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भोटिया बादाम बन सकता है उत्तराखंड में रोजगार का जरिया

21/12/19
in उत्तराखंड, हेल्थ
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
भोटिया बादाम के हजारों पौधे जम्मू कश्मीर तथा हिमांचल प्रदेश उत्तराखण्ड के जंगलों में हैं। उत्तराखण्ड की पहाड़ियों में हेजल नट के बीजू पौधे कोरयूनस कोलयूराना जिनको कि कापसी कहते हैं, फलत में तो आते हैं, लेकिन खाने योग्य नहीं होते हैं। अब कुछ नयी प्रजातियों का चयन करके उत्तराखण्ड की पहाड़ियों पर लगाया जा रहा है। इसकी खेती मुख्यतः संयुक्त राष्ट्र के ओरनेगो और वाशिंगटन में की जा रही है। चार उत्पादक क्षेत्र तुर्कीए इटली एवं ओरीगन क्रमशः काले सागर, मेडीटेरियन सागर तथा पेसीफिक सागर द्वारा घिरे होने के कारण प्रभावित होते रहते हैं। टर्की में भोटिया बादाम की स्थानीय स्तर पर पांच प्रजातियां विकसित की गयी हैं, जैसे तम्बूल, यासी बादाम, शीबरी काराफिनडिक तथा हैम प्रजाति मुख्य रूप से औद्योगिक फसल के रूप में उगायी जाती है। विश्व में सर्वाधिक औद्योगिक मांग कोरीलस एवलना की प्रजाति का है जो कि टर्की में विकसित की गयी है। टर्की के एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार आल्फा टोकोफ़ेरोल सभी प्रजातियां में मुख्य अवयव के रूप में पाया जाता है। टर्की अध्ययन के अनुसार प्रति दिन 42.5 ग्राम भोटिया बादाम खाने से शरीर को लगभग 44.4-83.6 प्रतिशत कॉपर तथा 40.0.44.8 प्रतिशत मैग्नीज प्राप्त होता है, जो कि स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है।
भोटिया बादाम की खेती उत्तराखण्ड में अभी तक व्यवासयिक रूप से नहीं की जाती हैए यह केवल प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। प्रतिभा चौहान, ट्रिब्यून समाचार पत्र के अंक 29 नवम्बर, 2015 के अनुसार हिमाचल प्रदेश में भी भोटिया बादाम प्राकृतिक रूप से चम्बा जिलें में पाया जाता है तथा हिमाचल सरकार ने भोटिया बादाम के औद्योगिक उत्पादन के लिए 20,000 पेड़ इटली से आयात कर किसानों को वितरित किए हैं जिसमें तत्कालीन उद्यान एवं सिंचाई मंत्री, विद्या स्टॉक ने मुख्य भूमिका निभाई, ताकि हिमाचल में भोटिया बादाम का औद्योगिक उत्पादन किया जा सके। भोटिया बादाम में फालिक एसिड बादाम व अखरोट से अधिक मात्रा में पाया जाता है जो कि शरीर में कोशिका वृद्धि तथा कोशिका निर्माण में अत्यंत आवश्यक होने के साथ.साथ रक्त हीनता को रोकने में भी मदद करता है।
भोटिया बादाम में हाल हीं में हुए कुछ शोध के अनुसार टैक्सॉल नामक रसायन के स्रोत के रूप में भी देखा जा रहा है। इसमें टैक्सॉल की मात्रा लगभग 4.2 µहध्ह पाया जाता है जिसको विभिन्न कैंसर रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। यह विटामिन. । ;20ण्0 पूद्ध तथा म् ;15 उहध् 100हद्धके साथ.साथ प्रोटीन;14.95 हध्100 हद्धए फासफोरस ;290उहध्100 हद्धए कैल्शियम ;114.0उहध्100 हद्धए मैग्नीशियम ;163.0उहध्100 हद्धए पोटेशियम ;680 उहध्100 हद्ध का महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत है। अमेरिका विश्व बाजार में 25 प्रतिशत योगदान देता है। विश्वबाजार में भोटिया बादाम को लक्जरी भोजन के रूप में जाना जाता है। सम्पूर्ण विश्व लगभग 455000 टन का उत्पादन किया जाता है जिसमें 65 प्रतिशत टर्कीए 20 प्रतिशत इटलीए 3 प्रतिशत अमेरिका में किया जाता है। यूरोप वर्तमान में भोटिया बादाम का सर्वाधिक उपभोग करने वाला देशों में सुमार है। विभिन्न देशों में भोटिया बादाम को विभिन्न औद्योगिक उत्पादों जैसे चाकलेट, अनाजों से उत्पादित उत्पादों ब्रेड, तेल, कॉफ़ी पेय पदार्था जैसे बियर, बोतका, आदि में पोष्टिक एवं स्वादिष्टकारक के रूप में तथा औषधि एवं कॉस्मेटिक निर्माण उधोग में प्रयुक्त किया जाता है।
भोटिया बादाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक महत्वपूर्ण फसल के रूप में स्थान ले चुकी है। विश्व बाजार में यह छिलके सहित एवं छिलके रहित दोनों अवस्थाओं में बेचा जाता है। अकेले अमेरिका में भोटिया बादाम का औद्योगिक उत्पादन किया जाता है जो कि ब्रिटिश कोलंबिया तथा कनाडा को निर्यात किया जाता है। वर्ष 1996 में उत्तरी अमेरिका में भोटिया बादाम का उत्पादन 19900 टन था, जिसका विश्व बाजार में 1 डॉलर से 3 डॉलर प्रति प्इ में बेचा जाता है। भुना हुआ अथवा चॉकलेट के रूप में 12 डॉलर प्रति प्इ तक बेचा जाता है। आस्ट्रेलिया में प्रति वर्ष 2000 टन भोटिया बादाम का आयात किया जाता है, केवल कैडवरी कम्पनी के द्वारा भोटिया बादाम के तेल को विभिन्न खाद्य पदार्थां को तैयार करने के लिए बहुतायत मात्रा में आयात किया जाता है। विश्व बाजार का 25 प्रतिशत भोटिया बादाम का विभिन्न खाद्य पदार्थों में उपभोग करता है। विश्व बाजार में भोटिया बादाम से निर्मित उत्पादन तेल, यूफोरिया एक्स्टसी, बायो इंडस्ट्री नट बटर जैसे लगभग 50,000 से अधिक उत्पाद तैयार औद्योगिक किये जाते है। 1 नवम्बर, 2016 की रिपोर्ट के अनुसार टर्की में भोटिया बादाम 7.72 से 24.25 न्ैक् प्रति ाह तक बेचा गया है। हैदराबाद में भोटिया बादाम 2500 प्रति ाह तक बेचा गया है। क्रिस्टल सुगंधित, नई दिल्ली में भोटिया बादाम का तेल 7000 प्रति ाह तक बेचा गया है।
चूंकि उत्तराखण्ड प्रदेश का अधिकतम भूभाग वन आच्छादित है जहां पर कुछ संरक्षित वन क्षेत्रो तथा न्याय पंचायत की बेनाप भूमि पर भोटिया बादाम की खेती की जा सकती है जो कि प्रदेश की आर्थिकी मे सहायक होगा। प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त का उत्पादन कर देश.दुनिया में स्थान बनाने के साथ राज्य की आर्थिकी तथा पहाड़ी क्षेत्रों में पलायान को रोकने का अच्छा विकल्प बनाया जा सकता है। अगर ढांचागत अवस्थापना के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो यह पलायन रोकने में कारगर होगी उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहती है। हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे उत्तराखंड राज्य के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे कि राज्य में ड्राईफ्रूट्स के रूप में अखरोट और बादाम का भी अच्छी तादाद में उत्पादन होता है। अब राज्य सरकार ने उद्यान विभाग के जरिए अखरोट और बादाम उत्पादन को बढ़ाने पर भी फोकस करना शुरू कर दिया है। राज्य में मौजूदा समय में अखरोट और बादाम की सामान्य प्रजाति के साथ ही भोटिया बादाम, हेजलनट और पिकरनट का उत्पादन भी होता है। करीब 1.8 मीट्रिक टन प्रति हैक्टेयर के हिसाब से उत्पादन का उद्यान विभाग ने आंकलन किया है, लेकिन अब उत्पादन को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। एक हजार से पांच हजार मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में होने वाले अखरोट और बादाम की प्रजातियों को बढ़ावा देने के लिए औद्योनिकी मिशन के तहत राज्य सरकार ने योजना तैयार की है।

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