हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली/नंदाधाम कुरूड़।
श्री नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा का बुधवार को पूरे 20 दिनों के बाद नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ नंदानगर (घाट) में समापन हो गया
हैं।इस मौके पर भारी संख्या में नंदा देवी के भक्त सुबह से ही सिद्धपीठ के परिसर में डटे हुए थे।देव डोलियों व छंतोलियों के मंदिर के पास पहुंचे ही मौजूद नंदा भक्तों ने देवी के जोरदार तरीके से जयकारें लगाते हुए,पुष्प वर्षा कर देवी एवं यात्रियों का स्वागत किया। यात्रा में सामिल यात्रियों, पुजारियों में शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा संपन्न होने पर काफी अधिक संतोष झलक रहा था।
नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू हुई श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा एवं लोकजात यात्रा का 5 सितंबर को शुभकामनाएं हुआ था। 16 सितंबर को लाटू धाम वांण गांव में सभी डोलियों का भव्य मिलन हुआ था। इसके बाद बधांण की राजराजेश्वरी की डोली 18 सितंबर को एशिया के सब से बड़े वेदनी बुग्याल में लोकजात की पूजा कर सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली के लिए वापस लौट पड़ी थी, जबकि कुरूड़ से बड़ी जात यात्रा पर निकली दशोली, बण्ड़ एवं ज्वाल्पा की देव डोलियां, छतोलियां एवं चौसिंगा खांडु बड़ी जात यात्रा के तहत होमकुंड़ के लिए हिमपर्वत श्रंखला त्रिशूली एवं नंदा घुघटी की ओर कैलाश के लिए रवाना हो गई थी। 20 सितंबर को यात्रा त्रिशूली एवं नंदा घुघटी की तलहटी में स्थित होमकुंड़ में पहुंची जहां पर विधिवत् बड़ी जात के तहत पूजा-अर्चना की गई। यहीं र यात्रा में सामिल 3 चौसिंगा खांडुओं को कैलाश विदाई के तहत छोड़ दिया गया और यात्रा सिद्धपीठ कुरूड़ के लिए वापस लौट पड़ी। बुधवार को यात्रा अपने 19 वें पड़ाव नंदानगर ब्लाक के फरखेत से प्रातः काल नारिंग गांव से होते हुए सिद्धपीठ कुरूड़ के लिए रवाना हुई। यात्रा के नंदा सिद्धपीठ पहुंचने से पहले ही भारी तादाद में नंदा भक्त कुरूड़ पहुंच गए थे। यात्रा के कुरूड़ गांव पहुंचते ही भक्तों में जोश काफी अधिक बढ़ गया। वें देवी के जोरदार उद्घोष के साथ डोलियों को मंदिर परिसर तक लाएं,इस दौरान उत्साहित देवी भक्तों ने पुष्प वर्षा कर डोलियों, छंतोलियों का जबर्दस्त स्वागत किया। डोलियों के मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ दशोली की डोली को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, काफी देर तक मंदिर में पूजा अर्चना के बाद देर सांय मंत्रोच्चारण के बीच डोली को सिद्धपीठ में विराजमान कर दिया गया,इस दौरान भी देवी भक्तों ने जोरदार तरीके से नंदा देवी के जयकारे लगाए।श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत,कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला ने शांतिपूर्वक बड़ी जात सम्पन्न होने पर माता नंदा का आशीर्वाद बताते हुए सभी यात्रियों, नंदा भक्तों, सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्तों की बदौलत ही बिना किसी सरकारी सहयोग के यात्रा सकुशल संपन्न हुई हैं।
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इधर वेदनी में लोकजात यात्रा कर बधांण की मां नंदादेवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली वापसी के छठवें पड़ाव कुरूड़ गांव पहुंच गई हैं। बुधवार को यात्रा प्रातः पांचवें पड़ाव गोठिंड़ा से खूनी,पार्था होते हुए कुराड़ गांव के प्रवास पर पहुंची।इस दौरान पूरे यात्रा मार्ग पर नंदा भक्तों ने देव डोली की पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगी। गुरुवार को यात्रा कुराड़ से सगवड़ा होते हुए रात्रि प्रवास पर ढुंगाखोली गांव पहुंचेगी।











