डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
सरोवर नगरी नैनीताल की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण सूखाताल झील, जिसे भविष्य में शहर के एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी, आज बदहाली, गंदगी और अव्यवस्थाओं की वजह से अपनी पहचान खोती नजर आ रही है. करोड़ों रुपये की लागत से झील के सौंदर्यीकरण और पुनर्जीवन का कार्य कराया गया, लेकिन मौजूदा हालात इस परियोजना की तस्वीर पर सवाल खड़े कर रहे हैं. झील क्षेत्र में फैली गंदगी, टूटे हुए वॉकिंग ट्रैक, खराब लाइटें, अवैध पार्किंग और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतों ने इस महत्वपूर्ण धरोहर की स्थिति को चिंताजनक बना दिया है. अब इस मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है.प्राधिकरण की ओर से झील और आसपास के क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया, जिसके बाद नगर पालिका और संबंधित विभागों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए पत्र जारी किया गया है. निरीक्षण के दौरान झील के किनारों पर प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्री के रैपर और अन्य कचरा बिखरा मिला. इसके अलावा वॉकिंग ट्रैक की बदहाल स्थिति, पार्किंग की व्यवस्था होने के बावजूद ट्रैक और आसपास अवैध रूप से खड़े वाहन, लंबे समय से खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटें और सार्वजनिक स्थानों पर असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आईं हैं. इन सभी अव्यवस्थाओं को झील के संरक्षण और पर्यटन की दृष्टि से गंभीर माना गया है. उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव ने कहा कि सूखाताल झील केवल नैनीताल ही नहीं, बल्कि वैश्विक विरासत और पर्यावरणीय महत्व की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका को पत्र भेजकर झील के संरक्षण और समुचित रखरखाव के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है. पत्र में झील क्षेत्र की व्यापक सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था, वैज्ञानिक तरीके से झील के पुनर्जीवन, अवैध पार्किंग हटाने, खराब लाइटों की मरम्मत, सार्वजनिक शौचालयों की समुचित व्यवस्था और नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित करने की मांग की गई है.प्राधिकरण ने केवल सूखाताल झील ही नहीं, बल्कि नैना पीक मार्ग पर पाई गई अनियमितताओं और नैनी झील के चारों ओर हो रहे कथित अवैध निर्माणों पर भी संज्ञान लेने की बात कही है. रही सूखाताल झील आज उपेक्षा, प्रदूषण और प्रशासनिक शिथिलता का शिकार बनकर रह गई है. इस संबंध में नगर पालिका परिषद, नैनीताल के अधिशासी अधिकारी को एक विस्तृत पत्र भेजकर झील की गरिमा को पुनर्स्थापित करने और इसके लिए जिम्मेदार उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है.पत्र में कहा है कि झील के भौतिक निरीक्षण के दौरान यहां सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई गईं. झील के चारों ओर बने वॉकिंग ट्रैक पर प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्रियों के रैपर और अन्य अजैविक कचरा बिखरा हुआ पाया गया है, जो यहां नियमित सफाई और प्रभावी निगरानी के अभाव को दर्शाता है. इसके अतिरिक्त, वॉकिंग ट्रैक पर लगाई गई अधिकांश लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे सूर्यास्त के बाद पूरा क्षेत्र अंधकारमय हो जाता है. इस स्थिति का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों द्वारा वहां शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है, जिससे स्थानीय परिवारों, महिलाओं और बच्चों में असुरक्षा का माहौल है. साथ ही, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध पार्किंग और खुले में शौच की चिंताजनक घटनाएं भी सामने आई हैं.इस पर्यावरणीय संकट में एक और गंभीर पहलू पेयजल की बर्बादी का है. निरीक्षण में पाया गया कि झील के चारों ओर स्थित जलापूर्ति पाइपलाइनों से निरंतर पानी का भारी रिसाव (लीकेज) हो रहा है, जिससे एक तरफ अमूल्य पेयजल व्यर्थ बह रहा है, तो दूसरी तरफ झील का मूल ढांचा प्रभावित हो रहा है. इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को होने वाली असुविधा को देखते हुए यह साफ हो गया है कि जनता के टैक्स के पैसे से निर्मित सार्वजनिक संपत्तियों की देखरेख में घोर लापरवाही बरती जा रही है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है.इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए प्राधिकरण ने स्थानीय प्रशासन को त्वरित और समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए 10 सूत्रीय कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इसके तहत सूखाताल झील और वॉकिंग ट्रैक की नियमित सफाई, कचरा हटाना, पाइपलाइन के रिसाव को तुरंत ठीक करना, बंद लाइटों को चालू करना और अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाकर पुलिस गश्त बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं. प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि नगर पालिका अपने वैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रहती है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इस मामले में कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.त्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (यूकेएसएलएसए) के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने नैनीताल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखकर सूखाताल झील की दुर्दशा से अवगत कराया है. साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि नगर पालिका सूखाताल की स्वच्छता नहीं कर पा रही है, तो राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित करे ताकि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अपने प्रयासों से सुखाताल की सफाई व रख रखाव की व्यवस्था कर सके.पत्रकारों से वार्ता में सूखाताल की बदहाल स्थिति की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार सूखाताल क्षेत्र का भ्रमण किया और हर बार वहां अत्यंत खराब स्थिति देखी.उन्होंने नैनीताल की सूखाताल झील की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर बेहद गंभीर और कड़ा रुख अपनाया है. उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारी व सालसा के सदस्य सचिव ने कहा है कि कभी नैनीताल की प्राकृतिक धरोहर, पर्यावरणीय संपदा और नगर के गौरव का प्रतीक रही सूखाताल झील आज उपेक्षा, प्रदूषण और प्रशासनिक शिथिलता का शिकार बनकर रह गई है. इस संबंध में नगर पालिका परिषद, नैनीताल के अधिशासी अधिकारी को एक विस्तृत पत्र भेजकर झील की गरिमा को पुनर्स्थापित करने और इसके लिए जिम्मेदार उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है.पत्र में कहा है कि झील के भौतिक निरीक्षण के दौरान यहां सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई गईं. झील के चारों ओर बने वॉकिंग ट्रैक पर प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्रियों के रैपर और अन्य अजैविक कचरा बिखरा हुआ पाया गया है, जो यहां नियमित सफाई और प्रभावी निगरानी के अभाव को दर्शाता है. इसके अतिरिक्त, वॉकिंग ट्रैक पर लगाई गई अधिकांश लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे सूर्यास्त के बाद पूरा क्षेत्र अंधकारमय हो जाता है. इस स्थिति का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों द्वारा वहां शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है, जिससे स्थानीय परिवारों, महिलाओं और बच्चों में असुरक्षा का माहौल है. साथ ही, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध पार्किंग और खुले में शौच की चिंताजनक घटनाएं भी सामने आई हैं.इस पर्यावरणीय संकट में एक और गंभीर पहलू पेयजल की बर्बादी का है. निरीक्षण में पाया गया कि झील के चारों ओर स्थित जलापूर्ति पाइपलाइनों से निरंतर पानी का भारी रिसाव (लीकेज) हो रहा है, जिससे एक तरफ अमूल्य पेयजल व्यर्थ बह रहा है, तो दूसरी तरफ झील का मूल ढांचा प्रभावित हो रहा है. इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को होने वाली असुविधा को देखते हुए यह साफ हो गया है कि जनता के टैक्स के पैसे से निर्मित सार्वजनिक संपत्तियों की देखरेख में घोर लापरवाही बरती जा रही है सूखाताल झील में वह क्षमता है कि भविष्य में इसे नैनी झील की तरह एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. यदि झील का सही तरीके से संरक्षण और प्रबंधन किया जाए, तो यह नैनीताल के पर्यटन को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नगर पालिका और संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संयुक्त रूप से झील संरक्षण के लिए आवश्यक पहल करेंगे.ऐसे में आने वाले दिनों में नैनीताल की पर्यावरणीय और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं पर प्रशासन की जवाबदेही और निगरानी दोनों बढ़ सकती हैं. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











