हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
कुमाऊं एवं गढ़वाल की मध्यस्थली एवं पीएम श्री राजकीय इंटर कालेज ग्वालदम में पुरातन शिक्षक एवं छात्र पुनर्मिलन समारोह के तहत पूर्व शिक्षकों एवं छात्र ,छात्राओं का भावपूर्ण मिलन
हुआ, इस दौरान शिक्षकों एवं छात्र,छात्राओं ने अपने स्मरण आपस में एक दूसरे से बांटते हुए वर्तमान में उनके द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों के संबंध में जानकारी दी।
राइका ग्वालदम के सभा कक्ष में आयोजित ग्वालदम मिलन समारोह का पूर्व प्रधानाचार्य एवं मुख्य जिला शिक्षाधिकारी के पद अवकाश प्राप्त जीवन सिंह हियांकी की अध्यक्ष में आयोजित पुनर्मिलन
समारोह में पद्मश्री से सम्मानित कल्याण सिंह रावत मैती ने कहा कि शिक्षक शिक्षा तों देते ही हैं किन्तु उससे आगे उनमें देश भक्ति, अपनी संस्कृति को संवारने, समाज सेवा को जो भाव विकसित करता हैं अपने आप में अनोखा हैं, कहा कि ग्वालदम ही वह कालेज हैं जहां से मैती आंदोलन का जन्म हुआ आज मैती आंदोलन भारत ही नही दुनिया के कई देशों में चल रहा हैं। आज तमाम प्रतियोगिता में जब मैती आंदोलन का जिक्र आता है तो उसमें ग्वालदम का उसमें नाम जरूर आता हैं,उन्होंने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिलने की जानकारी देते हुए कहा कि कभी भी किसी को निस्वार्थ भाव से कार्य करते रहना चाहिए फल जरूर मिलेगा, उन्होंने आयोजन की
सराहना करते हुए कहा कि पुनर्मिलन समारोह का आयोजन वस्तव में सराहनीय हैं जो अलख ग्वालदम की जगाई गई हैं वह वास्तव में अन्य क्षेत्रों के पूर्व छात्र, छात्राओं के लिए एक प्रेरणा साबित होगी, पूर्व शिक्षकों एवं छात्र के बीच जो मालन हुआ हैं वह गुरु, शिष्य की एक मिसाल बनेगी,रहे एवं इस कालेज के गठन 1982-83 से कई छात्र, छात्राएं उच्चतम पदों पर कार्य रत है। इस दौरान उन्होंने इस कालेज के कई अनुभवों को साझा किया।इस मौके पर प्रवक्ता बाला दत्त शर्मा ने कहा कि वे 1999से 2002 तक ग्वालदम में कार्यरत रहे,उन्हें पढ़ाएं छात्र छात्राएं देशा,प्रदेश में कार्य करते हुए देश सेवा कर रहे हैं,इस मौके पर शिक्षक पनोरी ने आयोजन की सराहना की, मौके प्रवक्तामेहर सिंह सोन ने कहा कि वे 1993 से 1913 तक कार्यरत रहें, कहा कि शैक्षणिक कार्य के दौरान कई बार उन्हें कठोरता भी दिखानी पड़ती है,इस अवसर पर पूर्व प्रधानाचार्य राजीव लाल रोधियाल ने कहा कि वेइ1991 से 1997 तक यहां पर कार्यरत रहे और यहां का अनुभव उनका अनुभव काफी बेहतर रहा,इस मौके पर प्रवक्ता अत्रि भारद्वाज जों कि उत्तर प्रदेश के निवासी हैं ने कहा वें 1996 सेवा 2006 तक ग्वालदम में कार्यरत रहे आज भी उसका प्रयास रहता है वें यहां आएं आज भी उन्हें आगर में जब उसने पढ़ाएं छात्र, छात्राएं मिलते हैं और वें सम्मान देते हैं तों उन्हें बढ़ी प्रसन्नता होती, इस अवसर पर पूर्व प्रवक्ता एसपी रतूड़ी कविताओं के जरिए पूर्व शिक्षकों एवं छात्र,छात्राओं का स्मरण करते हुए कहा कि उनके पढ़ाएं हुए छात्र,छात्राएं कई उच्चतम पदों पर कार्यरत हैं,इसे देख कर उन्हें बहुत अधिक प्रसन्नता होती हैं, उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और भव्यता से करने की वकालत की। इस मौके पर अपने अध्यक्षीय भाषण में पूर्व सीईओ एवं ग्लावदम के पूर्व प्रधानाचार्य जीवन सिंह हियांकी ने स्वर्गीय शिक्षकों एवं प्रवक्ताओं को श्रद्धांजलि देते हुए पुनर्मिलन समारोह के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि गुरु एवं शिष्य का संबंध अटूट हैं,पुरातन शिक्षक एवं छात्र पुनर्मिलन समारोह में जिस तरह से पूराने शिक्षकों व छात्र, छात्राओं का जो मिलन हुआ हैं वह ऐतिहासिक हैं।इस आयोजन को आगे भी जारी रखने की अपील की। उन्होंने ग्वालदम कालेज के कार्यकाल को काफी अधिक बेहतर बताया।इस मौके पर ग्वालदम के पूर्व छात्र एवं ग्वालदम के पूर्व प्रधान हरी सिंह बोरा ने पूर्व शिक्षकों को अपनी ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया।
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इस मौके पर जीआईसी ग्वालदम में अध्ययनरत एवं वर्तमान में जिला आबकारी निरीक्षक लक्ष्मण सिंह बिष्ट, पूर्व छात्र एवं मुख्य आयोजक कैलाश जोशी,भुवन जोशी,नवीन पोखरिया, पूर्व छात्र रमेश बिष्ट, महावीर गड़िया,पूरन बिष्ट, पलविंदर भाकुनी, हरेंद्र परिहार, शोभित जोशी,आशु शर्मा, शांति बिष्ट आदि ने शिक्षकों की कार्यशैली के संबंध में चर्चा करते हुए अध्ययन,अध्यापन पर चर्चा करते हुए बीते दिनों को याद करते हुए निकट भविष्य में भी इसे आयोजित करने का संकल्प जताया।
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पुनर्मिलन समारोह में शिक्षकों ने पूर्व छात्र, छात्राओं को फूल मालाएं पहना कर उनका स्वागत किया, जबकि राइका ग्वालदम की छात्राओं को आयोजन कमेटी ने स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया।
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ग्वालदम मिलन समारोह में राइका ग्वालदम में शिक्षा प्राप्त एवं वर्तमान में ऊधम सिंह नगर के खटीमा में शिक्षक के पद पर कार्यरत नवीन पोखरिया की कविता संग्रह एकलकट्टू पुस्तक का शिक्षकों ने विमोचन किया।











