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देहरादून-मसूरी रोड की गुणवत्ता पर बार-बार उठ रहे सवाल

29/07/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पर्यटन सीजन में पहाड़ों की रानी मसूरी की सड़कें बदहाल हैं। इससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।अक्सर चर्चाओं में रहने वाला लोक निर्माण विभाग एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है. इस बार मामला देहरादून-मसूरी मार्ग से जुड़ा है. हुआ ये है कि जिस मार्ग को करीब दस महीन पहले ही 1.95 करोड़ का लागत से दुरस्त किया गया था, वो मानसून की एक बारिश भी नहीं झेल पाया. इसीलिए विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. विपक्ष ने भी इस मामले में सरकार और सिस्टम को घेरा है.दरअसल, राजधानी देहरादून और उससे लगे आसपास के इलाकों में बीते साल 2025 में 15 और 16 सितंबर की रात आई बारिश में देहरादून-मसूरी मार्ग को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था. शिव मंदिर से गलेगी (गालोगी) बैंड तक सड़क करीब एक दर्जन स्थानों पर ध्वस्त हो गई थी और कई जगहों पर रिटेनिंग वॉल, पुश्ते और सड़क का हिस्सा बह गया था. मार्ग पूरी तरह बंद होने के बाद लोक निर्माण विभाग ने इसे प्राथमिकता पर लेते हुए युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराया, लेकिन ये पुनर्निर्माण कार्य पहली ही बारिश में जवाब दे गया. विभागीय अभिलेखों के अनुसार मसूरी-देहरादून रोड पर विभिन्न स्थानों पर कुल 10 निर्माण कार्य कराए गए, जिनकी अनुबंध राशि लगभग 1.94 करोड़ रुपये (194.52 लाख रुपये) रही, जबकि ठेकेदारों को लगभग 1.91 करोड़ रुपये (191.34 लाख रुपये) का भुगतान भी किया जा चुका है, लेकिन समस्या ये है कि पुनर्निर्माण के महज 10 महीने बाद ही मानसून की पहली तेज बारिश ने इन कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.पिछले सप्ताह पानी वाला बैंड के पास हाल ही में बनाया गया पुश्ता भरभराकर गिर गया. इसके अलावा देहरादून-मसूरी मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क में दरारें, धंसाव और रिटेनिंग वॉल में क्षति दिखाई दे रही है. ऐसे में स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी निर्माण एक बरसात नहीं झेल पाया, तो आखिर इन कार्यों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है. विभागीय दस्तावेजों के अनुसार आपदा के बाद अलग-अलग स्थानों पर क्षतिग्रस्त दीवारों, पुश्तों, एप्रोच और सुरक्षा कार्यों के लिए 10 अनुबंध किए गए. इनमें सबसे बड़ा कार्य लगभग 54 लाख रुपये का था, जबकि अन्य कार्य 7 लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक के थे. कुल मिलाकर लगभग 1.95 करोड़ रुपये के इन कार्यों का उद्देश्य देहरादून-मसूरी मार्ग को सुरक्षित बनाना और भविष्य में भूस्खलन से होने वाले नुकसान को रोकना था, लेकिन मौजूदा हालात तस्वीर का दूसरा पहलू दिखा रहे हैं.पानी वाला बैंड के पास नया पुश्ता ढहने के साथ-साथ कई स्थानों पर सड़क के किनारे दरारें उभर आई हैं. कुछ जगहों पर सड़क धंसने लगी है, जिससे बरसात के मौसम में इस मार्ग पर सफर करने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मानसून के शुरुआती दौर में ही यह स्थिति है तो आगे की बारिश में हालात और गंभीर हो सकते हैं. मसूरी नगर पालिका परिषद के पूर्व ने पूरे मामले को लेकर विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र कैबिनेट मंत्री की विधानसभा के अंतर्गत आता है और राजनीतिक संरक्षण में कमीशनखोरी व भ्रष्टाचार का परिणाम आज सड़क पर साफ दिखाई दे रहा है. उनका कहना है कि पिछले वर्ष आपदा में जिस स्थान पर रिटेनिंग वॉल टूटी थी, वहीं दोबारा बनाई गई दीवार पहली ही बरसात में फिर से ढह गई. पिछले वर्ष हुए निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वहां फिर से सड़क धंसने लगी है, जबकि उसी स्थान पर आपदा के बाद पुनर्निर्माण कराया गया था. उनके अनुसार यदि समय रहते इन स्थानों का तकनीकी परीक्षण और आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है.जल निकासी व्यवस्था पर भी उठे सवाल, विभाग से जवाब की मांग: पूर्व पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता का कहना है कि निर्माण कार्यों में सबसे बड़ी कमी जल निकासी व्यवस्था को लेकर रही. उनके अनुसार कई स्थानों पर कल्वर्ट बंद पड़े हैं और वर्षा का पूरा पानी सड़क के ऊपर से बह रहा है. यही पानी सड़क की नींव को कमजोर कर रहा है और रिटेनिंग वॉल पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है.उनका कहना है कि यदि निर्माण के दौरान वैज्ञानिक तरीके से ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया गया होता तो शायद आज यह स्थिति पैदा नहीं होती. स्थानीय लोगों का भी कहना है कि देहरादून-मसूरी मार्ग प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन मार्गों में शामिल है, जहां हर दिन हजारों वाहन आवाजाही करते हैं. ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क और सुरक्षा संरचनाएं पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त होने लगें तो यह न केवल निर्माण गुणवत्ता बल्कि निगरानी और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. लोक निर्माण विभाग को कई बार शिकायत की। सड़क को ठीक करने के लिए विभाग गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री के निर्देशों का भी पालन नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश में गड्ढों में पानी भरने से हादसे का डर रहता है। दोपहिया वाहन चालक फिसल रहे हैं जिससे शहर की छवि भी खराब हो रही है।चीफ इंजीनियर लोक निर्माण विभाग से इस विषय पर चर्चा हुई है कि जो भी सड़कें अभी हाल ही में नई बनाई गई है या फिर जिन सड़कों पर हाल ही में काम करवाया गया है, अगर वो दोबारा टूटती है तो यह देखा जाए कि उनके टूटने का कारण क्या है?लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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