हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
बरसात शुरुआत होते ही तहसील कार्यालय थराली से सटे राड़ीबगड़ गांव के ग्रामीणों की रातों की नींदें गायब हो गई है,इस गांवों में पिछले वर्षों हुए भूस्खलन व कटाव का अपेक्षित ट्रीटमेंट ना होने के कारण इनके ऊपर खतरें के बादल मंडरा रहे हैं। गांव के बीचोंबीच बहने वाला गधेरा लगातार कटाव कर दहशियत को बढ़ा रहा है।
नगर पंचायत थराली के अंतर्गत तहसील कार्यालय राडीबगड़ के राड़ीबगड़ गांव के ग्रामीणों के ऊपर पिछले लंबे समय से भूस्खलन एवं भूमि कटाव के कारण खतरा मंडरा रहा हैं। 2025 में थराली,चेपड़ो,सबगड़ आदि गांवों में आई आपदा से भारी नुकसान हुआ था। इसी दौरान राड़ीबगड़ गांव में भी बड़े स्तर पर भूस्खलन एवं भू कटाव हुआ था, जिससे कई ग्रामीणों की आवासीय मकानों के साथ ही गौशालाएं भी खतरे की जद में आ गए थे। उस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से यहां के कई परिवारों को राहत शिविरों में भेज दिया था। मौसम साफ होने के बाद ग्रामीण राहत शिविरों से वापस अपने घरों को लौट गए थें,इस गांव के बीचोंबीच बहनें वाला गद्देरा तेजी के साथ भूकटाव कर आवादी क्षेत्रों को अपने कब्जे में लेता जा रहा है जिससे खतरा दिनों दिन बढ़ता जा रहा। 2025 की आपदा के बाद से नागरिक लगातार शासन-प्रशासन,सिंचाई विभाग से सुरक्षा दीवारों ,चैकडैमो आदि का निर्माण करने की मांग करते आ रहे हैं, किंतु नागरिकों की मांगें अब तक पूरी नही हो सकी। इस क्षेत्र के नागरिकों ने बताया कि दिन तों जैसे तैसे कट जा रहा है किंतु रातों को वें लोग रतजगा हों कर गुजरने पर मजबूर बनें हुए हैं,रात को बारिश होने पर उन्हें पूरी तरह से सतर्क रहना पड़ता हैं।
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राड़ीबगड़ के नागरिक जगदीश पंत, दिगंबर पंत, मुन्ना सहित अन्य लोगों ने बताया कि 2025 की आपदा के बाद उन्होंने कई बार शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों को पत्र भेजकर गद्देर पर सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग उठाई। किंतु आज तक भी उन्हें आश्वासन के शिवाय कुछ भी नही मिला हैं ।अब जबकि बरसात शुरू हो गई है तों उनके ऊपर खतरें के बादल मंडराने लगे हैं। उन्होंने समय रहते ट्रिटमेंट नही किए जाने पर शासन, प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अगर इस क्षेत्र में कोई भी जनहानि एवं सम्पत्ति को नुकसान होता हैं तों उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।











