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कवि हृदय, सख्त प्रशासक, सबको साथ लेकर चलने वाले ईमानदार नेता अटलजी

25/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक आदर्शवादी और प्रशंसनीय राजनेता थे. 1996 में वे पहली बार प्रधानमंत्री बने थे. 1998 में फिर से उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, इसके बाद वे तीसरी बार 1999 में प्रधानमंत्री बने और 2004 तक अपना कार्यकाल पूरा किया. हम आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था.हिंदू तन मन, हिंदू जीवन, रग रग हिंदू, मेरा परिचय यह केवल कवि हृदय,पत्रकार या समाजसुधारक, देशभक्त ही नहीं पंचतत्वों की रक्षा, वन्य जीवों के लिए जगह बनाने वाले और इको सेंसेटिव जॉन की स्थापना और परमाणु परीक्षण से सक्रिय राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सूर्य की भांति चहुं दिशा में चमके अटल बिहारी वाजपेय जी रहे। सूरज डूबता नहीं, सूरज छुपता नहीं, सूरज अस्त होता नहीं, आज अटल बिहारी जी हमारे बीच में नहीं है लेकिन सूर्य की तरह उन्होंने अपने कार्यों से अपने आपको हमारे बीच में जीवंत रखा है जिसका देश सदैव ऋणी रहेगा। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ था। इनकी माता कृष्णा देवी और पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी (जो स्वयं एक शिक्षक थे)। एक शालीन, सहज और बहुआयामी व्यक्तित्व वाले नेता,जो एक शक्तिशाली वक्ता और कवि के रूप में वाजपेयी ने अपनी छवि बनाई। अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा जनता की आवाज़ सुनते थे और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करते थे। उनका जीवन एक प्रखर वक्ता, कवि, पत्रकार और दूरदर्शी राजनेता का रहा, जिन्होंने भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वे तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने और देश के विकास के लिए समर्पित रहे, जिसे उनकी शिक्षा, राजनीतिक करियर और भारत रत्न जैसे सम्मान से सम्मानित हुए। “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा” “काल के कपाल पर लिखता ही जाता हूं” और सच में उन्होंने जीवन भर राष्ट्र प्रेम और सेवा से लोगों को राष्ट्र सेवक संघ से जुड़कर अपनी सेवा भाव से निरंतर लोगों को कार्य करने के लिए प्रेरित किया अपना जीवन उन्होंने राष्ट्र के लिए समर्पित किया। “भारत रत्न”, “पद्म विभूषण”और सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिलने पर भी घमंड उन्हें छू भी नहीं पाया।
अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद का घमंड कभी नहीं आया, बल्कि वे अपनी विनम्रता, सिद्धांतों और देश के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे,अटल जी ने राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव ठुकरा दिया, 2002 में जब भाजपा ने उन्हें राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया, तो उन्होंने इसे यह कहते हुए ठुकरा दिया कि लोकप्रिय प्रधानमंत्री के लिए राष्ट्रपति बनना संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छी मिसाल नहीं होगी और वे ऐसे फैसले का समर्थन नहीं करेंगे। यह बहुत बड़ी मिशाल कायम की पद लोलुपता अटल जी को छू भी नहीं पाई। इन्होंने हमेशा जनता और राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत राष्ट्र को राजनीति से ऊपर रखना होता हैं जिसका अटल जी जीवंत उदाहरण रहे हैं। अटल बिहारी एक कवि थे जो सभी धर्मों और विचारों का सम्मान करते थे, उन्होंने 33 पार्टियों के गठबंधन वाली NDA सरकार को सफलतापूर्वक चलाया, जिससे यह साबित हुआ कि विभिन्न विचारधाराओं के लोग भी एक साथ मिलकर देश के लिए काम कर सकते हैं। बिहारी जी दूरदर्शी नेता के रूप में भी उभरे,उन्होंने भारत को एक मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखा, वे महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के समर्थक थे।
महिला सशक्तिकरण के समर्थक रहे,वे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के प्रबल समर्थक थे, जिसका असर उनकी नीतियों और विचारों में दिखता था।उन्होंने ‘साक्षरता और महिला साक्षरता’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों और जिलों को पुरस्कार (जैसे सर्व शिक्षा अभियान के तहत) दिए, जिससे महिला शिक्षा को प्रोत्साहन मिला अटल’ नाम के अनुरूप ही 1999 के कारगिल युद्ध और पोखरण परमाणु परीक्षणों के दौरान वे अडिग रहे, जो उनके ‘अटल’ नाम के अनुरूप था, और उन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
इन्होंने अपने विचारों से संदेश दिया कि खेल ही नहीं, दिल भी जीतिए’ जब 2004 के पाकिस्तान दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम को उन्होंने मैच जीतने के साथ-साथ पाकिस्तानी लोगों का दिल भी जीतना है का संदेश दिया, जिससे दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधर सकें। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उद्योग जगत के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना दूरसंचार क्रांति, निजीकरण और विनिवेश जैसी कई दूरदर्शी योजनाएँ शुरू कीं, जिन्होंने भारत के आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) और औद्योगिक प्रगति की नींव रखी, जैसे सड़कों का जाल बिछाकर, दूरसंचार शुल्क घटाकर और सरकारी कंपनियों में निजी भागीदारी बढ़ाकर देश का सर्वांगीण विकास में भागीदारी निभाई।
उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के द्वारा को सुगम किया, निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया, जिससे उद्योगों का विकास हुआ और रोजगार के नए मौके बने। अटल वन और ऑक्सी वन उनके नाम पर उनकी विरासत के रूप में पहल हुई। अटल जी ने पंच तत्वों की रक्षा, वन्य जीव के लिए जगह बनाई और इको सेंसेटिव जॉन जैसे क्षेत्रों की स्थापना के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा पर बल दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति निष्ठावान रहने और कार्यकर्ताओं को एक सेतु से जोड़ने का काम अटल बिहारी जी ने किया यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा की आज विश्व गुरु के रूप में अटल जी ने अपनी छवि बनाई।अटल बिहारी सबको साथ लेकर चलते थे सबका साथ सबका विकास उनकी इसी सोच से देश भर में वे लोकप्रिय थे और विपक्ष भी उनका सम्मान करता था। मैं आदि पुरुष निर्भयता का वरदान लिए आया भू पर सच में इनकी कविता की पंक्ति ही नहीं यह इन्होंने जीवंत किया अपने कार्यों से आज भी यह हम सबके दिलों में जीवित हैं और हमेशा रहेंगे।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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