हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
सरकार के पूरी तरह से असहयोग के बावजूद नंदा भक्तों 
की अपनी देवी के प्रति अपार श्रद्धा के चलते शांतिपूर्वक एवं सकुशल श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा 2026 बुधवार की देर सांय नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ नंदानगर (घाट) में पूरी तरह से सम्पन्न हो गई हैं। देव यात्रा तों संपन्न हो गई किंतु पूरी तरह से आस्था से जुड़ी और अपनी सर्वशक्तिमान देवी के प्रति पूरी आस्था के साथ उसके नाम से की गई करीब 280 किलोमीटर लंबी यात्रा जहां कई प्रश्न अपने पीछे छोड़ गई हैं, वही बड़ी जात को किसी भी कीमत पर सम्पन्न नही होने के प्रयासों में जुटे लोगों को अब करारा जवाब मिल गया हैं,कि श्रद्धा एवं भक्ति के आगे किसी की भी नही चल सकती हैं। यात्रा के बुग्याली क्षेत्रों एवं उच्च हिमालई क्षेत्रों में प्रवेश करते ही जिस तरह से मौसम बेहद खुशगवार हो उठा उसे देव चमत्कार से कम नही माना जा रहा है। देवी पर अटूट आस्था रखने वालों का मानना है कि 12 वर्षों के बाद इस साल ही माता नंदा देवी की इच्छा कैलाश गमन की थी और उसी के चमत्कार से दशकों बाद इतना बेहद सुंदर मौसम देव यात्रियों को मिला। और उन्होंने पूरी भक्ति भावना से ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा को सकुशल पूरी कर यात्रा के विरोधियों को प्रतिउत्तर दें दिया है,अब बारी पहले दिन से श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा का विरोध करने वाले, यात्रा को लेकर तमाम तरह के भ्रम फैलें ने वालों और अंतिम समय तक यात्रा को प्रसिद्ध धाम होमकुंड तक नही पहुंचने देने के प्रयासों में जुटी संस्थाओं और लोगों की हैं कि वे खुशगवार मौसम में सम्पन्न हो चुकी यात्रा के संबंध में किस तरह से अपनी प्रतिक्रिया देते हैं इसके उत्तर के लिए शायद इंतजार करना पड़ सकता हैं।
वर्ष 2025 से जनवरी 2026 तक श्री नंदादेवी राजजात यात्रा 2026, हिमालई सचल महाकुंभ के रूप में आयोजित करने का प्रचार करने वाली उत्तराखंड सरकार एवं श्री नंदादेवी राजजात समिति नौटी जनवरी 2026 में राजजात यात्रा को 2026 में आयोजित करने से पूरी तरह से मुकर गई। और प्रति वर्ष आयोजित होने वाली छोटी जात यात्रा (लोकजात यात्रा) जोकि नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से वेदनी बुग्याल तक जाती हैं के आयोजन की पक्षधर बन बैठी। सरकार एवं समिति का यह एकतरफा निर्णय नंदा देवी पर अटूट आस्था रखने वाले बहुसंख्यक भक्तों को रास नही आया, उन्होंने 2026 में नंदा राजजात के बजाय श्री नंदादेवी बड़ी जात के नाम से जोकि 1987 से पहले से इसी नाम से यात्रा जानी जाती थी,आयोजन की घोषणा करते हुए तैयारियां शुरू कर दी। पहले, पहल राज्य सरकार व राजजात समिति ने इस घोषणा को हल्के-फुल्के में लिया किन्तु गुजरते वक्त में बड़ी जात समिति की आयोजन को लेकर गंभीर तैयारियों को देखते हुए सरकार एवं समिति के हाथ-पांव फूलने लगें, इसके साथ ही किसी भी तरह से यात्रा को मुकाम होमकुंड तक नही पहुंचने देने के जी-तोड़ प्रयास शुरू हो गये,किंतु देव आज्ञा के चलते सभी प्रयास एक के बाद एक धराशाही होते चले गए। नंदा भक्तों ने ना तो कथित परम्पराओं का रोना रो रहें राजजात समिति के लोगों की बातों को महत्व दिया और ना ही व्यवस्थाओं की भारी कमियों का रोना रो रही सरकार की ही कोई दलील मानी, श्रद्धालू बहुत बड़ी संख्या में नंदा यात्रा में सामिल हुए और अंतिम लक्ष्य होमकुंड तक गए भी और विधिवत बड़ी जात के तहत पूजा-अर्चना की और अब सकुशल वापस अपने घरों को भी लौट गए हैं।जिस तरह से 5 सितंबर को भारी बारिश एवं विपरीत मौसम के बीच नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से देव डोलियां, छतोलियां व चौसिंगा खांडु यात्रा पर निकले उसे देख एक बारगी तों आशंका जताई जाने लगी थी कि राज्य सरकार एवं राजजात समिति की मनौकामनाएं पूर्ण होने वाली है और यात्रा 2026 में होमकुंड तक नही पहुंच पाएंगी । किंतु ज्यों-ज्यों देव यात्रा आगे के पड़ावों पर बढ़ते गई त्यों-त्यों देव इच्छा के चलते मौसम करवट बदलने लगा, इसे देवी चमत्कार ही मान सकते हैं कि करीब दो सप्ताह तक क्षेत्र में मौसम बेहद खराब था, किंतु जैसे ही यात्रा ने बुग्याली क्षेत्रों एवं उच्च हिमालई क्षेत्रों में पहुंचने लगी तों मौसम बेहद ही अनुकूल हों उठा। यात्री इसे माता नंदा की कृपा बताते निर्जन पड़ाव वेदनी बुग्याल से आगे बढ़ने लगें। इधर यात्रा के वेदनी बुग्याल से आगे बढ़ने के साथ ही सरकार एवं राजजात समिति के अरमान धुमिल होने लगें। बिना किसी सरकारी सहयोग से जिस तरह से बेहद अनुकूल मौसम में यात्रा में सामिल यात्रियों ने अपनी देव यात्रा पूरी कर यात्रा का पूर्णय अर्जित किया। 20 दिनों तक चली यात्रा जो कि विकट पैदल रास्तों, नदी, नालों,गदेरों, खतरनाक उच्च हिमालई क्षेत्रों से सुरक्षित वापस लौट कर बुधवार को नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ में देव डोली के थानों में विराजमान होने के सम्पन्न हो गई है उसके बाद यात्रा में सामिल भक्त एवं बड़ी जात समिति ने इसे माता का आदेश बताते हुए उनके चरणों में अपना आभार प्रकट किया हैं। बड़ी जात समिति ने लक्ष्य के अनुरूप पूरी यात्रा कर अपनी श्रद्धा भक्ति को साबित कर दिया हैं, किंतु बड़ी जात यात्रा का पहले दिन से ही विरोध कर रहें लोग एवं संस्थाएं आम लोगों के सामने अपने को कब साबित करेंगे,एक बड़ा प्रश्न लंबे समय तक फिजाओं में तैरता रहेगा कि आखिर 2026 की जात को 2027 में प्रस्तावित करने के पीछे मूल लक्ष्य क्या थें, बड़ी जात का विरोध कर रही संस्थाएं इस का उत्तर देंगी?!
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कई मायनों में ऐतिहासिक श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा के पूरी तरह से शांतिपूर्वक सम्पन्न हो जाने,इस यात्रा में हजारों, हजार नंदा भक्तों के सामिल होने, एवं सभी यात्रियों के सुरक्षित अपने घरों में पहुंच जाने के बाद भी उत्तराखंड सरकार के द्वारा इस यात्रा को लेकर कोई भी बयान जारी नही करना सरकार की कुंठा को जाहिर कर रही हैं,साथ ही प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के द्वारा भी राज्य की ही नही विश्व की सर्वाधिक लंबी पैदल यात्राओं में सुमार नंदा देवी यात्रा की व्यवस्थाओं पर कोई टिप्पणी नही किया जाना यात्रा को लेकर कांग्रेस को भी कटघरे में खड़ी कर रही हैं। हालांकि आयोजन कमेटी के अध्यक्ष हरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि यात्रा के सकुशल कुरूड पहुंचने पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने कमेटी को फोन पर सफल आयोजन पर बधाई दी , जबकि थराली के पूर्व विधायक डॉ जीत राम देवी के कुरूड़ मंदिर में विराजमान होने पर स्वयंम मौजूद रहे और सफल आयोजन पर कमेटी को बधाई दी।
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श्री नंदा देवी बड़ी जात आयोजन समिति (पंजीकृत) के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत एवं मंदिर समिति कुरूड़ के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला ने शांतिपूर्ण ढंग से देव कार्य सम्पन्न होने को मां नंदा-भगवती की इच्छा की पणनीति बताते हुए कहा कि बिना उनकी इच्छा के उस समय जब सरकार एवं एक संस्था यात्रा को पूरी तरह फेल करने में जुटी हुई थी, ऐसे में देव इच्छा ही बलवती हो कर आयोजनकर्ताओं के साथ थी। उन्होंने कहा कि पिछले 4 दशकों में इतने बेहद अनुकूल मौसम में देवी की यात्रा नही हुई थी, जितनी की बड़ी जात 2026 में हुई। समिति ने यात्रा में सामिल सभी नंदा भक्तों का आभार व्यक्त करते हुए देवी नंदा से उनकी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि इस बार श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा में 2014 में आयोजित श्री नंदादेवी राजजात यात्रा से अधिक यात्रियों ने प्रतिभाग कर एक इतिहास रचा गया हैं। उन्होंने कि बताया यात्रा मार्ग का जिक्र करते हुए कहा कि शीला समुद्र से होमकुंड़ एवं अगले पड़ावों तातड़ा, आदि स्थानों के लिए कमेटी के स्वयंम सेवकों ने चंदनियाघट एवं इसके ऊपर व नीचे तीन लकड़ी के पुलों का निर्माण किया ताकि यात्रा सुरक्षित अपने गंतव्यों तक पहुंच सकें।











