डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। यदि आप भी इन दिनों खांसी, जुकाम, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द, उल्टी-दस्त या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या से जूझ रहे हैं तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। ये लक्षण स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के भी हो सकते हैं। ऐसे में लक्षणों के बढ़ने का इंतजार करने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक जांच कराना जरूरी है।
मौसम में बदलाव के साथ प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं चिकित्सालय डोईवाला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीएस रावत ने बताया कि स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं और चार आइसोलेशन बेड आरक्षित रखे गए हैं।
स्वाइन फ्लू से संबंधित दवाइयां भी जल्द ही अस्पताल में उपलब्ध हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि हल्के लक्षण वाले मरीज चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा लें, पर्याप्त आराम करें और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए खुद को आइसोलेट रखें। यदि किसी मरीज में लक्षण बढ़ते हैं, तेज बुखार रहता है अथवा सांस लेने में तकलीफ होती है तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए।
अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की जांच के बाद उनकी स्थिति के अनुसार उपचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान यदि मरीज को विशेषज्ञ उपचार या उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता पाई जाती है तो उसे एम्स ऋषिकेश, दून अस्पताल अथवा कोरोनेशन अस्पताल जैसे उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जाएगा, ताकि उसे आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
डॉ. रावत ने बताया कि करीब तीन-चार दिन पूर्व एक बालक में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई थी। एहतियात के तौर पर उसे उपचार के लिए दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में स्वाइन फ्लू के संभावित लक्षणों वाले मरीजों की जांच की जा रही है और संक्रमण की पुष्टि होने पर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि इन दिनों डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसे अन्य संक्रमणों का खतरा भी बना हुआ है। उन्होंने लोगों से भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचने और मास्क का उपयोग करने की अपील की। साथ ही हाथों को नियमित रूप से सैनिटाइज करने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
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• कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों को अधिक खतरा
डॉ. पीएस रावत के अनुसार, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के साथ ही पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को स्वाइन फ्लू का खतरा अधिक रहता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, किडनी, लिवर अथवा अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे लोगों में स्वाइन फ्लू से संबंधित कोई लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, घर में किसी व्यक्ति के संक्रमित होने पर उसे अलग कमरे में रखने, उसके बर्तन और उपयोग की अन्य वस्तुएं अलग रखने तथा संक्रमण नियंत्रित होने तक अनावश्यक रूप से उसके संपर्क में आने से बचने की सलाह दी है।











