हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली/नंदधाम कुरूड़।
ना तों श्री नंदादेवी देवी राजजात यात्रा 2026 का आयोजन हुआ और ना ही नंदा लोक जात यात्रा का ही आयोजन हुआ, आखिरकार श्री नंदाधाम कुरूड़ से नंदा देवी की यात्रा बड़ी जात के रूप में कुरूड़ से विदा हुई।जिस तादाद में नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ में नंदा देवी के भक्तों को रैला उमड़ा वह अपने आप में ऐतिहासिक रहा, बताया जा रहा है कि 2000 एवं 2014 की श्री नंदादेवी राजजात यात्रा के दौरान भी इतने नंदा भक्त कुरूड़ नही पहुंचे थे जितने कि नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा में भक्त कुरूड़ पहुंचे।
विश्व की सबसे लंबी एवं कठिन धार्मिक यात्राओं में सुमार श्री नंदादेवी के नाम से आयोजित होने वाली जात को भी लेकर तमाम तरह के भ्रम फैलें हुए थे।जिन पर शनिवार को विराम लग गया हैं। अराध्य देवी नंदा-भगवती की कैलाश यात्रा को लेकर तमाम तरह के विवाद उत्पन्न हुएं और जमकर राजनीति भी की गई जोकि अब भी जारी है। श्री नंदादेवी राजजात समिति नौटी के द्वारा राजजात कार्यक्रम इस वर्ष बसंत पंचमी जिस दिन राजजात का कार्यक्रम जारी होना था उससे पहले ही एक प्रेसवार्ता कर 2026 में आयोजित होने वाले यात्रा को 2027 में आयोजन करने की घोषणा कर दी।कई महिनों तक इस मामले में जमकर राजनीति होती रही।इसी दौरान नंदाक एवं बधाण के एक बड़े तबके ने 2026 नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात आयोजित करने की घोषणा करते हुए बकायदा यात्रा कार्यक्रम जारी कर दिया था। इसके उत्तर में बधाण के एक तबके ने 2026 में नंदा लोकजात यात्रा आयोजित करने की घोषणा करते हुए बकायदा नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा से यात्रा कार्यक्रम जारी कर दिया गया था। नंदा देवी के 2-2 यात्रा कार्यक्रम जारी होने से नंदा भक्तों में यात्रा को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी, सभी की नजरें 5 सितंबर पर टिक गई थी कि आखिरकार नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से किस रूप में यात्रा आयोजित होती हैं। शनिवार को जिस तरह से कुरूड़ में नंदा भक्तों का जमावड़ा लगा उससे बड़ी जात आयोजन समिति के हौसले बुलंद हों उठें और सिद्धपीठ से नंदा की यात्रा बड़ी जात के रूप में अपने आगे के पड़ावों के लिए रवाना हुई।बधाण की नंदादेवी की यात्रा के साथ बकायदा 2 चौसिंगा खंडू भी साथ चल रहे हैं, जिन्हें देखकर माना जा रहा है कि अब यात्रा निश्चित ही होम कुंड तक जाएगी जहां पर नंदा की पूजा-अर्चना के बाद दोनों खाडूओं को भेट पवाड़ा के साथ कैलाश रवाना किया जाएगा। नंदा धाम कुरूड़ से प्रारंभ हुई नंदा देवी राजराजेश्वरी की बड़ी जात कई मायनों में ऐतिहासिक रही।जिस तरह से यहां पर जन सैलाव उमड़ा उससे माना जाने लगा है अधिसंख्यक नंदा भक्त इस साल बड़ी जात के पक्षधर हैं, इसके अलावा सरकार के द्वारा कुरूड़ में नंदा भक्तों के लिए कोई भी मूलभूत सुविधाएं मुहैय्या नही करवाईं थी, जबकि देश के अलग-अलग राज्यों से नंदा भक्त 4 सितंबर को ही कुरूड़ पहुंचने शुरू हो गये थें, ऐसे में कुरूड़, नंदानगर आदि क्षेत्र के नागरिकों ने नंदा भक्तों को ठहरने से लेकर खाने पीने की जिस तरह से व्यवस्थाएं की उससे यात्रा में सम्मिलित होने आयें देवी भक्त क्षेत्र के लोगों की प्रशंसा करते नही थक रहे हैं।आज बधाण के अलावा कुरूड़ मंदिर से दशोली एवं बण्ड़ की नंदा देवियों की डोलियां भी बड़ी जात में सम्मिलित होने के लिए अपने -अपने पड़ावों के लिए निकली हैं। यें दोनों डोलियां 15 सितंबर को लाटू धाम वांण में बधाण की नंदा डोली से मिलेगी और यही से तीनों डोलियां बड़ी जात के लिए आगे की यात्रा करेंगी।
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श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारी बारिश के बावजूद जिस संख्या में नंदा भक्तों का सैलाव कुरूड़ में उमड़ा उसकी समिति को भी आशा नही थी 4 सितंबर से ही देवी भक्तों का कुरूड़ एवं नंदानगर के अन्य क्षेत्रों में आना शुरू हो गया था। निश्चित ही जों भी नंदा भक्त पहुंचे हैं वें बड़ी जात यात्रा के नाम पर पहुंचे हैं। कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में नंदा भक्त कुरूड़ पहुंचे ऐसे में आने वाले दिनों में और भी अधिक यात्रियों के यात्रा में शामिल होने की प्रबल संभावना बनी हुई हैं। उन्होंने यात्रा के प्रति प्रशासन की बेरूखी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वें इस संबंध में जिलाधिकारी से वार्ता कर आगे के पड़ावों में यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग करेंगे।











