• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

अब सेना, अर्द्ध सैनिक बलों के शिविरों के नियमित अध्ययन की जरूरत

24/04/21
in उत्तराखंड, चमोली
Reading Time: 1min read
216
SHARES
270
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

फोटो- एवलाॅच का दृष्य।
02- बरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 डीपी डोभाल ।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। हिमस्खलन की बढती घटनाओं को देखते हुए अब सेना, बीआरओ व आईटीबीपी को भी स्थाई अथवा अस्थाई शिविरों वाले स्थानों की ग्लेशियर वैज्ञानिकांे के माध्यम से नियमित अध्ययन किए जाने की आवश्यकता होगी। वर्ष 2003 में भी मलारी-सुमना रोड पर किमी0 8 प्वाइंट पर एवलाॅच आने से 18 जवानों की मौत हो गई थी। ग्लेशियर वैज्ञानिक डा0 डीपी डोभाल ने भी हिमालयी क्षेत्रों मंे ग्लेशियर पर नियमित अध्ययन को बेहद जरूरी बताया है।
नीती घाटी में ऋषि गंगा की त्रासदी को अभी लोग भूले भी नहीं थे कि इसी वैली में एक और हिमस्खलन की घटना ने पूरे जनमानस को झकझोर कर रख दिया। एक तो अप्रैल महीने के अंन्त में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जबर्दस्त हिमपात व साथ में एवलाॅच की घटना से हुई ताजा मौतांे से आम जनमानस बेहद दुखी व ब्यथित हो चला है। भारत-चीन सीमा से सटी सुमना घाटी मे शुक्रवार को दोपहर बाद हुई हिमस्खलन की घटना ने झारखंण्ड प्रदेश से देा जून की रोटी के ििलए उच्च हिमालयी बर्फीले क्षेत्र मे रोजी-रोटी के लिए पंहुचे गरीब मजदूरों को ही अपना निशाना बना दिया। भारी बर्फबारी के कारण मजदूर अपने सुरक्षित शिविरो मे ही निवास कर रहे थे कि अचानक आए हिमखंण्डो ने बीआरओ के दो शिविरों को अपने आगोस मे समा डाला। शुक्रगुजार हैं भारतीय थल सेना का जिन्होने बिना देर किए रिमखिम व अन्य चैकियों से पंहुचकर युद्धस्तर पर रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया और भारी बर्फबारी के बीच रात्रि को ही करीब 150से अधिक मजदूरों केा हिमखण्ंडो के बीच से सुरक्षित बाहर निकाल दिया था। सेना का रेस्क्यू आपरेशन निरन्तर जारी रहा और अगले दिन शनिवार को सुबह हाते-होते सेना 384मजदूरों केा बर्फ की चटटान से सकुशल बाहर निकालने मे सफल हो गई थीं। सेना के जाॅबाजों ने हिमखंण्डो मे दबे सात घायलोे केा भी बाहर निकालकर सेना के चाॅपर से सेना चिकित्सालय जोशीमठ पंहुचाया।
भारी बर्फबारी के बीच सेना द्वारा बीआरओ के मजदूरों व कार्मिकों को बचाने के लिए जो साहसिक अभियान चलाया गया उसकी सर्वत्र सराहना की जा रही है। सूबे के सीएम तीरथ सिंह रावत ने भी सुमना व जोशीमठ पंहुचकर सेना के शौर्य व पराक्रम की प्रंशसा करते हुए करीब चार सौ जिन्दगियाॅ बचान के लिए आभार प्रदर्शित किया। सुमना मे जिस स्थान पर बीआरओ ने अपने दो शिविर स्थापित किए थे उसका भी ब्यापक अध्ययन किया था, क्योकि पिछले कई वर्षो मे इस स्थान व आस-पास इस प्रकार की एवलाॅच की घटना सामने नही आई तो सुरक्षित समझते हुए बीआरओ ने भी यहाॅ शिविर स्थापित किया। जो पिछले कई वर्षो से है। लेकिन इस बार कुदरत व प्रकृति इन शिविरो पर हिमस्खलन के रूप मे टूट पडी। जिसमे करीब आठ अभागे गरीब मजदूर काल के ग्रास मे समा गए।
वर्ष 2003 में भी सुमना घाटी मे एवलाॅच की घटना ने 18 सीमा प्रहरियांें की जिन्दगियाॅ लील ली थी। तब यह घटना मलारी-सुमना रोड पर 8 किमी0 प्वाइंट पर घटित हुई थीं। और महीना भी अप्रैल-मई का ही था। उसके बाद इस क्षेत्र मे यह सबसे बडी घटना है। ग्लेशियर वैज्ञानिकों ने भी एक बार फिर दोहराया है कि ग्लेशियर पर निरंन्तर अध्ययन किए जाने की जरूरत है। वाडिया हिमालियन भू-विज्ञान संस्थान के निर्वतमान बरिष्ठ वैज्ञानिक डा0डीपी डोभाल ने एक फिर दोहराया है कि प्रकृति की शक्ति को कमत्तर आंकना बडी भूल होगी। उनका मानना है कि ग्लेशियर टूटने की घटना प्राकृतिक अवश्य है,लेकिन प्राकृतिक घटना आपदा व त्रासदी मे परिवर्तित ना हो इसके लिए उसके नीचे व आस-पास के शिविरों व चैकियों को सुरक्षित रखा जाना भी बहेद जरूरी है, और यह तभी संभव होगा जब ग्लेशियरों की निरंन्तर मोनिटिरिंग हेागी। डा0डोभाल ने कहा कि अप्रैल महीने मे अत्यधिक बर्फबारी होना भी एवलाॅच का प्रमुख कारण है क्याकि जब दिसबंर-जनवरी मे बर्फबारी नही हुई तो पहाड नगंे व सुस्क हो चले थे, इस पर अचानक से बर्फबारी होने तथा सोयल टैपंरेचर नही मिलने के कारण बर्फ टिक नही पाती और अपने साथ काफी मलबा लेकर नीचे की ओर लुढकती है जो विशालकाय एवलॅाच बनकर वसावट की जिन्दिगियों पर काल बनकर टूटता है। इन सबसे बचने के लिए ग्लेशियरो पर निरन्तर अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है।
डा0डोभाल के अनुसार वर्ष 2003 मे इसी घाटी मे आए विनासकारी एवलाॅच का समय मे अप्रैल-मई महीना ही था और तब भी इसी तरह की बर्फबारी हुई थी। प्रकृति के इस प्रकार के परिर्वतन से सीख लेते हुए उसी प्रकार की तैयारियों की जरूरत होगी ताकि जान व माल का नुकसान होने से बचा जा सके।
बहरहाल फरवरी महीने मे ़ऋषिगंगा त्रासदी के बाद अप्रैल महीने मे नीती घाटी के ही सुमना मे हुई एवलाॅच की दिल दहलाने वाली घटना के बाद ग्लेशियर को लेकर किस प्रकार के अध्ययनात्मक कदम उठाए जाते है,, इस सीमा प्रहरियों के साथ ही सीमा तक सडक संपर्क जुटाने मे लगी एजेसियांे को भी गंभीरता से बिचार किए जाने की आवश्यकता है। ताकि सीमाओ पर इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति ना हो सके।

Share86SendTweet54
Previous Post

कोरोना संक्रमण का नया रिकार्ड 5084 पर पहुंचा उत्तराखंड

Next Post

अब 28 अप्रैल 2021 तक बंद रहेंगे समस्त सरकारी कार्यालय

Related Posts

उत्तराखंड

पूर्व विधायक स्वर्गीय शेर सिंह दानू स्मृति सांस्कृतिक औधोगिक एवं पर्यटन विकास मेले की तैयारियों को लेकर बैठक

November 1, 2026
2
उत्तराखंड

हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृतक सभी छह शवों को रेस्क्यू कर सड़क मार्ग तक पहुंचाया

November 1, 2026
3
उत्तराखंड

नियम दरकिनार खराब मौसम में उड़ान भरने के जोखिम

October 31, 2026
12
उत्तराखंड

सरदार पटेल की आखिरी दौरा साक्षी, आज पन्नों में जिंदा हैं यादें

October 31, 2026
6
उत्तराखंड

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के साथ भर्ती में जवाबदेही ?

October 31, 2026
7
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन गौरव चिह्नों का किया अनावरण

October 31, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67759 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37462 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37387 shares
    Share 14955 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

पूर्व विधायक स्वर्गीय शेर सिंह दानू स्मृति सांस्कृतिक औधोगिक एवं पर्यटन विकास मेले की तैयारियों को लेकर बैठक

November 1, 2026

हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृतक सभी छह शवों को रेस्क्यू कर सड़क मार्ग तक पहुंचाया

November 1, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.