पिथौरागढ़ के कविंद्र एशियाई मुक्केबाजी के फाइनल में पहुंचे, 27 को होगा यह फाइनल मुकाबला

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उत्तराखंड के बॉक्सर कवीन्द्र के मुक्के धमाल मचा रहे हैं। थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में चल रही एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत के मुक्केबाज कवीन्द्र सिंह बिष्ट 56 किग्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन अन्य भारतियों के साथ फाइनल में प्रवेश किया। कवीन्द्र यदि फ़ाइनल में भी जीत जाते हैं तो उनका वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत की ओर से टिकट पक्का हो जाएगा। कवीन्द्र बिष्ट इस समय जबरदस्त फार्म में हैं। उन्होंने क्वॉर्टर फाइनल में मौजूदा विश्व चैंपियन कजाकिस्तान के काईरात येरालिएव को पराजित किया। इसके बाद उन्होंने मंगोलिया के एंख.अमर खाखु को अपने पंच से पस्त किया, जिनकी आंख में दूसरे दौर में चोट लग गई। लेकिन मंगोलियाई मुक्केबाज ने भी कविंदर बिष्ट की आंख चोटिल कर दी फिर भी यह उत्तराखंडी मुक्केबाज जीत हासिल करने में सफल रहा।

कवीन्द्र के अलावा दीपक सिंह 49 किग्रा और आशीष कुमार 75 किग्रा पुरुष फाइनल में बिष्ट के साथ फाइनल में पहुंचे हैं, जबकि महिला वर्ग में पूजा रानी 75 किग्रा ने ड्रॉ में से जगह बनाई। अनुभवी एल सरिता देवी 60 किग्रा और पिछले चरण की रजत पदकधारी मनीषा 54 किग्रा को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
कवीन्द्र पिथौरागढ़ के पंडा गांव के रहने वाले हैं। गांव के छोटे से मैदान में वो फुटबॉल खेला करते थे। लेकिन इस बीच उन्हें धरम चंद के रूप में एक बेहतरीन बॉक्सिंग कोच मिला। धरम चंद ने कविंद्र को बॉक्सिंग खेलने के लिए लगातार प्रेरित किया। गुरु की प्रेरणा मिली तो कविंद्र ने फुटबॉल छोड़ा और बॉक्सिंग के ग्लब्स को अपने हाथों में पहन लिया। यहां से शुरू होता है कविंद्र के शानदार करियर का सफर। कवीन्द्र ने साल 2009 में साई सेंटर काशीपुर में एडमिशन लिया। कोच एचएस संधू ने 2013 तक उन्हें बॉक्सिंग के पेचीदगियां सिखाई।
इसी दौरान कविंद्र ने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया। इसके साथ ही इस चैंपियनशिप में उन्हें बेस्ट बॉक्सर का खिताब भी मिला। इसके बाद कविंद्र स्टेट चैंपियन भी रहे। कवीन्द्र के पिता आइटीबीपी में सब.इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। फिलहाल कवीन्द्र भारतीय सेना में हैं।

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