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जगली फल घिंघारू चाव से खाते हैं बच्चे, घिंघारू का जूस रक्त वर्धक

17/09/19
in उत्तराखंड, हेल्थ
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आड़ू व बेडू के साथ पहाड़ में घिंघारू (टीगस नूलाटा) की झाडिय़ां भी छोटे.छोटे लाल रंग के फलों से लकदक हो जाती हैं। मध्य हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में समुद्रतल से 3000 से 6500 फीट की ऊंचाई पर उगने वाला घिंघारू रोजैसी कुल का बहुवर्षीय झाड़ीनुमा पौधा है। बच्चे इसके फलों को बड़े चाव से खाते हैं व अब तो रक्तवर्द्धक औषधि के रूप में इसका जूस भी तैयार किया जाने लगा है। विदेशों में इसकी पत्तियों को हर्बल चाय बनाने में प्रयोग किया जाता है। पर्वतीय एरिया के जंगलों में पाया जाने वाला उपेक्षित घिंघारू दिल को स्वस्थ रखने में सक्षम है। उसके इस गुण की खोज रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान पिथौरागढ़ ने की है। संस्थान ने इसके फूल के रस से हृदयामृत तैयार किया है। घिंघारू के फलों में उच्च रक्तचाप व हाइपरटेंशन जैसी बीमारी को दूर करने की क्षमता है। जबकि इसकी पत्तियों से निर्मित पदार्थ स्किन को जलने से बचाता है। इसे एंटी सनबर्न बोला जाता है। साथ ही पत्तियां कई एंटी ऑक्सीडेंट सौंदर्य प्रसाधन व कॉस्मेटिक्स बनाने के उपयोग में भी लाई जाती है।
घिंघारू की छाल का काढ़ा स्त्री रोगों के समाधान में लाभदायी होता है। छोटी झाड़ी होने के बावजूद घिंघारू की लकड़ी की लाठियां और हॉकी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं। घिंघारू आप सेब के गुणों से तो परिचित ही होंगे लेकिन आज हम आपका परिचय हिमालयी क्षेत्र में पाए जानेवाले छोटे.सेब से कराते हैं, जी हाँ बिलकुल सेब से मिलते जुलते ही इसके फल 6.8 के आकार के होते हैं। पर्वतीय क्षेत्र में घिंघारू के नाम से जाना जाता है ! Rosaceae कुल की इस वनस्पति का लेटिन नाम Pyrancatha crenulata है, जिसे हिमालयन.फायर.थोर्न के नाम से भी जाना जाता है इसके छोटे.छोटे फल बड़े ही स्वादिष्ट होते हैं। जिसे आप सुन्दर झाड़ियों में लगे हुए देख सकते हैं। इसे व्हाईट.थोर्न के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ओरनामेंटल झाड़ीदार लेकिन बडी उपयोगी वनस्पति है। आइये इसके कुछ गुणों से आपका परिचय कराते हैं। इसकी पत्तियों से पहाडी हर्बल चाय बनायी जाती है! इसके फलों को सुखाकर चूर्ण बनाकर दही के साथ खूनी दस्त का उपचार किया जाता है। इस वनस्पति से प्राप्त मजबूत लकड़ियों का इस्तेमाल लाठी या हॉकी स्टिक बनाने में किया जाता है। फलों में पर्याप्त मात्रा में शर्करा पायी जाती है जो शरीर को तत्काल ऊर्जा प्रदान करती है!
.इस वनस्पति का प्रयोग दातून के रूप में भी किया जाता है जिससे दांत दर्द में भी लाभ मिलता है। .इसके फलों से निकाले गए जूस में रक्त .वर्धक प्रभाव पाया जाता है, जिसका लाभ उच्च हिमालयी क्षेत्रों में काफी आवश्यक माना गया है। इसे प्रायः ओर्नामेंटल पौधे के रूप में साज .सज्जा के लिए बोनसाई के रूप में प्रयोग करने का प्रचलन रहा है। इस कुल की अधिकाँश वनस्पतियों के बीजों एवं पत्तों में एक जहरीला द्रव्य हायड्रोजन.सायनायड पाया जाता है जिस कारण इनका स्वाद कडुआ होता है एवं इससमें एक विशेष प्रकार की खुशबू पायी जाती है। अल्प मात्रा में पाए जाने के कारण यह हानिरहित होता है तथा श्वास.प्रश्वास की क्रिया को उद्दीपित करने के साथ ही पाचन क्रिया को भी ठीक करता हैं। घिंघारू के बीजों एवं पत्तियों में पाए जानेवाले जहरीले रसायन हायड्रोजन सायनायड के कैंसररोधी प्रभाव भी देखे गए हैं।
चीन में घिंघारू हॉर्थोर्नके नाम से जाना जाता है। वहां पाई जाने वाली प्रजातियों के नाम भिन्न हैं। चीन में इसे टीगस औक्जिकैंथ एवं टीगज मोनोजीना नाम से भी जाना जाता है। चीन में घिंघारू के फलों का उपयोग कई उत्पादों एवं औषधीय पान बनाने में किया जाता है। घिंघारू औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके बारे में लोग कम जानते हैं। जानकारी के अभाव में स्थानीय लोग इसका समुचित लाभ नहीं उठा पाते हैं। यदा कदा इसके फलों को लोग यूं ही स्वाद के लिए खा लेते हैं, परंतु अधिकांश फल या तो पक्षी खाते हैं या फिर सूख कर जमीन पर गिर जाते हैं। जमीन पर गिरे फल और पत्त्तियां सड़कर मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बढ़ाने में सहायक साबित होते हैं। घिंघारू के फलों का रस हृदय रोगियों के लिए काफी लाभप्रद है और यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है। घिंघारू की पत्त्तियों से निर्मित पदार्थ त्वचा को जलने से बचाती है । जिसे एंटीसनवर्न कहा जाता है। साथ ही पत्त्तियों में कई एंटीऑक्सीडेंट सौंदर्य प्रसाधन ए कॉस्मेटिक्स बनाने हेतु भी उपयोग में लाई जाती है। घिंघारू के छाल का काढ़ा स्त्री रोगों मासिक धर्म में अत्यधिक रक्त स्राव के निवारण में लाभदायी होता है। रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान पिथौरागढ़ ने पर्वतीय क्षेत्रों में उगने वाले और उपेक्षित घिंघारू के फलों के रस से एक औषधीय पेय हृदय रोगियों के लिए बनाया है। इसमें पाए गए औषधीय गुणों को देखते घिंघारू के फलों से पेय तैयार किया है। इसका हाल ही में चूहों पर किए गए परीक्षण से इसके उक्त रक्तचाप ए हाइपरटेंशन के रोगियों के लिए लाभप्रद होना सिद्ध हुआ है। इस पेय में विभिन्न लाभप्रद रसायनिक अवयवों की प्रचुर उपलब्धता है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी लाभप्रद है।

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