डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
नेपाल की चमेलिया नदी में पानी जमा होने से भारतीय क्षेत्रों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। भट्टाड़ के पास पहाड़ी से भूस्खलन होने से चमेलिया का प्रवाह रुक गया है और यहां कृत्रिम झील बन गई है। यदि झील टूटी तो इसका पानी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बहने वाली काली में मिलकर भारतीय क्षेत्रों में भी तबाही मचा सकता है।यही चमेलिया नदी भारतीय क्षेत्र गेठीगाड़ा के सिमपानी और नेपाल के सेरा में काली नदी में मिलती है। यही काली नदी झूलाघाट, पंचेश्वर होते हुए टनकपुर पहुंचती है। अपि हिमाल गांव पालिका के वार्ड अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा ने बताया कि नेपाल के दार्चुला के अपि हिमाल गांव पालिका, वार्ड नंबर एक, भट्टाड़ नामक स्थान पर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर चमेलिया नदी में गिर गया है। इससे चमेलिया नदी का प्रवाह थमने से यहां कृत्रिम झील बनने लगी है। ऐसे में साफ है कि यदि चमेलिया में झील का दायरा बढ़ा और यह टूटी तो इसका पानी रसुवा की तरह काली नदी से सटे नेपाल के साथ ही भारतीय क्षेत्रों में बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। वहीं दार्चुला के सीडीओ ने बताया कि भट्टाड़ में भूस्खलन होने से चमेलिया नदी का बहाव आंशिक रूप से रुक गया है। हालांकि नदी के आधे हिस्से से पानी बह रहा है। फिलहाल इससे कोई खतरा नहीं है। वहीं चर्चा है कि जिला प्रशासन दार्चुला ने चमेलिया नदी के किनारे रह रहे अपने नागरिकों के साथ ही चमेलिया, अपर चमेलिया, मध्य चमेलिया बांध के सभी कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की है। चमेलिया नदी के खतरे को देखते हुए इसके किनारे बसे 15 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है। घटना की सूचना भी दार्चुला प्रशासन को दी गई है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है इससे पहाड़ी के और टूटने का खतरा बना हुआ है। यदि ऐसा हुआ तो यह बड़ी समस्या बन सकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए प्रहरी, एपीएफ एवं सेना को पहुंचने में एक दिन का समय लगता है। नेपाल में चमेलिया नदी जो अपिहिमाल के रास्ते आकर भारत में गेठीगाड़ा के सिमपानी में मिलती है। अपिहिमाल इस स्थान से 40 किलोमीटर ऊपर है। इसी नदी में नेपाल ने चीन की मदद से बलांच नामक स्थान पर 30 मेगावाट का चमेलिया पॉवर प्रोजेक्ट और अपर चमेलिया पॉवर प्रोजेक्ट बनाया है। इसके लिए यहां बांध का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है। वहीं इसी नदी पर 24 मेगावाट पॉवर प्रोजेक्ट का बांध निर्माणाधीन है।कोट-हमें नेपाल के दार्चुला के अपिहिमाल, भट्टाड़ में भूस्खलन की सूचना मिली है। सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस, एसएसबी सहित अन्य संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है। नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी कर दी है। हम घटना पर नजर बनाए हैं। इस भूस्खलन का सबसे बड़ा खतरा चमेलिया नदी पर बने जलविद्युत प्रोजेक्ट्स को लेकर है। घटना स्थल से करीब 40 किमी नीचे भारत के गेठीगाड़ा, सिमपानी और नेपाल के सेरा के पास चमेलिया नदी काली नदी में मिलती है। यदि भूस्खलन से बनी झील टूटती है, तो इन तीनों बांधों का भारी पानी एक साथ काली नदी में आ जाएगा, जिससे झूलाघाट, पंचेश्वर से लेकर टनकपुर तक भारी तबाही मच सकती है। आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स ने कहा कि चौलानी नदी अभी सामान्य स्तर पर बह रही है। हालांकि, स्थिति पर नज़र रखने और ज़रूरत पड़ने पर आस-पास के समुदायों को चेतावनी देने के लिए बालंच स्थित नेपाल चमेलिया जलविद्युत सुरक्षा बेस के कर्मियों को तैनात किया गया है। चौलानी नदी, जिसे चमेलिया के नाम से भी जाना जाता है, एपी हिमाल क्षेत्र से निकलती है और अंत में महाकाली नदी में मिल जाती है, जो नेपाल-भारत सीमा का हिस्सा है।यह ताज़ा चेतावनी ऐसे समय में आई है जब नेपाल कई इलाकों में भीषण बाढ़ और अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के असर से जूझ रहा है। हाल की बाढ़ से लोगों के विस्थापित होने, मौतों और बड़े पैमाने पर नुकसान के बाद बचाव और राहत कार्य अभी भी जारी हैं।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं











