूरस्थ हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं में बसा है और दुनिया की सबसे आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण चोटियों में से एक है। इसे पृथ्वी का केंद्र, अक्ष मुंडी माना जाता है और यह स्वर्ग की सीढ़ी तथा अनेक देवी-देवताओं का निवास स्थान है। हिंदू परंपरा के अनुसार, कैलाश पर्वत सर्वोच्च भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास स्थान है। जैन धर्म में, इसे अष्टपद के नाम से जाना जाता है और जैन धर्म की जन्मभूमि के रूप में पूजा जाता है, जहां प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने ज्ञान प्राप्त किया था  कैलाश यात्रा सीजन जोरों पर चल रहा है। देशभर से प्रतिदिन कई यात्री आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शनों के लिए धारचूला तहसील के उच्च हिमालयी इलाकों की ओर रवाना हो रहे हैं। सरकारी वाहन उपलब्ध होने के बावजूद परिवहन निगम आदि कैलाश के लिए बस सेवा शुरू नहीं कर पा रहा है। मानो समूचा भारत यहां की फिजाओं में रच बस गया हो। अब तो पर्यटन तथा तीर्थाटन को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है। इस पर ही उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का भविष्य टिक गया है।

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