• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

पिता की उंगली पकड़ जसपाल राणा ने चुनी शूटिंग की राह

12/06/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
17
SHARES
21
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

जूनियर भारतीय पिस्टल टीम के मुख्य कोच जसपाल राणा उत्तराखंड(देहरादून) के रहने वाले हैं। उन्होंने निशानेबाजी में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं। साल 1994 में 18 साल की उम्र से ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का सिलसिला शुरू कर दिया था। एशियन गेम्स में जसपाल राणा ने भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम रोशन किया था। खास बात ये है कि जसपाल राणा को निशानेबाजी का ये हुनर विरासत में मिला है। उनके पिता से लेकर बच्चे भी शूटिंग के क्षेत्र में देश नाम कमा रहे हैं।    जूनियर भारतीय पिस्टल टीम के मुख्य कोच जसपाल राणा उत्तराखंड(देहरादून) के रहने वाले हैं। उन्होंने निशानेबाजी में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं। साल 1994 में 18 साल की उम्र से ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का सिलसिला शुरू कर दिया था। एशियन गेम्स में जसपाल राणा ने भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम रोशन किया था। खास बात ये है कि जसपाल राणा को निशानेबाजी का ये हुनर विरासत में मिला है। उनके पिता से लेकर बच्चे भी शूटिंग के क्षेत्र में देश नाम कमा रहे हैं।    जूनियर भारतीय पिस्टल टीम के मुख्य कोच जसपाल राणा उत्तराखंड(देहरादून) के रहने वाले हैं। उन्होंने निशानेबाजी में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं। साल 1994 में 18 साल की उम्र से ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का सिलसिला शुरू कर दिया था। एशियन गेम्स में जसपाल राणा ने भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम रोशन किया था। खास बात ये है कि जसपाल राणा को निशानेबाजी का ये हुनर विरासत में मिला है। उनके पिता से लेकर बच्चे भी शूटिंग के क्षेत्र में देश नाम कमा रहे हैं।    जूनियर भारतीय पिस्टल टीम के मुख्य कोच जसपाल राणा उत्तराखंड(देहरादून) के रहने वाले हैं। उन्होंने निशानेबाजी में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं। साल 1994 में 18 साल की उम्र से ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का सिलसिला शुरू कर दिया था। एशियन गेम्स में जसपाल राणा ने भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम रोशन किया था। खास बात ये है कि जसपाल राणा को निशानेबाजी का ये हुनर विरासत में मिला है। उनके पिता से लेकर बच्चे भी शूटिंग के क्षेत्र में देश नाम कमा रहे हैं।    जूनियर भारतीय पिस्टल टीम के मुख्य कोच जसपाल राणा उत्तराखंड(देहरादून) के रहने वाले हैं। उन्होंने निशानेबाजी में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं। साल 1994 में 18 साल की उम्र से ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का सिलसिला शुरू कर दिया था। एशियन गेम्स में जसपाल राणा ने भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम रोशन किया था। खास बात ये है कि जसपाल राणा को निशानेबाजी का ये हुनर विरासत में मिला है। उनके पिता से लेकर बच्चे भी शूटिंग के क्षेत्र में देश नाम कमा रहे हैं।    भारत के दिग्गज निशानेबाज और उत्तराखंड के शान जसपाल राणा का निधन हो गया है। जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ वापस लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। नई दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। जसपाल राणा का असमय जाना उत्तराखंड सहित पूरे देश और खेल दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा आघात है।उत्तराखंड के टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक स्थित भाल गांव के मूल निवासी जसपाल राणा देश के सबसे बेहतरीन निशानेबाजों में से एक रहे हैं। उन्हें उनके पिता और बीएसएफ अधिकारी नारायण सिंह राणा ने प्रशिक्षित किया था।महज 12 वर्ष की उम्र में जसपाल राणा ने अहमदाबाद में 31वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप के जरिए अपना नेशनल डेब्यू किया और सबको चौंकाते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया। वर्ष 1994 में 46वीं विश्व शूटिंग चैंपियनशिप (जूनियर सेक्शन) में उन्होंने स्टैंडर्ड पिस्टल शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई।अपने पूरे करियर में जसपाल राणा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 600 से अधिक पदक अपने नाम किए। खेल के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार और वर्ष 2002 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा था।निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने बतौर कोच भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके मार्गदर्शन में देश को कई विश्वस्तरीय निशानेबाज मिले।जसपाल राणा राजनीति में भी अपना हाथ आजमा चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में पहले भारतीय जनता पार्टी और फिर कांग्रेस पार्टी का हाथ थामा। जसपाल राणा ने साल 2009 का लोकसभा चुनाव टिहरी सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में लड़ा, लेकिन उन्हें कांग्रेस के विजय बहुगुणा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। खास बात ये भी है कि जसपाल राणा और राजनाथ सिंह के बीच पारिवारिक रिश्ते हैं। जसपाल के पिता नारायण सिंह राणा और राजनाथ सिंह आपस में समधी हैं। जसपाल राणा राजनीति में भी अपना हाथ आजमा चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में पहले भारतीय जनता पार्टी और फिर कांग्रेस पार्टी का हाथ थामा। जसपाल राणा ने साल 2009 का लोकसभा चुनाव टिहरी सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में लड़ा, लेकिन उन्हें कांग्रेस के विजय बहुगुणा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। खास बात ये भी है कि जसपाल राणा और राजनाथ सिंह के बीच पारिवारिक रिश्ते हैं। पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा की पोती और पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और वर्तमान में भारतीय निशानेबाजी टीम के कोच जसपाल राणा की बेटी हैं। अपने पिता से ही प्रेरणा लेकर वह शूटिंग के क्षेत्र में आई हैं। मंझौन शूटिंग रेंज में उन्होंने शूटिंग की बारीकिया सीखीं। इसके बाद पिता ने उन्हें दिल्ली के डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में प्रोफेशनल शूटिंग का प्रशिक्षण लेने भेजा। वो भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत चुकी हैं। इसके साथ ही उनका बेटा युवराज भी निशानेबाजी की बारीकियां सीख रहा है। जसपाल के पिता नारायण सिंह राणा और राजनाथ सिंह आपस में समधी हैं। जसपाल राणा इस समय कई और युवा खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं. वो देहरादून में जसपाल राणा इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी भी चलाते हैं. जहां पर कई युवा प्रतिभाओं को निखारा जाता है वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक में इतिहास रचने वाली स्टार निशानेबाज मनु भाकर के वे निजी कोच रहे, जिन्होंने भारत को दो कांस्य पदक दिलाए।इसके अलावा उन्होंने सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे युवा सनसनीखेज खिलाड़ियों को भी तराशा। खेल और कोचिंग में उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें साल 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हाल ही में वे भारतीय पिस्टल टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में सेवाएं दे रहे थे।जसपाल राणा ने हमेशा ओलंपिक में पदक जीतने का सपना देखा, लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस रहा कि स्टैंडर्ड पिस्टल और सेंटर-फायर पिस्टल जैसी स्पर्धाएं ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने खेल जीवन में कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।प्रतियोगी निशानेबाजी से दूरी बनाने के बाद भी उनका खेल से रिश्ता नहीं टूटा। उन्होंने देहरादून में युवा निशानेबाजों को तैयार करने का जिम्मा उठाया और पौंधा स्थित जसपाल राणा शूटिंग अकादमी के माध्यम से नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण दिया। बाद में उन्हें राष्ट्रीय जूनियर शूटिंग टीम का कोच भी बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने युवा प्रतिभाओं को पहचानने और तराशने का काम किया। भारतीय निशानेबाजी की स्टार खिलाड़ियों में शामिल मनु भाकर और सौरभ चौधरी जैसी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों खिलाड़ियों ने बाद में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।जसपाल राणा का परिवार भी निशानेबाजी से जुड़ा रहा। उनकी बेटी देवांशी राणा राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं और परिवार की यह खेल परंपरा आगे बढ़ा रही हैं। उनके निधन से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर है। लेकिन अब उनके अचानक निधन की खबर ने खेल जगत को हिलाकर रख दिया हैपद्म श्री’ जसपाल राणा जी का निधन अत्यंत दु:खद एवं भारतीय खेल जगत की अपूरणीय क्षति है। विनम्र श्रद्धांजलि।..लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share7SendTweet4
Previous Post

डोईवाला: केशवपुरी-राजीवनगर के पुनर्वास और भूमि अधिकारों की मांग

Next Post

मालवीय नगर अग्निकांड: कुक होटल में आग लगने के लिए जिम्मेदार कैसे?

Related Posts

उत्तराखंड

जब विदेशी धरती पर गूंजा वो ‘अमर’ भाषण, भारत की कायल हुई दुनिया

September 11, 2026
1
उत्तराखंड

नीम करौली बाबा के घर पर किसका हक?

September 11, 2026
1
उत्तराखंड

हेली कंपनियों का सफर चुनौतियों भरा

September 11, 2026
2
उत्तराखंड

एसडीआरएफ वाहिनी मुख्यालय में क्रेच का शुभारंभ

September 11, 2026
4
उत्तराखंड

डोईवाला: बंदरों के बढ़ते आतंक से निजात दिलाने की मांग

September 11, 2026
2
उत्तराखंड

डोईवाला: छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित होते ही कॉलेज में बढ़ी सरगर्मी

September 11, 2026
3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67734 shares
    Share 27094 Tweet 16934
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38077 shares
    Share 15231 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37456 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

जब विदेशी धरती पर गूंजा वो ‘अमर’ भाषण, भारत की कायल हुई दुनिया

September 11, 2026

नीम करौली बाबा के घर पर किसका हक?

September 11, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.