• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

औषधीय गुणों से भरपूर है बाकला

18/03/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
14
SHARES
17
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

हरीश चन्द्र अन्डोला
भारत में खेती में इसका क्षेत्र परिभाषित नहीं किया गया है क्योंकि यह असंगठित है। यह पूर्वी भारत, उत्तराखंड और देश के आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित है और गरीबों को पोषण सुरक्षा प्रदान कर सकती है। खेती के इतिहास का सभ्यता के विकास के साथ अटूट सम्बन्ध है. इसी के आधार पर मनुष्य अपने समाज की संरचना कर पाया. परन्तु दुर्भाग्यवश इतिहासकारों का ध्यान भारतीय खेती के इतिहास, विशेषकर हिमालयी खेती की ओर अधिक नहीं गया है. खेती का इतिहास लिखना जटिल कार्य है और हमें अपनी सीमाओं का पूरा भान है. फिर भी इस आशा के साथ यह प्रयास किया जा रहा है कि शोधार्थी भविष्य में समें सुधार कर सकेंगे.खेती के इतिहास का प्रारम्भ पश्चिम एशिया में दजला-फराद की घाटियों में पाषाण युग में माना जा सकता है. तदुपरान्त सिन्धु सभ्यता में भी खेती के पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं. भारतीय खेती पर बौद्ध धर्म ग्रन्थों के अतिरिक्त मैगस्थनीज (300 ई.पू.), फाह्यान (300-345 ई.पू.), ह्वेनसांग (629-641 ई.) तथा अलबरूनी (1031 ई.) के यात्रा वृतान्तों से जानकारी मिलती है. कृषि पराशर (950-1000 ई.) तथा कृषि सूक्ति (1000 ई.) में भी एक क्रमिक वर्णन प्राप्त होता है. कौटिल्य के अर्थशास्त्र (300 ई.पू.) में भी भारतीय खेती की व्यवस्था का वर्णन है.उत्तराखण्ड का उन्नत शिखरों तथा गहन घाटियों से परिपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र तराई से जुड़ा है. राजनैतिक उथल-पुथल के कारण उत्तराखण्ड का अनेक बार पुनर्गठन किया गया. 1815 में जिला कुमाऊं, टिहरी रियासत तथा देहरादून बने. सरकार द्वारा कुमाऊं को भी दो जिलों में बाँट दिया गया. कुमाऊं तथा ब्रिटिश गढ़वाल. कालान्तर में इसमें एक जिला तराई नाम से बना दिया गया. पुनः कुमाऊं व तराई के स्थान पर अलमोड़ा तथा नैनीताल जिले बनाये गये. स्वाधीनता के बाद अलमोड़ा जिले से सोर क्षेत्र को पृथक करके पिथौरागढ़, अपर गढ़वाल को चमोली तथा टिहरी के ऊपरी हिस्से को उत्तरकाशी जिला बनाया गया. उत्तराखण्ड क्षेत्रफल तथा जनसंख्या में संयुक्त राष्ट्रसंघ के अनेक सदस्य राष्ट्रों से बड़ा है उनके मुताबिक, बाकला की खेती बढ़ाने से दुनिया को मदद मिलेगी क्योंकि इन फलीदार पौधों की जड़ में सहजीवी रूप से रहने वाले लाभकारी माइक्रोब्स होते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए वायुमंडलीय नाइट्रोजन को कम कर सकते हैं।सर्दियां जब खत्म होती हैं तो सब्जीवालों के ठेले पर एक अलग सी फलीदार सब्जी दिखने लगती है। कुछ दिनों के लिए ही वे बाकला की फली या फाबा बीन्स (विसिआ फाबा) लाते हैं। अगर आप उनके नियमित ग्राहक हैं तो निश्चित तौर पर वे आपसे इस मौसमी सब्जी को लेने का आग्रह करेंगे और कहेंगे, “बाजार में यह बहुत कम आती है।” हालांकि बाकला की फली बाजार में बहुत कम दिखती है लेकिन इसके इस्तेमाल की परंपरा काफी पुरानी है। यह उन पुराने आहारों में से एक है, जिसे 10,200 साल पहले घरेलू तौर पर उपयोग में लाया जाने लगा था।हाल ही में फाबा बीन्स के पूर्वजों का पहला और एकमात्र अवशेष इजराइल के माउंट कार्मेल में एल-वाड के पुरातत्व स्थल में पाया गया था। ये 14,000 साल पुराने जंगली नमूने भी इनके उत्तरी इजरायल के इलाकों में घरेलूकरण का समर्थन करते हैं। इसका हिंदी नाम बाकला, इसके इथियोपियाई नाम बकेला और तुर्की के नाम येशिल बाकला के जैसा ही है। इसकी फलियां भूमध्यसागरीय इलाकों के साथ-साथ भारत, पाकिस्तान और चीन में एक प्रमुख पारंपरिक भोजन हैं। नाश्ते के लिए भुने और नमकीन बीजों को छोड़कर, उत्तरी यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में इसकी खपत कम है।प्रोटीन से भरपूर होने के साथ ही बाकला की फलियों का एक और फायदा दवा के रूप में भी है। ये एमिनो एसिड, एल-डोपा की अच्छी स्रोत होती हैं, जिसे हैप्पी हार्मोन के रूप में जाना जाने वाला डोपामाइन बनता है। यह हार्मोन हमें खुश रखता है और हमारे सोचने और योजना बनाने की क्षमता में खास भूमिका भी निभाता है। अनुमान के मुताबिक, 100 ग्राम ताजा बाकला फली में 50 से 100 मिलीग्राम एल-डोपा पाया जा सकता है। एल-डोपा की मौजूदगी के चलते यह फली पार्किंसन बीमारी में भी लाभदायक है। इस बीमारी में तंत्रिका तंत्र पर असर होता है जिससे चलना फिरना मुश्किल हो जाता है।इन फायदों के बावजूद इनका सेवन सावधानी से करना चाहिए क्योंकि कच्ची फलियों में पोषण-विरोधी कारक, विसिन और कोनविसिन होते हैं। ये उन लोगों में फेविसम पैदा कर सकते हैं जिनमें ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज नामक एंजाइम नहीं है। विसिन और कोनविसिन लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करते हैं और हेमोलिटिक एनीमिया का कारण बनते हैं जिसके परिणामस्वरूप पीलिया और मूत्र का काला पड़ना, जैसी बीमारी हो सकती है। गौरतलब है कि विश्व की करीब 4 से 5 फीसदी आबादी फेविसम के प्रति संवेदनशील है। शोधकर्ताओं ने इसकी ऐसी किस्में विकसित कर ली हैं, जिनमें ये तत्व नहीं होते। इनको हटाने के पारम्परिक तरीकों का इस्तेमाल ज्यादा आसान है। यह कई प्रकार और वातावरण के अनुरूप विविधता वाली फसल है। कॉमन बीन (फेसियोलस वलगरिस) के कई प्रकार दुनियाभर में मिलते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि लैग्यूम प्रजाति के अन्य पौधों के मुकाबले ये राइजोबियल की कहीं अधिक प्रजातियों को आश्रय देती हैं। इससे से संभभवत: कॉमन बीन्स को अपने मूल स्थान से परे भी दुनिया के विभिन्न वातावरण में फलने-फूलने का मौका मिला। यह विभिन्न वातावरण में भी नाइट्रोजन की जरूरत को पूरी कर लेते हैं जिससे यह लैग्यूम की सबसे लचीली प्रजातियों में से एक है।, लेखक दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।

Share6SendTweet4
Previous Post

मुख्यमंत्री ने दी प्रदेशवासियों को नव संवत्सर तथा चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं

Next Post

भारतीय नव वर्ष का शुभारंभ सनातनी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मनाया जाता है

Related Posts

उत्तराखंड

झंडाचौक टूरिस्ट कॉम्पलेक्स में भीषण आग से दुकानें जलकर राख

September 25, 2026
22
उत्तराखंड

बेराधार में सेवा संकल्प अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्र में आंगन का उत्सव कार्यक्रम का आयोजन

September 25, 2026
1
उत्तराखंड

आपदा और नशा के खिलाफ जागरुकता फैलाने की मुहिम सराहनीय : सीएमओ

September 25, 2026
3
उत्तराखंड

छात्रसंघ चुनाव: डोईवाला महाविद्यालय में छह पदों के लिए 19 उम्मीदवारों ने कराया नामांकन

September 24, 2026
8
उत्तराखंड

चारधाम के पर्यावरण पर गंभीर दबाव बढ़ गया

September 24, 2026
5
उत्तरकाशी

बाहर होंगे चीन सीमा से सटे नेलांग व जादूंग गांव

September 24, 2026
7

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67747 shares
    Share 27099 Tweet 16937
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38078 shares
    Share 15231 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37458 shares
    Share 14983 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

झंडाचौक टूरिस्ट कॉम्पलेक्स में भीषण आग से दुकानें जलकर राख

September 25, 2026

बेराधार में सेवा संकल्प अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्र में आंगन का उत्सव कार्यक्रम का आयोजन

September 25, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.