डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। नगर पालिका परिषद, डोईवाला द्वारा शहर की कूड़ा उठान व्यवस्था एक निजी कंपनी को सौंपे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। व्यवस्था संभालने के शुरुआती दौर में ही कंपनी पर पर्यावरण मित्रों के वेतन में कटौती करने के आरोप लगे हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
बुधवार को विरोध स्वरूप पर्यावरण मित्रों ने हड़ताल शुरू कर दी है, जिसके चलते शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। जानकारी के अनुसार, इससे पहले नगर पालिका स्वयं कूड़ा उठान और सफाई व्यवस्था का संचालन करती थी। हाल ही में यह कार्य एक निजी कंपनी को सौंपा गया। कंपनी का कामकाज शुरू होने के कुछ ही समय बाद वेतन संबंधी विवाद सामने आ गया।
पर्यावरण मित्रों का आरोप है कि विभिन्न कारणों का हवाला देकर उनके वेतन में कटौती की गई है, जिससे उनके आर्थिक हित प्रभावित हुए हैं। वेतन कटौती से नाराज कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि पहले से सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना कठिन है, ऐसे में वेतन में कटौती किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पर्यावरण मित्रों द्वारा कार्य बहिष्कार कर हड़ताल करने के चलते बुधवार को घर-घर कूड़ा संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था प्रभावित हुई। यदि स्थिति जल्द नहीं सुलझी तो शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कूड़े के ढेर लगने की आशंका है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निजीकरण के बाद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद थी। लेकिन शुरुआत में ही कर्मचारियों और कंपनी के बीच विवाद सामने आने से सफाई व्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले का समाधान निकालने की मांग की है।
कंपनी प्रबंधन के अनुसार, अप्रैल माह से लागू नए सरकारी आदेशों के अनुरूप सभी कर्मियों को वेतन का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था के वैकल्पिक संचालन की व्यवस्था की जा रही है तथा बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी एमएल शाह ने बताया कि पालिका प्रशासन अब इस मामले में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता, क्योंकि संबंधित कर्मी पालिका के नहीं बल्कि कंपनी के अधीन कार्यरत हैं। टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कंपनी को कार्य सौंपा गया है। हालांकि, कंपनी प्रबंधन को समस्या का शीघ्र समाधान कर व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।











