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वाह! पीड़ित बड़ा दिल दिखाएं, पर हत्यारे कानून से खेलते रहें?

20/01/20
in क्राइम, दुनिया
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उत्तराखंड समाचार
सोशल मीडिया पर इन दिनों निर्भया के हत्यारों और यौन उत्पीड़न की सीमाएं पर करने वाले दोषियों की फांसी पर बहस तेज है। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने जब निर्भया की मां से बड़ा दिल दिखाकर दोषियों को माफ करने की अपील की तो बहस तीखी हो गई। वकील इंदिरा जय सिंह ने अपने बयान में कहा कि जिस तरह राजीव के हत्यारों को सोनिया गांधी ने माफ कर दिया, निर्भया की मां को भी चारों दोषियों को माफ कर बड़ा दिल दिखाना चाहिए। निर्भया की माता और पिता की तरफ से इसकी बहुत तीखी प्रतिक्रिया आई है। इंदिरा जयसिंह के ट्यूट के बाद सोशल मीडिया पर बहस बहुत तेज हो गई है।
दुनिया के बहुत सारे देशों में फांसी की सजा का प्रावधान नहीं है। दुनिया में कई संगठन फांसी की सजा को अमानवीय करार देकर इनका प्रचार प्रसार करने वाले एनजीओ को फंड मुहैया कराते हैं। सोशल मीडिया की बहस में यह बात सामने आई है कि वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह फांसी के खिलाफ अभियान चलाकर अपने एनजीओ को लिए फंड जुटाती हैं। जिसमें कुछ फंड मुहैया कराने वाली संस्थाओं के नामों का भी उल्लेख है। हम इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते हैं कि इंदिरा जयसिंह ने वास्तव में इन संस्थाओं से अपने एनजीओ के लिए फंड प्राप्त किया है। लेकिन सोशल मीडिया में इस बहस में यह बात खुलकर सामने आई है।
इंदिरा जयसिंह ने अपने ट्वीट में कहा है-‘‘आशा देवी के दर्द को मैं महसूस करती हूं। मैं उनसे अर्ज करती हूं कि सोनिया गांधी की तरह, जैसे उन्होंने नलनी को माफ कर दिया, वैसे ही निर्भया के हत्या, यौन उत्पीड़न के दोषियों को माफ कर दें। हम आपके साथ हैं, पर मृत्युदंड के खिलाफ हैं।’’
हमारे देश में मृत्यु दंड का कानून बरकरार है। 2012 में हुए निर्भया केस के बाद इस कानून को और कड़ा कर दिया गया है। इतनी क्रूर वारदात को अंजाम देने के दोषी मौत के फंदे से बचने के लिए कानूनी दांवपेंच खेल रहे हैं। एक तरह से वह कानून से खेल रहे हैं, दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील एक महिला ऐसे क्रूर दोषियों को माफ करने की अपील कर रही हैं। स्वाभाविक तौर पर इसकी प्रतिक्रिया बहुत कड़ी होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के एक वकील की इस बयान के पीछे छिपे निहितार्थ को समझना जरूरी हो जाता है।
सन् 2009 में इंदिरा जयसिंह को यूपीए सरकार ने एएसजी नियुक्ति किया था। यह सोनिया गांधी की मेहरबानी के बिना संभव नहीं था। निर्भया मामले में सोनिया गांधी के बड़े दिल को सामने लाकर क्या इंदिरा जयसिंह अपनी स्वामी भक्ति को दर्शाना चाहती हैं? सोनिया गांधी के बड़े दिल का प्रसार देश दुनिया में कर कांग्रेस पार्टी के मुखिया परिवार में अपनी घुसपैंठ को और गहरी करना चाहती हैं?
सोशल मीडिया में कथित तौर पर इंदिरा जयसिंह पर आरोप लग रहे हैं कि इस बयान के पीछे उनके आर्थिक हित भी छिपे हुए हैं। दोषियों को माफ करने का बयान देकर वह भले ही देश में उठे आक्रोष को दरकिनार कर रही हों, कहीं उनकी नजर उन अंतर्राष्टीय मानवाधिकार संरक्षक संस्थाओं पर तो नहीं हैं, जो मृत्यु दंड का विरोध करने वालों की संस्थाओं को मोटा फंड मुहैया कराते हैं? इंदिरा जयसिंह का यह ट्यूट एक तीर से दो निशाने तो नहीं साध रहा है? एक तरफ स्वामी भक्ति दूसरी तरफ अपनी संस्था के लिए फंड का जुगाड़?
निर्भया के माता-पिता ने इस वकील की इस भलमंशाहत जैसा दिखने वाले बयान का उतना ही कड़ा जवाब दिया है। अपने लहजे में इस बयान के पीछे छिपी कमाई की मंशा और देश के मूड के खिलाफ आवाज उठाने पर उनकी खूब लानत-मलानत की है।
यहां एक बात और विचारणीय हो जाती है। जब कोई सोनिया गांधी होता है, मतलब कि किसी राजनीतिक दल का मुखिया होता है, उसकी मानवीय भावनाएं उच्च स्तर तक चली जाती हैं। उस व्यक्ति को यह चिंता नहीं रहती कि उसके पति, पिता या अन्य किसी परिजन को क्रूर षडयंत्र कर मारने वालों को उनके किए की सजा मिलनी चाहिए। उसकी चिंता पार्टी के वोट बैंक की होती है। जो होना था हो गया अब राजीव गांधी के तमिल हत्यारे नलनी और अन्य को माफ कर तमित वोट बैंक को साधने की मंशा तो कांग्रेस के मुखिया सोनिया गांधी की नहीं है?
दूसरी तरफ निर्भया के माता-पिता की प्रतिक्रिया स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया है। जब किसी के परिजन का निर्मम तरीके से सेक्स उत्पीड़न किया जाता है, मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार कर इस तरह की अमानवीयता की जाएगी तो ऐसा करने वालों को देश के कानून के अनुसार वाजिब सजा की मांग करना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। वही निर्भया के माता पिता कर रहे हैं। कुछ निहित स्वार्थों में फंसे लोग, चाहे वे वोट बैंक के लिए या फिर विदेशी फंड पाने के लिए ऐसे पीड़ितों से बड़ा दिल दिखाने की सलाह देते हैं, निश्चित तौर पर पीड़ितों की ऐसी ही प्रतिक्रिया होती है और होनी भी चाहिए। सोचने की बात है, पीड़ितों से बड़ा दिल दिखाने को कहा जाए, लेकिन हत्यारों को कानून से खेलने की छूट मिलती रहे?

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