• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

किसानों की आय दोगुना करने का सपना, सपना ही रह गया

जंगली जानवर लगा रहे किसानों की मेहनत पर पलीता

28/03/22
in उत्तराखंड, चमोली
Reading Time: 1min read
192
SHARES
240
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

थराली से हरेंद्र बिष्ट।
तो क्या इस समस्या के निराकरण के बगैर ही उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की आय दुगनी हो जाएगी? लगातार हो रहा पलायन रूक जाएगा? खेती आधारित रोजगार के नए-नए अवसर खुलेंगे आदि, सरकारी दावे धरातल पर उतर पाएंगे? यहां के किसानों, बेरोजगारों, महिलाओं को जो सपने दिखाए जा रहे हैं, वे सपने हकीकत में लगातार दूर होते जा रहे हैं। हालांकि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के गांव की मिट्टी बेहद उपजाऊ है। यहां पर तमाम तरह की फसलों, फल, फूलों के साथ ही महेंगी से महंगी जडीबूटी का उत्पादन तो होता हैं। किन्तु तमाम तरह के जंगली जानवर एक झटके में किसानों की महिनों की मेहनत पर इस कदर पानी फेर देते हैं कि किसानों से कुछ भी कहते नहीं बन पाता है।

दरअसल सरकार के द्वारा कृषि क्षेत्र में किसानों की आय दुगनी करने के साथ ही इस राज्य के पहाड़ी जिलों के गांव से पलायन रोकने के लिए कृषि आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग, उद्यान विभाग, जड़ी बूटी, कृषि विज्ञान केन्द्रों के साथ ही कई अन्य विभागों को जिम्मेदार सौपी गई हैं। जोकि अपने संसाधनों के अनुरूप कार्य करते हुए उत्पादनों को बढ़ाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं और वैज्ञानिक पद्धति से कृषिकरण करने से उत्पादन बढ़ भी रहा है। परंतु पिछले दो.तीन दशकों से यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली सूअरों, हिरनों, बारहसिंगों सहित अन्य जानवरों के साथ ही बंदरों, लंगूरों की तादाद में तेजी के साथ भारी इजाफा हो जाने का खामियाजा यहां के किसानों को भुगतान पड़ रहा हैं।

किसान खेतों को खाद्.पानी कर इन में जुताई, बुवाई कर जरूरत के अनुरूप कड़ी मेहनत के साथ गुड़ाई, निराई करता है। यही नहीं फसलों की सुरक्षा को लेकर दिन तों छोड़िए रात रात जाग कर चौकीदारी करते हैं किन्तु गलती से भी थोड़ी सी चूक होने पर एक झटके में जंगली जानवर लहलहाती फसल को इस तरह से नष्ट कर देते हैं कि किसन परिवारों की महिनों की कड़ी मेहनत पर चंद समय में ही पानी फिर जाता हैं और किसान अपने इस दुखड़े को किसी के पास सुना तक नही पाता है। जंगली जानवरों के कारण ही पहाड़ी जिलों के किसानों की आय तों दुगनी नही हो पायी हैं उलटे तेजी के साथ खेत बंजर खेतों के रूप में तब्दील होते दिखाई पड़ रहे हैं। अकेल बात कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले पिंडर घाटी की जाएं तों यहां के 80 प्रतिशत से अधिक गांवों में तेजी के साथ जंगली जानवरों का खेतों पर आतंक बढ़ता जा रहा है। जिस कारण तेजी के साथ आबाद खेती बंजर में तब्दील होती जा रही है। और कृषि उत्पादन तेजी के साथ घट रहा है। किंतु इससे निपटने के लिए सरकार अब तक कोई भी कारगर योजना को धरातल पर नही उतार पाई है। जिससे आशंका जताई जा रही है कि जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक के चलते वह दिन दूर नहीं जब पिंडर घाटी के तीन ब्लाकों थराली, देवाल एवं नारायणबगड़ में बढ़ी तादाद में कृषि भूमि बंजर भूमि में तब्दील हो जाएगी और पलायन का ग्राफ घटने के बजाय बढ़ जाएगा।

इस संबंध में बद्रीनाथ वन प्रभाग गोपेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार दुबे का कहना हैं कि इस जिले में जंगली सूअरों के द्वारा फसलों को काफी नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आ रहे हैं। इन्हें मारने के लिए वन विभाग के द्वारा लाइसेंसी बंदूकधारी पूर्व फौजियों एवं अन्य को मारने के लिए परमीशन दी जा रही हैं। जिन भी गांवों में जंगली सूअरों का आतंक अधिक हैं। उन गांवों के ग्राम प्रधान रेंज कार्यालयों में आवेदन दें सकते हैं इसके बाद लाईसेंसी बंदूकधारियों को एक माह तक के लिए सूअरों को परमीशन दी जा सकती है। बताया कि विगत वर्षों से राज्य सरकार के द्वारा पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली सूअरों एवं तराई के क्षेत्रों में किसानों की खेती को भारी नुकसान पहुंचाने वाली नील गायों को परमिशन खुलेआम मारने की भारत सरकार से इजाजत मांगी गई थी। किन्तु भारत सरकार ने यह परमीशन तो नही दी। किन्तु नियंत्रित रूप से इन्हें मारने के लिए परमीशन देने की सहमति के बाद है, बन विभाग प्रति माह के अनुसार इजाजत दे रहा है। ग्रामीणों को इसके लिए आवेदन करना चाहिए।

Share77SendTweet48
Previous Post

उफराई देवी मंदिर में वैदिक मंत्रोचारण के साथ हुई माता की मूर्ति स्थापित

Next Post

जंगलों की अग्नि पर वन कर्मियों, स्थानीय लोगों के सहयोग से पाया नियंत्रण

Related Posts

उत्तराखंड

सुविधा से महरूम है कौसानी का लक्ष्मी आश्रम ऐतिहासिक रहा है सफर

June 11, 2026
9
उत्तराखंड

घटतोली के आरोपी गैस वितरण कर रहे ठेकेदार का ठेका निरस्त, सिक्योरिटी मनी जब्त

June 11, 2026
7
उत्तराखंड

हाट कल्याणी – सवाड़ मोटर मार्ग पर हादसा, चार लोगों की दर्दनाक मौत

June 11, 2026
661
उत्तराखंड

श्री बालाजी मंदिर के 23वें वार्षिकोत्सव धार्मिक अनुष्ठानों एवं श्री बालाजी भव्य रथ यात्रा का आयोजन

June 11, 2026
8
उत्तराखंड

विकासखंड दशोली, नन्दानगर व जोशीमठ में चला ‘खेत बचाओ अभियान’

June 10, 2026
42
उत्तराखंड

आदि कैलाश ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

June 10, 2026
7

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67698 shares
    Share 27079 Tweet 16925
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45781 shares
    Share 18312 Tweet 11445
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38058 shares
    Share 15223 Tweet 9515
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37447 shares
    Share 14979 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37333 shares
    Share 14933 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

सुविधा से महरूम है कौसानी का लक्ष्मी आश्रम ऐतिहासिक रहा है सफर

June 11, 2026

घटतोली के आरोपी गैस वितरण कर रहे ठेकेदार का ठेका निरस्त, सिक्योरिटी मनी जब्त

June 11, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.