• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में हजारों हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट पर अवैध कब्जा

17/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
6
SHARES
7
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

 

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड जिसे देवभूमि और हरियाली से भरपूर पहाड़ी राज्य के रूप में जाना जाता है, आज अपने ही जंगलों को बचाने की जंग लड़ रहा है. राज्य के रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्रों पर बढ़ते अवैध कब्जे न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बनते जा रहे हैं, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि समस्या कितनी गहरी है और उससे निपटने की रफ्तार कितनी धीमी. वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 11 हजार 396.63 हेक्टेयर से अधिक रिजर्व फॉरेस्ट भूमि पर अतिक्रमण हुआ है. इनमें से अभी भी करीब 9 हजार 836 हेक्टेयर क्षेत्र पर अवैध कब्जा बरकरार है. यानी कि बीते वर्षों में चलाए गए अभियानों के बावजूद 70 प्रतिशत से अधिक जंगल अब भी अतिक्रमण की जद में हैं. यह स्थिति तब है जब पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार और वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने के लिए कई अभियान चलाए. इन अभियानों के तहत कुल 1 हजार 560.31 हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है. लेकिन इस आंकड़े को कुल अवैध कब्जे के अनुपात में देखें तो यह बेहद कम है, जो यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही है. यह आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में भी कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही है. हालांकि, यह भी नहीं है कि वन विभाग की तरफ से इसके लिए प्रयास नहीं किए गए हो, लेकिन तमाम क्षेत्रों में इन मामलों के न्यायालय पहुंचने से अधिकारियों की अतिक्रमण को हटाने की रफ्तार में कमी आई है. देहरादून जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की इतनी धीमी गति चिंता का विषय है. यह न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि शहरीकरण के दबाव को भी उजागर करता है. अतिक्रमण हटाने में सबसे बड़ी अड़चन कोर्ट में लंबित मामले हैं. कई मामलों में कब्जाधारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया हुआ है, जिसके चलते वन विभाग सीधे कार्रवाई नहीं कर पा रहा है. इन आंकड़ों ने वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. यह आरोप लग रहे हैं कि विभाग लंबे समय तक अतिक्रमण पर आंखें मूंदे रहा, जिसके कारण समस्या इतनी विकराल हो गई.स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायतें आती रही हैं कि कई मामलों में प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत के कारण अतिक्रमण को समय रहते नहीं रोका गया. अगर शुरुआती स्तर पर सख्त कदम उठाए जाते, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. उत्तराखंड में हजारों हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट पर अवैध कब्जे बड़ी मुसीबत बने हुए हैं. स्थिति ये है कि करीब 4 सालों से चल रहे अभियान के बावजूद 80 प्रतिशत से भी ज्यादा जंगल अवैध कब्जे की जद में बने हुए हैं. उधर, इस मामले में कुमाऊं का तराई डिवीजन सबसे खराब स्थिति में है. यही नहीं, कई मामलों के न्यायालय में जाने से महकमे की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ी हुई हैं. अवैध अतिक्रमण का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है. इसका सीधा प्रभाव पर्यावरण और वन्यजीवों पर भी पड़ता है. जंगलों के कटने से जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) को नुकसान होता है. साथ ही वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास खत्म होता है. जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है. बात यही तक नहीं है, इससे जल स्रोतों और जलवायु संतुलन पर असर पड़ता है.स्थिति को देखते हुए केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा. इसके लिए बहु-स्तरीय रणनीति की जरूरत है. कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी लानी भी जरूरी होगी. साथ ही कोर्ट में लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष प्रयास होने चाहिए.एआई सिस्टम को जमीनी स्तर तक लागू किया जा रहा है. इस तरह टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए अतिक्रमण हटाने में मदद मिलेगी. हालांकि, इसमें ग्राम स्तर पर वन संरक्षण समितियों को सक्रिय किया जाना भी जरूरी है, ताकि ग्रामीण स्तर पर भी इस पर नजर रखी जा सके.इसमें सबसे महत्वपूर्ण जवाब देही तय करना भी है, ताकि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके. इस दौरान लोगों को जंगलों के महत्व और अतिक्रमण के नुकसान के बारे में जागरूक भी किए जाने का प्लान है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था, “हमें जो बात सबसे अधिक चौंकाने वाली लगती है, वह यह है कि उत्तराखंड राज्य और उसके अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं, जबकि उनकी आंखों के सामने वन भूमि पर सुनियोजित रूप से कब्जा किया जा रहा है। इसलिए, हम स्वतः संज्ञान लेते हुए इन कार्यवाही के दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उत्तराखंड सरकार ने वन भूमि पर सुनियोजित रूप से कब्जा करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ केवल औपचारिक कार्रवाई की है।”लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share2SendTweet2
Previous Post

मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग की मास्टर प्लान पुस्तिका का किया विमोचन

Next Post

डोईवाला: क्षेत्र पंचायत की बैठक में गूंजे जनसमस्याओं के मुद्दे

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: क्षेत्र पंचायत की बैठक में गूंजे जनसमस्याओं के मुद्दे

April 17, 2026
24
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग की मास्टर प्लान पुस्तिका का किया विमोचन

April 17, 2026
5
उत्तराखंड

सीएम हेल्पलाइन 1905 पर लंबित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए – मुख्यमंत्री

April 17, 2026
4
उत्तराखंड

रक्तदान शिविर में 87 स्वयंम सेवकों ने 87 यूनिट रक्त दान कर अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया

April 17, 2026
8
उत्तराखंड

ग्रामीण श्रमिकों को भुगतना नही किए जाने पर 4 मई से आंदोलन करने की चेतावनी

April 17, 2026
10
उत्तराखंड

देहरादून एयरपोर्ट पर अग्निशमन सेवा सप्ताह के तहत उपकरणों का प्रदर्शन

April 17, 2026
20

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67671 shares
    Share 27068 Tweet 16918
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38050 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37328 shares
    Share 14931 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: क्षेत्र पंचायत की बैठक में गूंजे जनसमस्याओं के मुद्दे

April 17, 2026

उत्तराखंड में हजारों हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट पर अवैध कब्जा

April 17, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.