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हेलीकाप्टर टिकट बुकिंग के नाम पर यात्रियों से ठगी

07/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
चारधाम यात्रा जैसे-जैसे पास आ रही है, वैसे वैसे साइबर ठग भी सक्रिय होते जा रहे हैं। इस बीच प्रशासन भी मुस्तैद है और एसटीएफ ने 12 फर्जी वेबसाइट और अब तक 76 वेबसाइट ब्लॉक कर दी है। दरअसल, चारधाम यात्रा के लिए हेली टिकट बुक करते समय देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को सावधानी बरतनी होगी, वरना धोखाधड़ी हो सकती है। एसटीएफ व साइबर क्राइम पुलिस ने I4सी गृह मंत्रालय के साथ मिलकर शुक्रवार को 12 ऐसी वेबसाइटों को बंद कराया है, जिनसे श्रद्धालुओं से ठगी की जा रही थी। चारधाम से जुड़ी अब तक कुल 76 वेबसाइटों को ब्लॉक कर यात्रियों को ठगी से बचाया गया है।साइबर अपराधी आम जनता की गाढ़ी कमाई हड़पने के लिए अपराध के नए-नए तरीके अपनाकर धोखाधड़ी कर रहे हैं। फर्जी वेबसाइट तैयार कर हेली सेवा बुकिंग के नाम पर संपूर्ण भारत में लाखों रुपये की धोखाधड़ी की जा रही है। गत वर्ष भी कई साइबर ठगी की शिकायतें आई थीं, जिसमें विभिन्न राज्यों के लोगों के साथ चारधाम यात्रा हेलीकॉप्टर बुकिंग सेवा के नाम पर ठगी की गई थी।इस प्रकार की ठगी का मुख्य कारण यह था कि लोगों को चारधाम यात्रा के लिए हेली सेवा बुकिंग की आधिकारिक वेबसाइट की जानकारी नहीं थी, जबकि आईआरसीटीसी ने चारधाम हेलीसेवा की बुकिंग के लिए अपनी वेबसाइट अधिकृत किया है। श्रद्धालु इस उत्तराखंड राज्य वेबसाइट के माध्यम से चारधाम यात्रा के लिए हेली सेवा बुक करा सकते हैं। कोई भी भुगतान करने से पहले संबंधित भुगतान के माध्यम की जांच पड़ताल अवश्य कर लें। वहीं श्रद्धालुओं को साइबर ठगों के चंगुल में फंसने से बचाने के लिए एसटीएफ ने अभियान चलाया है। ऐसी फर्जी वेबसाइटों पर एसटीएफ की कड़ी नजर है। उन्हें चिह्नित कर एसटीएफ सबक सिखाने का काम करेगी।ऐसी धोखाधड़ी वाली वेबसाइटें प्रकाश में आती रहती हैं। इसके लिए उत्तराखंड एसटीएफ को एमएचए I4सी टीम से लगातार सहयोग मिल रहा है। एसटीएफ व साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन लगातार फर्जी वेबसाइट की निगरानी कर रहा है, जिस पर कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 76 फर्जी वेबसाइटों को बंद कराया जा चुका है। ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। प्रशासन ने साफ कहा है कि सही जानकारी और आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल ही आपको ठगी से बचा सकता है। केदारनाथ यात्रा शुरू होने से पहले ही हेलीकॉप्टर बुकिंग को लेकर साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं के लिए नई चिंता खड़ी हो गई है। जिला प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे को देखते हुए एडवाइजरी जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। जिलाधिकारी स्पष्ट रूप से कहा है कि ठग आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर श्रद्धालुओं को निशाना बना रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पॉन्सर्ड पोस्ट के जरिए नकली वेबसाइटों का प्रचार किया जा रहा है। ये वेबसाइटें बिल्कुल असली जैसी दिखती हैं, जिससे आम लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते हैं। इसके अलावा गूगल सर्च में दिखाई देने वाले कई स्पॉन्सर्ड लिंक भी फर्जी पाए गए हैं, जो यूजर्स को धोखाधड़ी वाली साइट्स पर ले जाते हैं।जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष भी इस तरह के कई मामले सामने आए थे, जिनमें श्रद्धालुओं से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की ठगी की गई थी। इस बार भी ठग उसी तरीके को और अधिक उन्नत रूप में अपना रहे हैं। साइबर अपराधी व्हाट्सएप कॉल या चैट के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं और उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि वे आधिकारिक एजेंट हैं जो हेलीकॉप्टर टिकट बुक करा सकते हैं।इसके बाद ठग क्यूआर कोड भेजकर तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि जैसे ही भुगतान किया जाता है, ठग संपर्क तोड़ देते हैं और पीड़ित को कोई टिकट नहीं मिलता। इसके अलावा, पवन हंस और हिमालयन जैसी हेली सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइटें भी बनाई गई हैं, जिनसे लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि श्रद्धालु केवल आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से ही हेलीकॉप्टर टिकट बुक करें। किसी भी अनजान लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन या व्हाट्सएप संदेश पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति कॉल या मैसेज के जरिए टिकट बुकिंग का दावा करता है, तो उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।इसके साथ ही साइबर पुलिस भी सक्रिय हो गई है और ऐसे फर्जी लिंक व वेबसाइटों को ट्रैक कर कार्रवाई की जा रही है। लोगों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दें।श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान भी चला रहा है, ताकि लोग ठगी से बच सकें। केदारनाथ यात्रा आस्था का विषय है, ऐसे में जरूरी है कि श्रद्धालु सतर्क रहें और किसी भी प्रकार के लालच या जल्दबाजी में आकर गलत कदम न उठाएं। वहीं, हेलीकॉप्टर टिकट दिलाने का दावा करने वाली 22 संदिग्ध वेबसाइट्स की रिपोर्ट डोमेन रजिस्ट्रार को भेजी गई है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि हेलीकॉप्टर बुकिंग केवल आधिकारिक पोर्टल से ही करें। किसी भी लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन या व्हाट्सएप मैसेज पर भरोसा न करें। आजकल यात्रा डिजिटल हो चुकी है. सब कुछ ऑनलाइन बुक होता है इसी बात का फायदा उठाते इसी वेबसाइट को असली मानकर जब लोग क्लिक करते हैं तो उसको स्कैमर्स व्हाट्सएप या दूसरे अन्य तरीके से जोड़ते हैं, और यही से उनका खेल शुरू होता है. आगामी केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए उत्तराखण्ड सरकार के निर्देशों पर रुद्रप्रयाग पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है। हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर श्रद्धालुओं को ठगने वाले गिरोहों पर कड़ा प्रहार करते हुए पुलिस ने अब तक 265 संदिग्ध वेबसाइट्स, सोशल मीडिया अकाउंट्स, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ब्लॉक या रिपोर्ट किया है।दरअसल, हर वर्ष केदारनाथ यात्रा शुरू होने से पहले साइबर अपराधी हेलीकॉप्टर सेवा के नाम पर फर्जी वेबसाइट, फेसबुक पेज और इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर श्रद्धालुओं को निशाना बनाते हैं। कई लोग इनके झांसे में आकर आर्थिक नुकसान भी उठा चुके हैं। लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

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