
कमल बिष्ट/उत्तराखण्ड समाचार।
लैंसडाउन। प्रकृति के प्रति प्रेम, सेवा और संरक्षण की भावना को साकार करते हुए संत निरंकारी मिशन द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर लैंसडाउन में आयोजित विशेष पर्यावरण जागरूकता एवं सेवा अभियान अत्यंत उत्साह एवं समर्पण के साथ सम्पन्न हुआ। यद्यपि प्रातःकाल से ही क्षेत्र में भारी मूसलाधार वर्षा हो रही थी, जिसके कारण छावनी परिषद परिसर में प्रस्तावित कार्यक्रम पूर्ण रूप से आयोजित नहीं हो सका, तथापि संतों एवं स्वयंसेवकों के उत्साह, सेवा भावना और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प में कोई कमी नहीं आई।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से आयोजित इस अभियान में जयहरीखाल, मटियाली, कोटद्वार एवं हल्दूखाता सहित आसपास की शाखाओं से 200 से अधिक श्रद्धालु, सेवादल सदस्य एवं संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन (SNCF) के स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में लैंसडाउन पहुँचने लगे और प्रतिकूल मौसम के बावजूद पर्यावरण संरक्षण के इस पुनीत अभियान में सहभागी बने।
कार्यक्रम में क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक एवं मुख्य अतिथि महंत दिलीप सिंह रावत जी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संत निरंकारी मिशन द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपना योगदान देना चाहिए।
इस अवसर पर उपस्थित संतों एवं स्वयंसेवकों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए यह संदेश दिया कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि ईश्वर की अमूल्य देन है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक मानव का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है। वर्षा के कारण कार्यक्रम की कुछ गतिविधियाँ प्रभावित अवश्य हुईं, किन्तु सेवा और जागरूकता का संदेश उपस्थित जनसमूह तक प्रभावी रूप से पहुँचाया गया।
संत निरंकारी मिशन सदैव मानवता की सेवा को ही सच्ची भक्ति मानते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन हेतु कार्यरत रहा है। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, वृक्षारोपण, रक्तदान एवं अन्य जनकल्याणकारी अभियानों के माध्यम से मिशन निरंतर यह संदेश देता रहा है कि आध्यात्मिकता तभी सार्थक है जब वह मानवता और प्रकृति के कल्याण से जुड़कर व्यवहार में उतरे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह अभियान एक बार पुनः इस सत्य को प्रमाणित करता है कि जब सेवा, श्रद्धा और संकल्प एक साथ जुड़ते हैं, तब विपरीत परिस्थितियाँ भी जनकल्याण के मार्ग में बाधा नहीं बन पातीं।











