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चारधाम यात्रा मौसम बना विलेन

24/05/25
in उत्तराखंड, देहरादून, यात्रा
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

उत्तराखंड हिमालय में बसा एक छोटा सा पहाड़ी राज्य है, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है.
उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. यहां की चारधाम
यात्रा एक ऐसा अनुभव है जो आपको आध्यात्मिक शांति और आत्म-ज्ञान की ओर ले जाता है. चारधाम
यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी भी है. उत्तराखंड चारधाम की यात्रा जोरों शोरों पर चल
रही है. वर्तमान स्थिति यह है कि पिछले कुछ दिनों की तुलना में चारधाम की यात्रा पर आने वाले
श्रद्धालुओं की संख्या में थोड़ा इजाफा देखा जा रहा है. वहीं चारधाम की यात्रा पर होने वाले श्रद्धालुओं के
मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने
के साथ शुरू हुई चारधाम यात्रा में अब तक 41 श्रद्धालुओं की मौत तमाम कारणों से हो चुकी है. अकेले
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद यानी इन 19 दिनों में 19 श्रद्धालुओं की मौत हुई है.हर साल
चारधाम की यात्रा पर आने वाले तमाम श्रद्धालुओं की मौत स्वास्थ्य खराब होने की वजह से होती रही है.
यही वजह है कि उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग हर साल चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले हेल्थ एडवाइजरी
जारी करता है. ताकि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु पहले से ही पूरी तैयारी के साथ यात्रा पर आएं. इसके
अलावा विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं से सरकार यह अपील करती रही है कि ऐसे श्रद्धालु जिनको पहले से
ही कोई बीमारी है, वो श्रद्धालु यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतें. बावजूद इसके श्रद्धालु अपने स्वास्थ्य
का परीक्षण कराए बिना ही चारधाम यात्रा पर चले जाते हैं. जिसके चलते कई बार यात्रा मार्ग पर यात्रियों
का स्वास्थ्य खराब होने के चलते उनकी मृत्यु तक हो जाती है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली
जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू होने के बाद 20 मई तक 41 श्रद्धालुओं
की मौत तमाम वजहों से हो चुकी है. बदरीनाथ धाम में स्वास्थ्य खराब होने की वजह से दो श्रद्धालुओं की
मौत हुई है. केदारनाथ धाम में स्वास्थ्य खराब होने से 18 श्रद्धालुओं के साथ ही एक श्रद्धालु की मौत अन्य
कारण से हुई है. यानी केदारनाथ धाम में कुल 19 श्रद्धालुओं की मौत हुई है. गंगोत्री धाम में अब तक 11
श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. जिसमें पांच श्रद्धालुओं की मौत स्वास्थ्य खराब होने की वजह से और 6
श्रद्धालुओं की मौत 8 मई को हेलीकॉप्टर क्रैश होने की वजह से हुई है. इसी तरह यमुनोत्री धाम में 9
श्रद्धालुओं की मौत हुई है. जिसमें आठ श्रद्धालुओं की मौत स्वास्थ खराब होने की वजह से और एक श्रद्धालु
की मौत अन्य कारण से हुई है. 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही
उत्तराखंड चारधाम की यात्रा शुरू हुई है. साथ ही 2 मई को बाबा केदारनाथ और 4 मई को बदरी विशाल
के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. इसके बाद से अभी तक 11 लाख 55 हजार 386 श्रद्धालु
चारधाम के दर्शन कर चुके हैं. पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 21 मई की शाम 7 बजे तक
यमुनोत्री धाम में 2 लाख 10 हजार 908 श्रद्धालु, गंगोत्री धाम में 1 लाख 96 हजार 200 श्रद्धालु,
केदारनाथ धाम में 4 लाख 53 हजार 414 श्रद्धालु और बदरीनाथ धाम में 2 लाख 94 हजार 864 श्रद्धालु
दर्शन कर चुके हैं. वहीं, चिकित्सकों के मुताबिक केदारनाथ धाम में ऑक्सीजन स्तर मात्र 80 प्रतिशत तक
रह जाता है जबकि सामान्य स्तर 94 फीसदी होता है. ऑक्सीजन की इस कमी का सीधा असर दिल और

दिमाग पर पड़ता है. बीते वर्षों के आंकड़े भी इस खतरे की पुष्टि करते हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि बिना
तैयारी और सेहत की जांच के चारधाम यात्रा करना जान जोखिम में डालने जैसा है. उत्तराखंड के उच्च
हिमालयी क्षेत्र में बसे चारधाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम) श्रद्धा का प्रतीक तो हैं ही
लेकिन यहां तक पहुंचने का रास्ता शरीर और सेहत के लिए एक बड़ी चुनौती भी पेश करता है. समुद्रतल से
3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बसे इन पवित्र धामों में ऑक्सीजन की कमी, पल-पल बदलता मौसम
और कठिन रास्ते श्रद्धालुओं की परीक्षा लेते हैं. ऐसे में अगर आप इस बार चारधाम यात्रा का मन बना रहे
हैं, तो सावधानी और तैयारी के साथ ही कदम बढ़ाएं, वरना आस्था का यह सफर मुश्किलों भरा हो सकता
है. । *लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

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