• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

अपनी शायरी में दर्द का सैलाब दर्शा गए मीर

04/02/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
7
SHARES
9
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
मोहम्मद मीर उर्फ मीर तकी ‘मीर’ उर्दू एवं फारसी भाषा के महान शायर थे। मीर का जन्म आगरा में हुआ था। उनका बचपन अपने पिता की देखरेख में बीता। उनके जीवन में प्यार और करुणा के महत्व के प्रति नजरिये का, मीर के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसकी झलक उनके शेरों में भी देखने को मिलती है। पिता के मरणोपरांत क्क् की आयु में वे आगरा छोड़कर दिल्ली आ गए। दिल्ली आकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और शाही शायर बन गये। अहमद शाह अब्दाली के दिल्ली पर हमले के बाद वह अशफ-उद-दुलाह के दरबार में लखनऊ चले गये। अपनी जि़न्दगी के बाकी दिन उन्होंने लखनऊ में ही गुजारे। अहमद शाह अब्दाली और नादिरशाह के हमलों से कटी-फटी दिल्ली को मीर तकी मीर ने अपनी आंखों से देखा था। इस त्रासदी की व्यथा उनके कलामों में दिखती है, अपनी गजलों के बारे में एक जगह उन्होंने कहा था
हमको शायर न कहो मीर कि साहिब हमने
दर्दो गम कितने किए जमा तो दीवान किया
उनकी विरासत उर्दू अदब
3 फरवरी को साहित्यकार, उर्दू साहित्य के महानतम शायर मीर तकी मीर (1723–1810) का जन्मदिन मनाया जाता है।मीर तकी मीर सिर्फ़ ग़ज़ल के शायर नहीं थे, वे अपने समय की टूटी हुई रूह की आवाज़ थे।मीर उर्दू ग़ज़ल को शिखर तक पहुँचाने वाले बड़े कवि थे। पाठकों को बताता चलूं कि उन्हें ‘ख़ुदा-ए-सुख़न’ यानी कि शायरी का ख़ुदा/भगवान् कहा जाता है। उनकी शायरी में दर्द, मोहब्बत, तन्हाई और मानवीय संवेदना गहराई से झलकती है।उर्दू ही नहीं फ़ारसी भाषा पर भी उनकी मज़बूत पकड़ थी। मीर को उर्दू के उस प्रचलन के लिए याद किया जाता है जिसमें फ़ारसी और हिन्दुस्तानी के शब्दों का अच्छा मिश्रण और सामञ्जस्य हो। विकीपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका जन्म आगरा में तथा मृत्यु लखनऊ में हुई।मीर तक़ी मीर को उर्दू में शेर कहने का प्रोत्साहन अमरोहा के सैयद सआदत अली ने दिया। पाठकों को बताता चलूं कि उनका मूल नाम मोहम्मद तकी था।उनकी प्रमुख कृतियों की यदि हम यहां पर बात करें तो इनमें क्रमशः ज़िक्र-ए-मीर (आत्मकथा), कुल्लीयते-मीर (उर्दु रचनाओं के छह दीवानों का संग्रह), कुल्लीयते-फ़ारसी (फ़ारसी रचनाओं का संग्रह), फ़ैज़-ए-मीर (पाँच कहानियों का संग्रह), नुकत-उस-शूरा (फ़ारसी ज़बान में लिखी तत्कालीन उर्दु रचनाकारों की जीवनियाँ) आदि को शामिल किया जाता है। वैसे,वे ‘दर्द के शायर’ कहलाते हैं। दरअसल, मीर की ज़िंदगी मुफ़लिसी (गरीबी), अपनों को खोने के गम और दिल्ली की बर्बादी को देखने में गुजरी। यही वजह है कि उनकी शायरी में ‘हूक’ और ‘टीस’ महसूस होती है। उन्होंने खुद एकबार यह कहा था-‘मुझको शायर न कहो मीर कि साहब मैंने, कितने ग़म जमा किए तो दीवान किया।’ कहना ग़लत नहीं होगा कि दिल्ली के उजड़ने, परिवार की मौतों, गरीबी और बेघर होने ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था। उनकी शायरी दरअसल आत्मकथा की पंक्तियाँ हैं। उनकी यह पंक्ति देखिए-‘पत्थर की भीत क्या करूँ, आँसू जो ढल गए।’ पाठकों को बताता चलूं कि नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली के हमलों के बाद दिल्ली उजड़ चुकी थी।मीर ने दिल्ली छोड़कर लखनऊ जाना तो स्वीकार किया, लेकिन वे वहाँ दिल से कभी बस नहीं पाए।मीर की सबसे बड़ी खूबी उनकी भाषा थी। वास्तव में, वे बहुत ही आसान शब्दों में दिल की गहरी बात कह देते थे। इसे तकनीकी भाषा में ‘सह़ल-ए-मुमत़ना’ कहा जाता है-यानी ऐसी चीज़ जो देखने में आसान लगे, पर उसे दोबारा लिखना नामुमकिन हो।महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब भी उनके कायल थे।सच तो यह है कि ग़ालिब ने मीर को अपना उस्ताद माना। ग़ालिब जैसे आत्मविश्वासी शायर ने कहा-‘ रेख़्ते के तुम ही उस्ताद नहीं हो ग़ालिब,कहते हैं अगले ज़माने में कोई मीर भी था।’ वास्तव में यह मीर की श्रेष्ठता की सबसे बड़ी गवाही है। मोहब्बत की कैफियत को बयां करते हुए उन्होंने कहा था-‘इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या।’ ‘हस्ती अपनी हबाब की सी है, ये नुमाइश सराब की सी है।’,’नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिए, पंखुड़ी एक गुलाब की सी है।’,’मीर उन नीम-बाज़ आँखों में, सारी मस्ती शराब की सी है।’ उनकी कुछ अमर पंक्तियों में से एक हैं। आत्मस्वीकृति के बारे में एक बार उन्होंने कहा था -‘शायर मुझमें और भी हैं, पर मीर का मुक़ाबला कौन करे।’ अंत में यही कहूंगा कि मीर सिर्फ़ उर्दू ग़ज़ल के शायर ही नहीं, बल्कि अपने समय के टूटे हुए समाज, उजड़ती दिल्ली और बिखरते इंसान की संवेदनाओं के सच्चे दस्तावेज़ हैं। उनकी शायरी में बनावटी सौंदर्य नजर नहीं आता है। वास्तव में उनकी शायरी जीवन के गहरे ज़ख़्मों से निकली हुई सच्चाई है। अपने जीवन में निजी दुख, मानसिक पीड़ा, गरीबी और उपेक्षा के बावजूद मीर ने उर्दू और फ़ारसी भाषा को आम आदमी के दिल तक पहुँचाया और ग़ज़ल को आत्मा की आवाज़ बना दिया। उनका दर्द रचना है। अन्य शायरों की तरह वे कभी शोर नहीं करते, बल्कि रचनाओं में फुसफुसाते हैं और उनकी वही फुसफुसाहट सदियों बाद भी पाठकों के दिल में उतर जाती है
मीर की गजलों के कुल म् दीवान हैं। इनमें से कई शेर ऐसे हैं जो मीर के हैं या नहीं इस पर विवाद है। इसके अलावा कई शेर या कसीदे ऐसे हैं जो किसी और के संकलन में हैं पर ऐसा मानने वालों की कमी नहीं कि वे मीर के हैं। शेरों (अरबी में अशआर) की संख्या कुल क्भ्000 है। इसके अलावा कुल्लियात-ए-मीर में दर्जनों मसनवियां (स्तुतिगान), क़सीदे, वासोख्त और मर्सिये संकलित हैं। विविध उर्दु के महानतम शायरों में से एक। उर्दु भाषा स्वरूप को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मूल नाम मोहम्मद तकी। ‘शायरी के ख़ुदा’ के तौर पर मीर को याद किया जाता है।
बात क्या आदमी की बन आई
आस्मां से जमीन नपवाई
चरख जन उसके वास्ते है मदाम
हो गया दिन तमाम रात आई
माह-ओ-ख़ुर्शीद-ओ-बाद सभी
उसकी खातिर हुए हैं सौदाई
कैसे-कैसे किये तरद्दद जब
रंग-रंग उसको चीज पहुंचाई
उसको तरजीह सबके ऊपर दे
लुत्फ-ए-हक ने की इज्जत अफजाई
हैरत आती है उसकी बातें देख
ख़ुद सरी ख़ुद सताई ख़ुदराई
शुक्र के सज्दों में ये वाजिब था
ये भी करता सदा जबीं साई
सो तो उसकी तबीयत-ए-सरकश
सर न लाई फरों के टुक लाई
‘मीर’ नाचीज मुश्त-ए-खाक अल्लाह
उनने ये किबरिया कहां पाई
इसलिए मीर को पढ़ना सिर्फ़ साहित्य का अनुभव नहीं, बल्कि इंसान होने का अनुभव है।जन्मजयंती के उपलक्ष्य में उन्हें शत शत नमन!लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

Share3SendTweet2
Previous Post

धामी सरकार ने प्रति माह औसत 518 युवाओं को दी सरकारी नौकरी

Next Post

बजट में, बाजरे एमएसपी पर चुप्पी, अन्नश्री कहे गए बाजरे का तो जिक्र तक नहीं

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खटीमा भ्रमण के दौरान कैंप कार्यालय लोहियाहेड में जनप्रतिनिधियों व जनता से मुलाकात कर जनसमस्याएं सुनी

February 8, 2026
5
उत्तराखंड

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अधीनस्थ कई स्थानों पर उपेक्षित पड़े मंदिरों का भी कायाकल्प होना जरूरी

February 8, 2026
7
उत्तराखंड

जल को बचाना है तो हमें अपनी परंपराओं की ओर लौटना होगा

February 8, 2026
4
उत्तराखंड

वेद उनियाल विचार मंच के तत्वाधान से चतुर्थ उत्कृष्ट सम्मान समारोह2026

February 8, 2026
7
उत्तराखंड

राजभवन घेराव को ऐतिहासिक बनाने में जुटी कांग्रेस

February 8, 2026
33
उत्तराखंड

अनुशासन, आत्मविश्वास व नियमित अभ्यास ही सफलता की कुंजी: अग्रवाल

February 8, 2026
9

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67641 shares
    Share 27056 Tweet 16910
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45771 shares
    Share 18308 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38042 shares
    Share 15217 Tweet 9511
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37432 shares
    Share 14973 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37316 shares
    Share 14926 Tweet 9329

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खटीमा भ्रमण के दौरान कैंप कार्यालय लोहियाहेड में जनप्रतिनिधियों व जनता से मुलाकात कर जनसमस्याएं सुनी

February 8, 2026

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अधीनस्थ कई स्थानों पर उपेक्षित पड़े मंदिरों का भी कायाकल्प होना जरूरी

February 8, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.