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कोरोनाकाल में गैरसैंण पर राजनीति उफान पर

09/06/20
in उत्तराखंड, देहरादून
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उत्तराखंड समाचार
गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी पर राज्य की राजनीति उफान पर है। भाजपा प्रफुल्लित मुद्रा में है। भाजपा को लगता है कि उसने कांग्रेस पर बाजी मार ली है। जिस कांग्रेस ने गैरसैंण में राजधानी का तानाबाना बुना था, वह इसका लाभ नहीं ले पाई और भाजपा ने इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाकर बोनस अंक हासिल कर लिए। कांग्रेस भाजपा के इस निर्णय से चिंतित है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही कह चुके हैं कि गैरसैंण पर कोई निर्णय न लेकर उनकी सरकार ने गलती की है। अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि कांग्रेस गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाएगी। उत्तराखंड आंदोलन के नेता और उक्रांद के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी भाजपा के इस निर्णय को शहीदों, आंदोलनकारियों का अपमान और उत्तराखंड की जनता शोषण करार देते हैं। गैरसैंण स्थायी राजधानी के लिए देहरादून में महीनों से धरना प्रदर्शन कर रहे गैरसैंण राजधानी अभियान के मनोज ध्यानी कहते हैं कि आधी लड़ाई जीत ली है, आधी और बाकी है। गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी पर अलग-अलग दलों का यह अलग, अलग मत है।
भराड़ीसैण (गैरसैण) को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने की अधिसूचना जारी होने पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भराड़ीसैण को आदर्श पर्वतीय राजधानी का रूप दिया जाएगा। आने वाले समय में भराड़ीसैण सबसे सुन्दर राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाएगी। भराड़ीसैण (गैरसैण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए 4 मार्च 2020 को की गई घोषणा सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों की भावनाओं का सम्मान है। अब अधिसूचना लागू करने से भराड़ीसैण, गैरसैण आधिकारिक रूप से ग्रीष्मकालीन राजधानी हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के विजन डाक्यूमेंट में गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कही गई थी। क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसमें प्लानर और विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है। भराड़ीसैण (गैरसैण) में राजधानी के अनुरूप वहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। बड़े स्तर पर फाइलें न ले जानी पड़ी, इसके लिए ई-विधानसभा पर कार्य किया जा रहा है। इससे पेपरलैस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। पेयजल की सुचारू आपूर्ति के लिए रामगंगा पर चैरड़ा झील का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने के बाद भराड़ीसैण, गैरसैण और आसपास के क्षेत्र में ग्रेविटी पर जल उपलब्ध हो सकेगा।
गैरसैण की कनेक्टिविटी पर भी काम किया जा रहा है। भराड़ीसैण, गैरसैण को जोड़ने वाली सड़कों को आवश्यकतानुसार चैड़ा किया जाएगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। इसके पूरा होने पर रेल गैरसैण के काफी निकट तक पहुंच जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कहते हैं कि यदि गैरसैंण भराड़ीसैंण को सरकार ने ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित अधिसूचित किया है तो ग्रीष्मकाल में सरकार का कामकाज भी वहीं से शुरू करना होगा, यदि ऐसा नहीं किया जाता तो यह जनता के साथ धोखा होगा। उनका कहना है कि गैरसैंण भराड़ीसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का निर्णय लिया है, यह ठीक है, लेकिन भाजपा ने देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाने का निर्णय लिया है, अब स्थायी राजधानी कहां होगी?
दूसरी तरफ उत्तराखंड आंदोलन के नेता काशी सिंह ऐरी ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी अधिसूचित कर दिया है। हम इसका प्रतिकार करते हैंए तेरह जिलों के एक छोटे राज्यए जिसके पास आज इतने भी संसाधन नहीं है कि वह समय पर अपने कर्मचारियों को वेतन दे पायेए उस पर दो.दो राजधानियां थोप दी जा रही हैं। यह उत्तराखण्ड के शहीदों और आन्दोलनकारियों का अपमान है और उत्तराखण्ड की जनता का शोषण। भाजपा की तत्कालीन केन्द्र सरकार ने राजधानी के मुद्दे उत्तराखण्ड की जनता ने उस समय भी छल किया थाए उत्तराखण्ड राज्य के विधेयक में राजधानी का क्लाज जानबूझकर डाला ही नहीं गया थाए दूसरा छल आज की प्रदेश सरकार कर रही है।
उत्तराखण्ड की प्रस्तावित राजधानी निर्विवाद रुप से गैरसैंण थीए पहले तो इसे धोखे से देहरादून में अस्थाई बना दिया गयाए फिर तत्कालीन भाजपा की अनन्तिम सरकार ने उसे एक आयोग को सौंप दियाए आयोग को उसके बाद आई कांग्रेस की सरकार भी पोसती रही फिर उसकी रिपोर्ट भी भाजपा की ही सरकार के समय में विधान सभा में रखी गई, जिस पर आज तक सदन में बहस नहीं कराई गई है और आज फिर से ग्रीष्मकालीन राजधानी का झुनझुना पकड़ाया जा रहा है।
यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जायेगा, उत्तराखण्ड क्रान्ति दल इसका पुरजोर विरोध करता है और जनता के साथ मिलकर हम फिर से आन्दोलन करेंगे और उत्तराखण्ड की जनता की भावना के अनुरुप गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाकर ही दम लेंगे।

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