डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
यमुनोत्री धाम जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को घंटों सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा। मार्ग के दोनों ओर दर्जनों छोटे-बड़े वाहन फंस गए, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।स्यानाचट्टी में हाईवे चौड़ीकरण के दौरान किए गए अनियंत्रित कटान के कारण हाईवे लगातार भूस्खलन की चपेट में आ रहा है। हल्की बारिश होते ही पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरते हैं, जिससे आए दिन यातायात बाधित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी की ओर से ढलानों के स्थायी उपचार और सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जा रही है। भूस्खलन होने से यातायात ठप हो गया। लगातार हो रहे अनियंत्रित कटान और पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण स्यानाचट्टी के पीछे हाईवे पर दोनों बैंड क्षतिग्रस्त हो गए। इससे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। भूस्खलन होने से यातायात ठप हो गया। लगातार हो रहे अनियंत्रित कटान और पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण स्यानाचट्टी के पीछे हाईवे पर दोनों बैंड क्षतिग्रस्त हो गए। इससे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।स्यानाचट्टी में हाईवे चौड़ीकरण के दौरान किए गए अनियंत्रित कटान के कारण हाईवे लगातार भूस्खलन की चपेट में आ रहा है। हल्की बारिश होते ही पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर गिरते हैं जिससे आए दिन यातायात बाधित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी की ओर से ढलानों के स्थायी उपचार और सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जा रही है। इसका खामियाजा स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और चारधाम यात्रा पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है। राज्य में भूस्खलन समेत अन्य कारणों के चलते 34 मार्ग बंद हैं। सबसे अधिक मार्ग पिथौरागढ़ जिले बंद रहे। इस सीमांत जिले में दस ग्रामीण मार्ग बंद है। देहरादून और पौड़ी गढ़वाल में छह-छह, रुद्रप्रयाग दो, चमोली चार मार्ग बंद रहे। टिहरी में चार और नैनीताल में एक राज्य मार्ग और एम प्रमुख जिला मार्ग बंद रहा। बंद मार्गाें को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। निर्माण कार्य एजेंसी ने सड़क चौड़ीकरण कार्य में मनमानी कर स्यानाचट्टी को एक और खतरे की जद में धकेल दिया है। बार-बार हाईवे बंद होने की घटनाओं ने चौड़ीकरण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से संवेदनशील स्थानों पर तत्काल प्रभावी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर वर्षा ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया हैरविवार तड़के स्याना चट्टी और रानाचट्टी के बीच मार्ग पर बोल्डर और मलबा आने से यमुनोत्री हाईवे करीब एक घंटे तक बाधित हो गया, जिससे धाम की ओर जा रहे तीर्थ यात्रियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ाजेसीबी से मलबा हटाकर प्रातः लगभग साढ़े छह बजे मार्ग को यातायात के लिए सुचारू कर दिया गयास्थानीय लोगों का कहना है कि स्याना चट्टी क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील माना जाता है, इसके बावजूद यमुना नदी में आरबीएम को हटाने का कार्य अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाया है।वहीं, दूसरी ओर सड़क कटिंग से हल्की वर्षा के साथ ही मार्ग पर मलबा और पत्थर आने की घटनाएं शुरू हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोग दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बताया कि सुबह तड़के मार्ग बाधित हुआ था, जिसे मशीनों की मदद से हटाकर प्रातः लगभग साढ़े छह बजे यातायात के लिए सुचारू कर दिया गया। मार्ग करीब एक घंटे तक बंद रहा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से संवेदनशील क्षेत्रों में मलबा हटाने, ढलानों को सुरक्षित करने और यात्रा मार्ग पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है, ताकि मानसून के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेवहीं, यमुनोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितने चिंता जताते हुए कहा कि अभी मानसून की शुरुआत भर हुई है और आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैउन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के कारण कई स्थानों पर मार्ग कमजोर और जर्जर हो चुका है, ऐसे में प्रशासन को समय रहते ठोस और एहतियाती कदम उठाने होंगे।उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में वृद्ध, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी यात्रा कर रही हैं। ऐसे में यदि भविष्य में लंबे समय तक मार्ग बाधित होता है तो यह बड़ी चुनौती बन सकता है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











