• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की स्थिति: डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

23/08/24
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
24
SHARES
30
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

ब्यूरो रिपोर्ट। राज्य निर्माण के समय उत्तराखंड में मात्र 34 राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय थे। सहायता प्राप्त एवं निजी महाविद्यालयों की संख्या 60 के लगभग थी जिनमें अधिकांश संस्कृत की शिक्षा से समब्न्धित थे। राज्य में वर्ष 2000 से पूर्व तीन राजकीय, एक डीम्ड विश्वविद्याालय और दो राष्ट्रीय महत्व के उच्चशिक्षा संस्थान थे। पिछले 20 वर्षों में उत्तराखंड में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में अभूतपूर्व संख्यात्मक वृद्धि हुई। इनमें सामान्य विषयों के अतिरिक्त तकनीकी, चिकित्सा, आयुर्वेद, कृषि, संस्कृत, प्रबन्धन से सम्बन्धित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय सम्मिलित हैं। आज उत्तराखंड में 11 राजकीय व 20 निजी विश्वविद्यालयों के अधीन 114 राजकीय, 17 अनुदानित और 394 स्ववित्तपोशित उच्चशिक्षा संस्थान संचालित हो रहे हैं। एक केन्द्रीय विश्वविद्याालय  के अलावा आई.टी.आई. रुड़की, एम्स हृषिकेश, आई.आई.एम., एन.आइ.टी. सहित राज्य में राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की संख्या 07 हो गयी है। इतने नए व छोटे राज्य में इतनी बढ़ी संख्या में शिक्षण संस्थाओं के होने पर हम गर्व अवश्य कर सकते हैं। परन्तु इसमें समस्याओं का अम्बार भी उतना ही बड़ा है।राज्य निर्माण के समय उत्तराखंड में मात्र 34 राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय थे। सहायता प्राप्त एवं निजी महाविद्यालयों की संख्या 60 के लगभग थी जिनमें अधिकांश संस्कृत की शिक्षा से सबंधित थे। राज्य में वर्ष 2000 से पूर्व तीन राजकीय, एक डीम्ड विश्वविद्याालय और दो राष्ट्रीय महत्व के उच्चशिक्षा संस्थान थे। पिछले 23 वर्षों में उत्तराखंड में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में अभूतपूर्व संख्यात्मक वृद्धि हुई।एनआईआरएफ यानी नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क-2024 की रिपोर्ट आ गई है। उत्तराखंड को एक बार फिर निराशा सामना करना पड़ा है। एनआईआरएफ ने उच्च शिक्षा की 14 श्रेणियों में देश के करीब डेढ़ हजार उच्च शिक्षा संस्थानों (सरकारी, प्राइवेट एवं एडेड आदि, सभी को मिलाकर) को उनकी उत्कृष्टता के आधार पर रैंकिंग प्रदान की है। इन डेढ़ हजार में उत्तराखंड के केवल आठ संस्थान शामिल हैं।प्रतिशत की दृष्टि से देखें तो यह रैंक हासिल करने वाले कुल संस्थानों का करीब आधा प्रतिशत है। ये संख्या कई कारणों से चिंताजनक है। पहला कारण, उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना के मामले में उत्तराखंड राष्ट्रीय औसत से बहुत आगे है। पूरे देश में करीब दस लाख की आबादी पर एक विश्वविद्यालय स्थापित है, जबकि उत्तराखंड का औसत तीन लाख की आबादी पर एक विश्वविद्यालय का है।बात साफ है, आबादी के मानक पर उत्तराखंड में राष्ट्रीय औसत की तुलना में तीन गुना विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। राष्ट्रीय औसत के दृष्टिगत कॉलेजों का आंकड़ा भी डेढ़ गुना है। स्पष्ट है कि संख्यात्मक वृद्धि के लिहाज से उत्तराखंड ने उल्लेखनीय कार्य किया है, लेकिन गुणात्मक पैमाने पर उच्च शिक्षा (मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ, एग्रीकल्चर-हॉर्टीकल्चर, मैनेजमेंट, फार्मेसी, आर्किटेक्चर-प्लानिंग, ओपन-डिस्टैंस, स्किल एजुकेशन, डेंटल) की स्थिति चिंताजनक है। जिन लोगों की आंकड़ों में रुचि है वे एक आसान निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि संस्थानों (सभी प्रकार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) की संख्या की दृष्टि से उत्तराखंड के आठ को नहीं, बल्कि लगभग 50 संस्थानों को रैंक मिलना चाहिए था।चिंता की दूसरी बात यह है कि इन आठ संस्थानों में उत्तराखंड के केवल दो सरकारी विश्वविद्यालयों का नाम सम्मिलित है-जीबी पंत कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और कुमाऊं विश्वविद्यालय का फार्मेसी विभाग। छह अन्य संस्थानों में तीन केंद्रीय संस्थान (आईआईटी रुड़की, एम्स ऋषिकेश और आईआईएम काशीपुर) शामिल हैं। तीन प्राइवेट संस्थानों (ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी और डीआईटी यूनिवर्सिटी का फार्मेसी विभाग) ने प्रदेश की लाज बचाने में सहयोग किया है। पिछले साल भी इन्हीं संस्थानों ने उत्तराखंड को चर्चा में निंग की श्रेणियों में भी रैंक प्राप्त किया है। आर्किटेक्चर-प्लानिंग में ये संस्थान देश में पहले नंबर पर है।इसबनाए-बचाए रखा था। इन आठ संस्थानों में सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियां आईआईटी रुड़की को मिली हैं। इस संस्थान ने ओवर ऑल श्रेणी के अलावा रिसर्च, इंजीनियरिंग, इनोवेशन, मैनेजमेंट स्टडीज और – आर्किटेक्चर प्लाके अलावा दो निजी विश्वविद्यालयों, ग्राफिक एरा और पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी के बीच की प्रतिस्पर्धा की बदौलत भी कुछ राहत भरी स्थितियां पैदा हुई हैं। ये दोनों संस्थाएं ओवर ऑल श्रेणी, यूनिवर्सिटी कैटेगरी, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट स्टडीज में रैंक हासिल कर सकी हैं। यदि आईआईटी रुड़की और उपर्युक्त दोनों प्राइवेट विश्वविद्यालयों को निकाल दें तो उच्च शिक्षा में प्रदेश की स्थिति केवल चिंताजनक ही नहीं, बल्कि गंभीर दिखाई देगी। इन तीनों को किनारे करके उत्तराखंड के पास केवल एक नाम दिखाई देगा, वो है- जीबी पंत कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जिसे यूनिवर्सिटी कैटेगरी, एग्रीकल्चर और स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी की श्रेणी में रैंक मिल सका है। (इस यूनिवर्सिटी एग्रीकल्चर में देश की टॉप 10 में शामिल किया गया है।इसे और विस्तार से समझें तो साफ है कि राष्ट्रीय स्तर के सबसे बेहतरीन 200 संस्थानों में उत्तराखंड राज्य का अपना कोई भी सरकारी संस्थान शामिल नहीं है। प्रदेश के जिन चार संस्थानों को इस सूची में स्थान मिला है, उसमें आईआईटी रुड़की, एम्स ऋषिकेश भारत सरकार की संस्थाएं हैं जबकि ग्राफिक एरा और पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी प्राइवेट संस्थाएं हैं। तीसरी चिंताजनक बात यह है कि उत्तराखंड में संचालित हो रहे करीब 650 कॉलेजों-संस्थानों (सरकारी, प्राइवेट एवं एडेड) में से एक भी संस्था किसी भी श्रेणी (मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ, एग्रीकल्चर-हॉर्टीकल्चर, मैनेजमेंट, फार्मेसी, आर्किटेक्चर-प्लानिंग, ओपन-डिस्टैंच, स्किल, डेंटल) में कोई रैंक हासिल नहीं कर सका है।यहां नैक में ए और ए प्लस ग्रेड हासिल करने वाले कॉलेजों-संस्थानों को लेकर सवाल उठने स्वाभाविक ही हैं। जब उन्हें नैक में ए या ए प्लस ग्रेड मिला है तो एनआईआरएफ में उन्हें रैंक क्यों नहीं मिल सका ? वैसे, इन चिंताओं में एक चिंता यह भी है कि सरकार द्वारा संचालित 120 कॉलेजों और सरकार की सहायता पर चलने वाले 21 कॉलेजों में से किसी के भी पास नैक का ए ग्रेड नहीं है। यानी सभी का स्तर औसत या इससे भी नीचे का है। ऐसे में, इनसे एनआईआरएफ में रैंक की उम्मीद करना कुछ ज्यादा ही बड़ा सपना होगा। हद तो यह है कि उत्तराखंड के 34 विश्वविद्यालयों (निजी और सरकारी) में से केवल 10 ने ही नैक से मूल्यांकन कराया है। बाकी के स्तर के बारे में अनुमान लगाना भी मुश्किल है। जब नैक ही नहीं करा रहे हैं तो एनआईआरएफ की रैंक तो बहुत बड़ी बात है।इस विमर्श में केवल सरकार को दोष देकर बात नहीं बन सकती यदि सरकार ही जिम्मेदार है तो फिर जीबी पंत कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और कुमाऊं विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग को भी कोई रैंक नहीं मिलना चाहिए। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सरकार इन दो संस्थाओं की ही मदद कर रही है और अन्य संस्थाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सरकार सभी को मदद दे रही है। यहां सवाल यह है कि मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ, जनरल हायर एजुकेशन की संस्थाओं के अपने प्रयास किस स्तर के रहे हैं ? वस्तुतः ज्यादातर संस्थाएं तदर्थवाद का शिकार हैं। विजन और प्लानिंग की बात दूर की कौड़ी है।चौथी चिंता यह है कि यदि सरकारी कॉलेज और सरकारी विश्वविद्यालय (चाहे वे भारत सरकार के हों या राज्य सरकार के अथवा सरकार द्वारा अनुदानित हों) एनआईआरएफ में रैंक हासिल नहीं करेंगे तो इसका लाभ वे निजी संस्थाएं उठाएंगी जिनका मकसद एजुकेशन बिजनेस से लाभ कमाना है। जिन निजी विश्वविद्यालयों को एनआईआरएफ की रैंकिंग में स्थान मिला है, उनके यहां बीटेक प्रोग्राम की चार साल की सालाना फीस 5 से 7 लाख रुपये के बीच है, इस फीस में हॉस्टल शामिल नहीं है।एमबीए प्रोग्राम का फी-स्ट्रक्चर भी लगभग इतना ही है। (अनुमान लगा लीजिए, देश में कितने अभिभावक ऐसे होंगे जो अपने एक बच्चे की इस फीस को चुकाने की स्थिति में होंगे!) जबकि, सरकारी विश्वविद्यालयों में यह फीस एक लाख के आसपास है (हॉस्टल के अतिरिक्त)। फीस के इस अंतर से साफ है कि एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके लिए सरकारी संस्थान ही अंतिम सपना है। ऐसे में यदि सरकारी एवं सहायातप्राप्त संस्थानों (कॉलेजों और विश्वविद्यालयों) के एकेडमिक लीडर सुचिंतित और परिणाम केंद्रित पहल नहीं करेंगे तो आगे भी परिणाम निराशाजनक ही रहेगा। नीति में उच्चशिक्षा के क्षेत्र में भी केन्द्र व राज्यों के स्तर पर विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पुनर्गठन एवं सुद़ृणीकरण हेतु चरणबद्ध तरीके से योजना बनाने का प्रस्ताव है। नीति के तहत राज्य में विश्वविद्यालयों के स्तर पर पाठ्यक्रमों को सुधारकर उन्हें शिक्षण एवं शोध के लिए बहुविषयक बनाना है। सभी एकल विषयक महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों को बहु-विषयक करना भी नीति का एक हिस्सा है। राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से इस नीति के क्रियान्वयन की दिशा में काम कर रही हैं। परन्तु किसी भी अच्छी नीति का यदि क्रियान्वयन सम्पूर्णता में न हो तो नीति ही असफल हो जाती है। इसलिए प्रत्येक सरकार, नागरिक, शिक्षक व छात्र का योगदान शिक्षा की गुणवता बढ़ाने में होना आवश्यक है।नितियों के निर्धारण, खास तौर से, आर्थिक और विकास से संबधित नीतिओं के निर्धारण के लिए अनुसन्धान के माध्यम से मिलने वाल्रे इनपुट्स काफी अहम् होते है. उच्च शिक्षा की गुणबत्ता नापने का सबसे बड़ा पैमाना यही है कि अनुसन्धान के क्षेत्र में कितना काम हो रहा है

Share10SendTweet6
Previous Post

डोईवाला : राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन के संदर्भ में कई बिंदुओं पर किया विचार

Next Post

देहरादून : ‘सिरवाल गढ़ में हुई क्षति का निरीक्षण कर अधिकारियों को तत्काल कार्यवाई के निर्देश दिए

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: क्षेत्र पंचायत की बैठक में गूंजे जनसमस्याओं के मुद्दे

April 17, 2026
61
उत्तराखंड

उत्तराखंड में हजारों हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट पर अवैध कब्जा

April 17, 2026
10
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग की मास्टर प्लान पुस्तिका का किया विमोचन

April 17, 2026
5
उत्तराखंड

सीएम हेल्पलाइन 1905 पर लंबित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए – मुख्यमंत्री

April 17, 2026
5
उत्तराखंड

रक्तदान शिविर में 87 स्वयंम सेवकों ने 87 यूनिट रक्त दान कर अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया

April 17, 2026
11
उत्तराखंड

ग्रामीण श्रमिकों को भुगतना नही किए जाने पर 4 मई से आंदोलन करने की चेतावनी

April 17, 2026
11

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67671 shares
    Share 27068 Tweet 16918
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38050 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37328 shares
    Share 14931 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: क्षेत्र पंचायत की बैठक में गूंजे जनसमस्याओं के मुद्दे

April 17, 2026

उत्तराखंड में हजारों हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट पर अवैध कब्जा

April 17, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.