• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

संकट में चकराता का सुर्ख राजमा!

08/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
28
SHARES
35
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

यह एक छोटे और सुंदर पहाड़ी नगर के रूप में नजर आता है। रोजमर्रा की जिंदगी और महानगरों के शोर से दूर कुछ पल शांति से बिताने वालों के लिए यह खास ठिकाना है। वैसे, यदि आप कुदरती खूबसूरती के साथ-साथ रोमांचक खेलों का लुत्फ भी उठाना चाहते हैं तो इस लिहाज से यह एक आदर्श स्थल है। जौनसार-बावर का यह क्षेत्र यानी चकराता और इसके आसपास कैंपिंग, राफ्टिंग, ट्रेकिंग, रैपलिंग, रॉक क्लाइंबिंग का आनंद उठा सकते हैं। यहां हर तरफ ऐतिहासिक, पुरातात्विक, सामाजिक और सांस्कृतिक वैभव बिखरा हुआ हैउत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसार-बावर जनजातीय क्षेत्र, खासकर चकराता में उगने वाली राजमा अपनी अनूठी गुणवत्ता और बेहतरीन स्वाद के लिए देश–विदेश में मशहूर है. खास रंग के कारण इसे ‘सुर्ख राजमा’ भी कहा जाता है. सदियों से यह राजमा स्थानीय लोगों की पारंपरिक खेती, खान-पान और संस्कृति का अहम हिस्सा रही है. यूपी, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में इस राजमा की भारी मांग है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में राजमा की खेती लगातार सिमटती जा रही है.चकराता के कालसी क्षेत्र के किसान बताते हैं कि जौनसार-बावर के किसानों ने पीढ़ियों से राजमा की खेती हमेशा जैविक और प्राकृतिक तरीकों से की है. यही कारण है कि चकराता का राजमा आकार में छोटा, लाल रंग का और बेहद मुलायम होता है. पकने के बाद यह जल्दी गल जाता है और मुंह में डालते ही घुल जाता है. इसकी यही खासियत इसे उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में लोकप्रिय बनाती है. चकराता के राजमा को इस बार जीआई टैग मिलने की संभावना है, लेकिन विडंबना यह है कि किसान इसकी खेती से दूर होते जा रहे हैं, जिससे उत्पादन लगातार घट रहा है. इसकी विशेष पहचान पहाड़ी जलवायु, ऑर्गेनिक कृषि और स्थानीय मिट्टी से जुड़ी है, जो इसे मैदानी क्षेत्रों की राजमा से बिल्कुल अलग बनाती है. चकराता की राजमा का स्वाद अन्य राजमाओं से काफी अधिक विशिष्ट होता है. पकने के बाद इसकी सुगंध दूर तक फैलती है. बिना किसी रासायनिक खाद के, पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाई जाने वाली यह राजमा प्रोटीन और औषधीय गुणों से भरपूर होती है. पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों में शरीर को ऊर्जा और गर्माहट देने के लिए इसका खूब सेवन होता है. राजमा की बुवाई जून में की जाती है और यह ठंड के मौसम में तैयार हो जाती है. चकराता की ऊंचाई, ठंडा मौसम और 6.0 से 7.0 pH वाली बलुई-दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए बेहद उपयुक्त है. जौनसार–बावर के बनगांव, ऊपरौली, अठगांव, द्वार, बिशलाड़, बौनंदूर, तपलाड़, भरम और मशक जैसे गाँवों में इसकी अच्छी पैदावार होती है. राजमा की खेती उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में होती है, लेकिन चकराता के राजमा की बात ही अलग है. यूपी, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में इसकी भारी मांग है, लेकिन खेती लगातार सिमटती जा रही है. आज भी रासायनिक खादों से दूर रहकर जैविक खेती करते हैं। पहाड़ी मिट्टी और जलवायु इस फसल को और भी खास बना देती है। यह राजमा न सिर्फ स्वाद में बेहतर है, बल्कि पचाने में आसान और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती है। इस राजमा में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और विटामिन्स भरपूर होते हैं। जो ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि वजन नियंत्रण में भी सहायक है। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए यह एक बेहतरीन प्रोटीन विकल्प है।साल 2014 में जहां 1101 हेक्टेयर भूमि पर इसकी खेती होती थी, वहीं अब यह घटकर करीब 981 हेक्टेयर रह गई है. इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. पहाड़ी इलाकों में खेत छोटे और बिखरे हुए हैं, चकबंदी न होने से खेती और फसल प्रबंधन मुश्किल हो जाता है.सबसे बड़ी समस्या है मंडी तक पहुंच. पहाड़ से मैदानी मंडियों तक राजमा पहुंचाना महंगा और समय लेने वाला काम है.उचित मंडी व्यवस्था और खरीद केंद्रों की कमी किसानों को हतोत्साहित करती है.तापमान में लगातार बदलाव, अनियमित बारिश और रोगों का बढ़ता प्रकोप भी पैदावार को नुकसान पहुमचा रहा है.कई बार अंकुरण के दौरान ही दालें बीमारी से पीली पड़कर सूख जाती हैं, जिससे पूरी फसल प्रभावित होती है जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में दाल की फसलों को महत्त्व दिया जाता हैं। स्थानीय किसान जरूरत के अनुसार दाल रखने के बाद पूरे साल भर का खर्च चलाने के लिए बची हुई फसल बेच देते हैं। जौनसार क्षेत्र की राजमा चकराता के नाम से शहरों में चर्चित है। लेकिन इस बार क्षेत्र में स्थानीय दालों को ग्रहण लग गया है।  सेहत के लिहाज से यह पौष्टिक है और स्वाद में भी लाजवाब. राज्य के किसान इसे गर्व से अपनी पहचान के रूप में देखते हैं. प्रकृति की गोद में उगने वाली यह फसल न सिर्फ लोगों के स्वाद का हिस्सा है बल्कि स्थानीय किसानों की आय का भी मजबूत जरिया बन चुकी है.
*लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

Share11SendTweet7
Previous Post

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण द्वारा सीडीएस बिपिन रावत की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धांजलि अर्पित करी गई

Next Post

मोनाड यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा लेकर उत्तराखंड में भी पा ली नौकरी

Related Posts

उत्तराखंड

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार की राहत आसान करेगा वायरलेस डिवाइस’

August 17, 2026
3
उत्तराखंड

महाराष्ट्र से लेकर उत्तराखंड तक, ‘नकली’ पनीर पर प्रतिबंध

August 17, 2026
1
उत्तराखंड

घी संक्रांति उत्तराखंड का प्रमुख लोकपर्व है.

August 17, 2026
1
उत्तराखंड

जनता की आवाज को मजबूती से उठाती रही है कांग्रेस: उनियाल

August 17, 2026
2
उत्तराखंड

श्रीलंका के सिविल सर्वेंट्स ने किया एसडीआरएफ का अध्ययन भ्रमण’

August 17, 2026
2
उत्तराखंड

डोईवाला: राज्य आंदोलनकारियों को इलाज में रियायत की मांग

August 17, 2026
3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67722 shares
    Share 27089 Tweet 16931
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45790 shares
    Share 18316 Tweet 11448
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38075 shares
    Share 15230 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37455 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37374 shares
    Share 14950 Tweet 9344

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार की राहत आसान करेगा वायरलेस डिवाइस’

August 17, 2026

महाराष्ट्र से लेकर उत्तराखंड तक, ‘नकली’ पनीर पर प्रतिबंध

August 17, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.