• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

गंगा नदी का धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व

05/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
14
SHARES
17
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

गंगा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की एक बड़ी जनसंख्या के लिए जल जीवनदायिनी भी है। गंगा नदी लगभग 2,500 किलोमीटर की यात्रा करती है और भारत की 40% आबादी को पेयजल, कृषि जल और औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्ध कराती है। गंगा के जल से सिचाई कर कृषि क्षेत्र में हरियाली आती है और लाखों लोगों का आजीविका इससे जुड़ा है। इसका जल सस्ते परिवहन का भी माध्यम है और काशी, इलाहाबाद, पटना जैसे शहरों की अर्थव्यवस्था इसी पर निर्भर है। सरकार गंगा को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के लिए नमामि गंगे जैसी योजनाएं चला रही है। गंगा का जल न केवल जैविक विविधता का आश्रय है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का भी आधार है। माँ गंगा सचमुच भारत की जीवन रेखा हैं – जो लोगों को न केवल जल देती हैं, बल्कि आशा, संस्कृति और पहचान भी। गंगा नदी बेसिन देश के कुल जल संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा प्रदान करता है। गंगाजल में पाए जाने वाले कुछ विशेष खनिज और बैक्टीरियोफेज तत्व इसे लंबे समय तक खराब होने से बचाते हैं। गंगा डॉल्फ़िन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियाँ भी इसी जलधारा में पाई जाती हैं, जो इसकी जैविक समृद्धि का प्रमाण हैं। यह नदी भारत के पारिस्थितिक तंत्र का हृदयस्थल है।भारत की धरती पर बहती गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था और सांस्कृतिक पहचान की प्रतीक है। देश के विभिन्न भागों में बसे करोड़ों लोगों के लिए माँ गंगा जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म की कड़ी बन चुकी हैं। उत्तर भारत से लेकर बंगाल की खाड़ी तक बहने वाली यह नदी न केवल धार्मिक दृष्टि से पूज्य है, बल्कि इसका जल कृषि, पेयजल, और उद्योगों के लिए भी जीवनरेखा के समान है। गाँवों की गलियों से लेकर शहरों की सड़कों तक, माँ गंगा का नाम श्रद्धा और विश्वास से लिया जाता है। यह नदी हजारों वर्षों से भारतीय सभ्यता की साक्षी रही है, और इसका महत्व समय के साथ और भी गहराता गया है।
गंगा के तटों पर बसे तीर्थस्थल भारतीय धार्मिक जीवन के केंद्र रहे हैं, जहाँ प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। कुम्भ मेले जैसे विश्वविख्यात आयोजन भी माँ गंगा के आंचल में ही सम्पन्न होते हैं। गंगा न केवल भौगोलिक, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन चुकी है, जो पूरे भारत को एक सूत्र में बांधती है।भारत में नदियों को केवल जलधारा नहीं बल्कि ‘माँ’ के रूप में देखा जाता है। यह संबोधन केवल धार्मिक श्रद्धा का परिणाम नहीं, बल्कि उन जीवनदायी गुणों का सम्मान है जो नदियाँ समाज को देती हैं। नदियाँ कृषि के लिए भूमि को उपजाऊ बनाती हैं, जीवनदायिनी जल प्रदान करती हैं, और जैव विविधता को भी संरक्षित करती हैं। भारत में कई प्राचीन सभ्यताएँ – सिंधु, गंगा-यमुना, सरस्वती – नदियों के तट पर ही विकसित हुईं। ‘माँ गंगा’ कहना केवल भावात्मक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा है। धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण, विवाह, और मृत्यु से जुड़ी सारी प्रमुख गतिविधियाँ नदियों के पास संपन्न होती हैं। यही कारण है कि गंगा जैसी नदियों को देवी का रूप देकर पूजा जाता है। गंगा के जल को ‘पावन’ माना जाता है, जिससे स्नान मात्र से ही आत्मा की शुद्धि मानी जाती है। गंगा जल को घरों में पूजाघर में रखा जाता है, और मृत्यु के बाद भी यह अंतिम संस्कार का हिस्सा बनता है। इस मातृतुल्य भाव के पीछे नदियों की भौतिक और आध्यात्मिक दोनों भूमिकाएँ जुड़ी हैं।गंगा का उल्लेख सबसे पहले वैदिक ग्रंथों में मिलता है, जहाँ इसे दिव्य नदी और स्वर्ग से उतरी हुई जलधारा बताया गया है। ऋग्वेद, महाभारत, रामायण और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में गंगा को एक देवी के रूप में पूजा गया है। वेदों में इसे “त्रिपथगा” कहा गया है – जो स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल तीनों में बहती है। गंगा का जल जीवनदायी ही नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का प्रतीक भी माना गया है। इसे ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न और शिव द्वारा धारण किया गया बताया गया है। देवी गंगा का स्वरूप श्वेत वस्त्रों में सजे एक दिव्य स्त्री का है, जिनके हाथों में कमल और जल पात्र होता है। गंगा दशहरा जैसे पर्व भी इसी देवी की पूजा के लिए मनाए जाते हैं। गंगा की स्तुति और आह्वान वेदिक यज्ञों और मंत्रों में सदियों से होती रही है। आज भी गंगा आरती और गंगाजल का महत्त्व भारतीय जनमानस में अमिट है। यह वैदिक श्रद्धा आधुनिक धार्मिक भावनाओं में पूरी तरह समाहित हो चुकी है। वेदों के अनुसार गंगा का स्वरूप केवल जलधारा नहीं, बल्कि सजीव देवत्व है – जो पुण्य का स्रोत है। गंगा का उल्लेख ‘नदी-राजी’ के रूप में भी आता है। रामायण में राजा दशरथ द्वारा यज्ञों में गंगा जल का प्रयोग और महाभारत में भीष्म की माता के रूप में गंगा की भूमिका दर्शाती है कि इस नदी की प्रतिष्ठा हर युग में सर्वोच्च रही है। गंगा से जुड़ी वैदिक परंपराएँ आज भी हरिद्वार और वाराणसी जैसे नगरों में जीवित हैं।माँ गंगा का पृथ्वी पर आगमन केवल भूगोल की घटना नहीं बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई गाथा है। एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन रूप में ब्रह्मांड को नापते समय जब अपना चरण आकाश तक फैलाया, तो उनके पैरों से निकली जलधारा ही गंगा बनी। दूसरी प्रमुख कथा राजा भगीरथ से जुड़ी है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति के लिए ब्रह्मा से प्रार्थना की कि माँ गंगा को पृथ्वी पर लाया जाए। ब्रह्मा ने माँ गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी, पर साथ ही चेताया कि उनकी तीव्र धारा से पृथ्वी टूट सकती है। इन कथाओं में गंगा के अवतरण को न केवल एक दैवीय प्रक्रिया बताया गया है, बल्कि मानवीय तपस्या और भक्ति की पराकाष्ठा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भगीरथ की तपस्या भारतीय संस्कृति में त्याग और कर्तव्य का प्रतीक बनी है। ये कथाएँ गंगा को ‘दिव्य उपहार’ के रूप में चित्रित करती हैं जो स्वर्ग से पृथ्वी पर जीवन देने आई हैं। यह अवतरण कथा आज भी भारतीय कला, मंदिरों की मूर्तिकला, और धार्मिक चित्रों में अभिव्यक्त होती है। गंगावतरण की ये कथाएँ बच्चों को नैतिकता, भक्ति और प्रयत्नशीलता का पाठ पढ़ाती हैं। ‘भगीरथ प्रयास’ जैसे मुहावरे इसी घटना से उत्पन्न हुए हैं, जो असंभव कार्य को संभव करने के लिए प्रयत्नशील होने का प्रतीक बन चुके हैं।गंगा को ‘त्रिपथगा’ कहा जाता है – यानी वह नदी जो तीनों लोकों: स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में बहती है। यह मान्यता गंगा को अन्य सभी नदियों से विशिष्ट और दैवीय बनाती है। धार्मिक विश्वास है कि गंगा का जल केवल पृथ्वी पर ही नहीं, स्वर्ग में भी बहता है और मृत्यु के बाद आत्मा को यह गंगा ही मोक्ष प्रदान करती है। कई पुराणों में वर्णन है कि गंगा यमराज के लोक तक भी प्रवाहित होती है, जिससे पापी आत्माओं को भी शुद्धि मिलती है। इस त्रिलोक प्रवाह की अवधारणा ने गंगा को मानव जीवन के हर चरण – जन्म से मृत्यु और पुनर्जन्म – तक जोड़ दिया है। यही कारण है कि मृतकों की राख को गंगा में विसर्जित किया जाता है और इसे मोक्षदायिनी कहा जाता है। पवित्रता, शक्ति और शांति का यह त्रिसूत्र गंगा के स्वरूप को अनोखा और पूर्ण बनाता है। त्रिपथगा गंगा केवल जल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा का माध्यम है। इस अवधारणा ने गंगा को मृत्यु से परे जीवन की आशा का प्रतीक बना दिया है। काशी जैसे स्थानों पर मृत्यु के समय गंगा दर्शन और गंगाजल का सेवन मुक्ति का द्वार माना जाता है। गंगा के इस तीनों लोकों में बहने के रूप ने उसे केवल भारत में ही नहीं, नेपाल, तिब्बत और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रों में भी सांस्कृतिक महत्व प्रदान किया है।. गंगा नदी का महत्व केवल भारत की भौगोलिक धरोहर नही है, बल्कि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह भारतीय जीवन और संस्कृति की आत्मा है। अगर गंगा नदी को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाया जाए तो आने वाली पीढ़ियाॅं भी इसकी पवित्रता और जीवनदायिनी शक्ति को महसूस कर पाएंगी। माॅं गंगा की महिमा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि प्रकृति और संस्कृति का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

Share6SendTweet4
Previous Post

नारायणबगड़ के अंतर्गत हंसकोटी एवं हरमनी में 5 दिवसीय पंचायत प्रतिनिधियो का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

Next Post

आपदा राहत पैकेज का उत्तराखंड को नहीं मिला

Related Posts

उत्तराखंड

बाम्बे सिनेमा तब और अब पर सचित्र व्याख्यान

April 27, 2026
4
उत्तराखंड

सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार व आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण को लेकर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक की

April 27, 2026
4
उत्तराखंड

जल के बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल है!

April 27, 2026
5
उत्तराखंड

84 प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने किया एसडीआरएफ मुख्यालय का दौरा

April 26, 2026
37
उत्तराखंड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ का 133वां संस्करण सुना

April 26, 2026
17
उत्तराखंड

लोहाजंग क्षेत्र में अविरल नंदा रन फॉर चैरिटी दौड़ का आयोजन होगा

April 26, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67680 shares
    Share 27072 Tweet 16920
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37440 shares
    Share 14976 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

बाम्बे सिनेमा तब और अब पर सचित्र व्याख्यान

April 27, 2026

सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार व आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण को लेकर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक की

April 27, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.