डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। वन्यजीव संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में लच्छीवाला वन रेंज में हाथी गणना-2026 को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के विशेषज्ञों द्वारा वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिया गया।
प्रशिक्षण में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष गणना पद्धतियां, डंग काउंट मेथड, ट्रांजेक्ट सर्वे, जीपीएस आधारित डेटा संग्रहण, आवासीय क्षेत्र चिन्हांकन, हाथियों की गतिविधियों के अध्ययन तथा मानव-हाथी संघर्ष क्षेत्रों के विश्लेषण से संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
बताया गया कि आगामी 26 मई से 30 जून 2026 तक हाथी गणना अभियान संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम में हाथियों की वैज्ञानिक गणना से जुड़ी तकनीकी एवं फील्ड स्तर की विभिन्न जानकारियाँ साझा की गईं। वन विभाग ने अभियान को सफल एवं प्रभावी बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य और बढ़ते मानवीय दबाव के बीच हाथियों के सुरक्षित आवास और कॉरिडोर संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। ऐसे में यह गणना अभियान राज्य के दीर्घकालिक वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
उप प्रभागीय वनाधिकारी ऋषिकेश अनिल रावत ने प्रशिक्षु वनकर्मियों को गणना कार्य गंभीरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संपन्न करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हाथी जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
लच्छीवाला वन क्षेत्राधिकारी मेधावी कीर्ति ने बताया कि हाथी गणना अभियान भविष्य की वन्यजीव संरक्षण नीतियों को मजबूत आधार प्रदान करेगा। गणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर हाथियों की वास्तविक संख्या, उनके आवागमन मार्ग, संवेदनशील क्षेत्रों और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे बेहतर संरक्षण रणनीतियां तैयार करने, अवैध शिकार पर नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में सहायता मिलेगी।











