हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
चमोली जनपद के थराली में एक लाख से अधिक की लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भेले ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नही हो पा रही हैं किंतु यह चिकित्सालय आवार कुत्तों की ऐस गाह जरूर बनता जा रहा है, बुधवार को इस चिकित्सा में कुछ ऐसा ही देखने को मिला अस्पताल भवन के पहली मंजिल में एक लावसीर एक कुत्ता आराम फरमाता दिखाई दिया कोई भी इस कुत्ते को खदेड़ता तक नही दिखाई दिया। ऐसे में इस चिकित्सा की व्यवस्था का अनुमान लगाया जा सकता हैं।
पिंडर घाटी के थराली, देवाल और नारायणबगड़ विकासखंड के लोगों के लिए बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए सरकार के द्वारा थराली में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की थी किंतु आज तक भी इस केंद्र से क्षेत्र के तीनों विकास खंडों के लोगों को अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध नही हो पा रही हैं जिस कारण यहां के लोप्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां लोगों को कुमाऊं के बैजनाथ, बागेश्वर, अल्मोड़ा, हल्द्वानी के साथ ही गढ़वाल के कर्णप्रयाग, श्रीनगर, ऋषिकेश, देहरादून आदि स्थानों पर बेतहाशा समय एवं धनराशि खर्च कर जाने, आने पर मजबूर होना पड़ रहा हैं। इस चिकित्सा केंद्र में वर्तमान में कमरों की कोई कमी तो नही है किंतु अल्ट्रासाउंड जैसी बेसीक मशीन के अभाव में लोग भटकने पर मजबूर हैं अन्य मशीनें तों अभी दूर की कोड़ी बने हुए हैं। इस अस्पताल में प्रति दिन फिर भी दूरदराज के दर्जनों लोगों एवं उनके तीमारदार अस्पताल पहुंचे हैं,ऐसे अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जानवरों की मौजूदगी लोगों की सुरक्षा के प्रति काफी अधिक गंभीर बन जाती हैं। लोगों का मानना हैं कि गर्मियों एवं बरसात के इन दिनों अवारा कुत्ते के अस्पताल परिसर एवं पहले मंजिल में आराम फरमा लोगों में संक्रमण फैलने सहित अन्य खतरे पैदा कर सकता हैं, अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, सुरक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की हैं , किंतु कुत्ते के खुले आम अस्पताल में लेटना जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने से कम नहीं हैं, इस गंभीर लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार हैं, कोई बता भी पाएगा या नही।
सूत्रों की मानें तों यह अ कुत्ता अस्पताल के ही किसी कर्मचारी का बताया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि ऐसा है तो यह भी जांच का विषय है कि अस्पताल परिसर में कुत्ते के प्रवेश की अनुमति कैसे मिली और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) चमोली डॉ. अभिषेक गुप्ता ने कहा कि अस्पताल के अंदर कुत्ता कैसे पहुंचा, इसकी जांच कराई जाएगी। अस्पताल प्रबंधन से पूरे मामले में स्पष्टीकरण लिया जाएगा तथा यह भी पता लगाया जाएगा कि कुत्ता किसका है। उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में किसी भी जानवर का प्रवेश चिंता का विषय है।इसे किसी कीमत पर स्वीकार नही किया जा सकता हैं।











