डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
देवभूमि उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में इन दिनों आस्था का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जहां लगातार हो रही बारिश, खराब मौसम और कठिन पैदल यात्रा भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर पा रही है. बाबा केदार के दर्शनों के लिए देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालु हर चुनौती को पार करते हुए धाम पहुंच रहे हैं. हालांकि यात्रा व्यवस्थाओं की व्यापक सराहना के बीच कुछ गंभीर शिकायतों ने प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं.भारी बारिश के बीच यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं से की. इस दौरान यात्रियों ने जहां स्वास्थ्य सेवाओं, सफाई व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों की खुलकर प्रशंसा की, वहीं कुछ घोड़ा-खच्चर संचालकों के दुर्व्यवहार और दर्शन के नाम पर कथित मनमानी वसूली को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की. यात्रा मार्ग पर मिले श्रद्धालुओं ने बताया कि, प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया गया है. जगह-जगह मेडिकल टीमें तैनात हैं, आपातकालीन सेवाएं सक्रिय हैं और सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक है. इसके बावजूद कुछ घोड़ा-खच्चर संचालकों का रवैया यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है.श्रद्धालुओं का कहना है कि अधिकांश संचालक पूरी जिम्मेदारी और शालीनता के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन कुछ लोग यात्रियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और यात्रा को केवल कमाई का माध्यम मानकर व्यवहार कर रहे हैं. यात्रियों ने पैदल मार्ग और घोड़ा-खच्चर मार्ग को अलग-अलग किए जाने की मांग भी उठाई, ताकि दुर्घटनाओं और अव्यवस्था की आशंका कम हो सके. यात्रियों ने आरोप लगाया कि, कुछ पंडित और तीर्थ पुरोहित विशेष दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से दो से तीन हजार रुपए तक की मांग कर रहे हैं. जबकि बदरी-केदार मंदिर समिति द्वारा निर्धारित वीआईपी दर्शन शुल्क मात्र 1100 रुपए है.श्रद्धालुओं का कहना है कि आस्था के नाम पर इस प्रकार की कथित मनमानी वसूली धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है और इस पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता है. उन्होंने प्रशासन और मंदिर समिति से पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखने की मांग की है. झारखंड से आईं ज्योति केसरी, विराट और देवधर, ओडिशा से पहुंचे सुशांत, रिचा शर्मा और अभिषेक शर्मा, राजस्थान के संजय कुमार तथा गुजरात के अंकित सहित कई श्रद्धालुओं ने कहा कि यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य, सुरक्षा और सफाई की व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं. लेकिन कुछ सेवा प्रदाताओं के व्यवहार और दर्शन के नाम पर अतिरिक्त धनराशि की मांग से यात्रियों की धार्मिक भावना आहत हो रही है. जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि, मौसम विभाग की चेतावनियों और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए यात्रा संचालन किया जा रहा है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.उन्होंने जानकारी दी कि यात्रा मार्ग पर वर्तमान में 8,512 पंजीकृत घोड़ा-खच्चर और 7,865 पंजीकृत डंडी-कंडी और पालकी संचालक सेवाएं दे रहे हैं. डंडी-कंडी और पालकी सेवाओं से अब तक 1 करोड़ 70 लाख 34 हजार 300 रुपये की आय दर्ज की गई है, जबकि घोड़ा-खच्चर संचालन से भी करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है.जिलाधिकारी के अनुसार, यात्रा के दौरान अब तक एक लाख से अधिक श्रद्धालु स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले चुके हैं. उन्होंने कहा कि घोड़ा-खच्चर संचालकों को यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के निर्देश दिए गए हैं और दर्शन के नाम पर कथित मनमानी वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है. प्राकृतिक चुनौतियां भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को रोक नहीं पा रही हैं.हालांकि यात्रा व्यवस्थाओं में लगातार सुधार के बावजूद घोड़ा-खच्चर संचालन, यात्रियों के साथ व्यवहार और दर्शन के नाम पर कथित वसूली जैसे मुद्दे अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि इन समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए तो केदारनाथ यात्रा और अधिक सुगम, सुरक्षित और श्रद्धा के अनुरूप सम्मानजनक बन सकती है. उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल क्षेत्र में हुई घटना के बाद रुद्रप्रयाग प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है. जिलाधिकारी ने बताया कि वन प्रभाग केदारनाथ एवं वन प्रभाग रुद्रप्रयाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी ट्रेकिंग रूटों पर जाने वाले ट्रेकर्स का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए. उन्होंने कहा जिले में अनेक ट्रेकिंग रूट हैं जहां लगातार पर्यटकों और ट्रेकर्स की आवाजाही रहती है. ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. प्रशासन केवल यात्रा संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले में चल रहे विकास कार्यों की भी नियमित समीक्षा की जा रही है. सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. जिससे यात्रा के साथ-साथ स्थानीय जनता को भी विकास का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके.केदारनाथ यात्रा के दौरान कई विवाद भी सामने आये. जिन पर बात करते हुए रुद्रप्रयाग डीएम ने कहा प्रशासन केदारनाथ धाम, पैदलमार्ग या पड़ावों पर होने वाली दिक्कतों से निपटने में लगा है. उन्होंने कहा उनकी कोशिश है कि केदारनाथ यात्रा को सफल और सुव्यवस्थित बनाया जाये. इसी कड़ी में सारे फैसले लिये जा रहे हैं. श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम एवं व्यवस्थित यात्रा, स्वच्छ केदारपुरी और प्रभावी आपदा प्रबंधन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं. जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता, जवाबदेही और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है. केदारनाथ यात्रा में लगातार बन रहे नए रिकॉर्ड और प्रशासन की सक्रिय तैयारियां यह संकेत दे रही हैं कि इस बार की यात्रा न केवल श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से ऐतिहासिक होगी, बल्कि सुरक्षा, स्वच्छता और प्रबंधन के नए मानक भी स्थापित करेगी.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











