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*दिल का ख्याल रखने से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने तक सेहत के लिए फायदेमंद है बेर

09/06/26
in उत्तराखंड, देहरादून, हेल्थ
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
चीनी सेब के नाम से प्रसिद्ध औषधीय गुणों से भरपूर सबसे प्राचीन फलों में से एक बेर भारत के गर्म तापमान वाले  स्थानों में पाया जाता है। दिखने में छोटा से इस फल में विटामिन सी और विटामिन बी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही इसमे  कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह और ग्लूकोज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।  बेर का पेड़ झाड़ीनुमा व कंटीला होता है।  इसका फल पौष्टिक होने के साथ ही औषधीय गुणों से भरपूर होता है। त्वचा  कटने या घाव होने पर बेरी के फल का गूदा घिसकर लगाने से  जल्दी ठीक हो जाता है । इस फल को फेफड़े संबंधी बीमारियों व बुखार  के लिए भी अचूक माना जाता है। इसका जूस बनाकर पीने से बुखार जल्द ठीक हो जाता है, साथ ही फेफड़े से सम्बंधित बीमारी से भी राहत मिलती है।  बेर को नमक और कालीमिर्च के साथ खाने से अपच और कब्ज की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। बेर में सेपोनीन और पॉलिसैक्राइड्स जैसे फ्लेवोनॉयड प्रचुर मात्रा में होते हैं, सपोनिन को अच्छी और गहरी नींद लाने में सहायक माना जाता है। ये आपके नर्वस सिस्टम को शांत करता है और गहरी नींद आती है। बेर में आयरन और फास्फोरस की बहुत अधिक मात्रा पाई जाती है, और  जिन लोगों को एनीमिया की समस्या होती है उनके लिए  बेर काफी फायदा पहुंचाता है। ये  आयरन की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है। बेर आपके चेहरे के लिए भी काफी फयादेमंद होता है, क्यों कि इसमें विटामिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। इसके सेवन से इसमें मौजूद तत्व चेहरे से फाइन लाइंस, पिगमेंटेशन दूर करने के अलावा त्वचा को चमकदार बनाने में कारगर होता है, अगर आपकों  घबराहट, उल्टी, पेट में दर्द की समस्या है तो बेर को छाछ के खाने से यह समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाती है। बेर की पत्तियां तेल के साथ लपेटकर लगाने से लीवर संबंधी समस्या, अस्थमा व मसूड़ों के घाव को भरने में भी मदद मिलती हैं। बेर में अमीनो एसिड, बायोएक्टिव पदार्थ और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो मानव कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में आवश्यक माने गए हैं। बेर हड्डी और दांतों को मजबूत बनाने में भी सहायक है। अगर आप गठिया एवं वात जैसी बीमारियों से पीड़ित है तो बेर की जड़ों का जूस  बनाकर थोड़ी-सी मात्रा में पीने से इन बीमारी से छुटकारा मिलता है। बेर की पत्तियों में 61 आवश्यक प्रोटीन पाए जाते हैं।साथ ही विटामिन सी, केरिटलॉइड और बी कॉम्प्लेक्स भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके साथ ही अनेक स्थानों पर  बेर को पकाकर, व उबालकर चटनी बनाई जाती है। इससे जैम, टॉफी, अचार आदि भी बनाए जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ अधिकांश ग्रंथों में बेर को तटस्थ प्रकृति का बताया गया है—न तो गर्म और न ही ठंडा, और यहाँ तक कि प्यास बुझाने में सक्षम भी—वहीं कई लोगों को लगता है कि इसका प्रभाव गर्म होता है। इसका कारण यह है कि अधिक बेर खाने से शरीर में नमी का जमाव हो सकता है, जिससे गर्मी जमा हो जाती है और ऊपर उठकर मुँह के छालों और फोड़ों जैसे लक्षण पैदा करती है। इसलिए, प्राचीन चिकित्सकों ने बेर को ऐसी वस्तु के रूप में वर्गीकृत किया है जिसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें कई प्रकार के ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं. बेर के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी देते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सक बताती हैं कि खट्टी मीठी बेर स्वादिष्ट होने के साथ ही हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होती है. इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व जैसे मैग्नीशियम, तांबा, मैगनीज, पोटेशियम पाए जाते हैं जो हमारे शरीर की हड्डियों और ऑस्टियोपोरोसिस रोग को सही करने में कारगर साबित होता है. ऑस्टियोपोरोसिस होने पर आपकी शरीर की हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती है. जिसके वजह से सामान्य शारीरिरक क्रिया जैसे खांसना, छिंकना या झुकने तक से हड्डियां टूटने लगती है.  बेर में कई ऐसे गुण होते हैं जो शरीर में ब्लड फ्लो को बढ़ा सकते हैं. बेर में पाया जाने वाला नाइट्रिक ऑक्साइड ब्लड फ्लो और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर सकता है. बेर आप ताजा खाएं या सूखा दोनों से ही आपको ये फायदा मिलेगा. ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहने से कई बीमारियों से बचा जा सकता है. बेर खाने से दिल की बीमारियां भी दूर रहती हैं. बेर में फाइटोकॉन्स्टिट्यूएंट्स पाया जाता है, जो हार्ट को हेल्दी बनाने में मददगार साबित होता है. दिल की बीमारियों से बचने के लिए आप हर दिन बेर का सेवन कर सकते हैं. बेर में फाइबर मौजूद रहता है इसकी वजह से ये कब्ज से जुड़ी समस्याओं से निजात दिलाता है. यह सिर्फ कब्ज ही नहीं बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने में काफी ज्यादा सहायक होता है. अफसोस की बात है कि उनमें से कुछ के लेबल मिट गए हैं या झाड़ियों से ढक गए हैं। मुझे संदेह है कि बेर इस देश में कभी आड़ू या सेब जितनी लोकप्रियता हासिल कर पाएगा, लेकिन ये अर्ध-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के उत्पादकों के लिए एक विकल्प जरूर हैं, जहाँ पारंपरिक फल, विशेष रूप से मुख्य किस्में, अच्छी तरह से अनुकूलित नहीं हो पाती हैं।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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