पुस्तकालय में लैंगिक मुद्दों पर केन्द्रित वृत्तचित्रों का प्रदर्शन* देहरादून, 16 अप्रेल, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सायं सामाजिक परिप्रेक्ष्य में लैंगिक मुद्दों पर आधारित चार वृत्तचित्रों का प्रदर्शन किया गया. यह सभी प्रदर्शित फिल्में पीएसबीटी द्वारा उदारतापूर्वक प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।सभागार में आज प्रदर्शित पहली फिल्म कॉन्ट हाइड मी थी. इसका निर्देशन माधुरी मोहिंदर ने किया है। यह अंग्रेजी, हिन्दी,कन्नड़ में है, और इसकी अवधि 26 मिनट रही. दूसरी फिल्म ‘माय सेक्रेड ग्लास बॉल के निर्देशक प्रिया थुवासरी थे. यह अंग्रेजी और हिंदी में थी,अवधि : 26 मिनट रही. वहीं प्लीज मांइड द गैप फिल्म के निर्देशक मिताली त्रिवेदी एवं गगनदीप सिंह थे. इसनी भाषा अंग्रेजी, हिंदी, व अवधि : 21 मिनट की थी. अन्तिम चौथी फिल्म ‘इश्क दोस्ती एण्ड ऑल दैट ‘ के निर्देशक, रितुपर्णा बोरा, ऋतंभरा मेहता, सृष्टि लखेड़ा और भामती शिवपालन थे. अंग्रेजी और हिन्दी की फिल्म के अवधि 19 मिनट की रही. इन वृत्तचित्रों को केन्द्र के सभागार में प्रदर्शित किया गया. सभागार में उपस्थित लोगों ने इन्हें खूब सराहा. कान्ट हाइड मी फिल्म कहानी दरअसल तीन महिलाओं की कहानी है. यह महिलाएं उन जगहों को वापस पाने के लिए असाधारण कदम उठाती हैं जो सही मायने में उनकी हैं, और उन अदृश्य बाधाओं से लड़ती हैं जो महिलाओं को स्वतंत्रता से वंचित रखती हैं। प्रिय थुवासरी द्वारा निर्देशित माय सेक्रेड ग्लास बॉल (2013) एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है जो भारत में मासिक धर्म से जुड़े टैबू (वर्जनाओं), सांस्कृतिक रूढ़ियों और महिलाओं के अनुभवों की पड़ताल करती है। यह फिल्म मासिक धर्म से जुड़ी चुप्पी को तोड़ने और महिलाओं को अपने शरीर के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करती है। मिताली त्रिवेदी और गगनदीप सिंह द्वारा निर्देशित निर्मित लघु फिल्म प्लीज माइंड द गैप दिल्ली मेट्रो में यात्रा के दौरान अंशुमान नामक एक ट्रांसमैन के अनुभवों के माध्यम से पहचान और सार्वजनिक स्थान के संघर्ष को दर्शाती है। यह वृत्तचित्र समाज और ट्रांस समुदाय के बीच मौजूद जेंडर संबंधी खाई को उजागर करती है। फिल्म इश्क दोस्ती एण्ड ऑल दैट एक हल्के-फुल्के अंदाज़ में बनी फिल्म है, जो एक लेस्बियन महिला और एक ट्रांसमैन के जीवन पर आधारित है। यह फिल्म उनके प्यार, आकर्षण, इच्छाओं, डेटिंग के अनुभवों और दोस्ती के अनुभवों को दर्शाती है। यह उन मानवीय रिश्तों की पड़ताल करती है, जो पारंपरिक प्रेम कहानियों से अलग हैं। कार्यकम में निकोलस हॉफलैण्ड, चन्द्रशेखर तिवारी, , हिमांशु आहूजा,डॉ. लालता प्रसाद, सुंदर सिंह बिष्ट, जगदीश महर, जेपी चमोला, रविन्द्र गुंसाई, कर्नल आर के नवानी, हिमांशु आहूजा, भारत सिंह रावत, आलोक सरीन, इब्बार रबी, डॉ. वी.के. डोभाल, मधन सिंह, अनिल कुमार सहित अनेक फिल्म प्रेमी, संस्कृतिकार साहित्यकार, लेखक, युवा छात्र उपस्थित रहे.












