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पहली बार उत्तराखंड से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पहुंची ट्राउट फिश, दुबई एक्सपोर्ट में यहां फंसा पेंच!

28/06/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में हिमालयन ट्राउट फिश को बढ़ावा दिया जा रहा है. साथ ही इसके लिए बेहतर प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जाने को लेकर तमाम कवायद की जा रही रही है. इसी कड़ी में पहली बार उत्तराखंड से ट्राउट फिश को विदेशों में एक्सपोर्ट किया गया है. जिसके तहत नेपाल को 5 मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं. इसके साथ ही दुबई में भी ट्राउट फिश को भेजने की तैयारी हो रही है.जहां एक ओर उत्तराखंड का हिमालय ट्राउट फिश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है, तो वहीं दूसरी ओर अभी भी वो तमाम चुनौतियां बरकरार हैं, जिसकी वजह से लोकल स्तर पर ट्राउट फिश को मार्केट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. जबकि, सरकार का मुख्य फोकस विदेशी बाजारों और देश के बड़े शहरों पर है. आखिर क्या है उत्तराखंड में हिमालय ट्राउट फिश की असल स्थिति, इस क्षेत्र में क्या कुछ किया जाना है बाकीत्तराखंड में हिमालयन ट्राउट फिश को बढ़ावा दिया जा रहा है. साथ ही इसके लिए बेहतर प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जाने को लेकर तमाम कवायद की जा रही रही है. इसी कड़ी में पहली बार उत्तराखंड से ट्राउट फिश को विदेशों में एक्सपोर्ट किया गया है. जिसके तहत नेपाल को 5 मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं. इसके साथ ही दुबई में भी ट्राउट फिश को भेजने की तैयारी हो रही है.जहां एक ओर उत्तराखंड का हिमालय ट्राउट फिश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है, तो वहीं दूसरी ओर अभी भी वो तमाम चुनौतियां बरकरार हैं, जिसकी वजह से लोकल स्तर पर ट्राउट फिश को मार्केट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. जबकि, सरकार का मुख्य फोकस विदेशी बाजारों और देश के बड़े शहरों पर है. आखिर क्या है उत्तराखंड में हिमालय ट्राउट फिश की असल स्थिति, इस क्षेत्र में क्या कुछ किया जाना है बाकी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन के साथ ही मछली उत्पादन के लिए नेचुरल जलधाराएं मौजूद हैं. यही वजह है कि राज्य सरकार प्रदेश के खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन पर जोर दे रही है. क्योंकि, इससे किसानों को काफी ज्यादा फायदा मिलता है. इसी कड़ी में राज्य सरकार प्रदेश के सीमांत पर्वतीय जिलों में उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश के उत्पादन पर जोर दे रही है. पहली बार इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची उत्तराखंड की मछली: इसके साथ ही ट्राउट फिश के उत्पादन से जुड़े किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए इंटरनेशनल बाजार बना रही है. इसी कडी में बीती 23 जून को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5 मीट्रिक टन ट्राउट फिश निर्यात की गई है. जिससे 33 मत्स्य पालकों को करीब 23.5 लाख रुपए की आय हुई है, तो वहीं अगले कुछ महीने में 30 मीट्रिक ट्राउट फिश नेपाल में निर्यात करने की संभावना है. दरअसल, पिछले साल दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान मत्स्य पालन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और हितधारकों से बातचीत की थी. उस दौरान दुबई में हिमालयन ट्राउट फिश के निर्यात पर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक दुबई में हिमालयन ट्राउट फिश की सप्लाई नहीं हो पाई है. जिसके पीछे की तमाम असल वजह सामने निकल कर आए हैं. मुख्य रूप से उत्तराखंड में प्रोसेसिंग प्लांट न होने के साथ ही ट्राउट फिश की साइज और वजन का कम होना शामिल है. क्योंकि, गल्फ कंट्री की डिमांड है कि एक ट्राउट फिश का वजन 3 किलोग्राम होना चाहिए. जबकि, हिमालयन ट्राउट फिश का वजन करीब 700 से 800 ग्राम ही है. इसके अलावा कागजी कार्रवाई भी अभी तक पूरी नहीं हो पाई है. उत्तराखंड के हिमालयन ट्राउट फिश का इतिहास करीब 150 साल पुराना यानी ब्रिटिश काल का है. दरअसल, ब्रिटिश शासन काल के दौरान 1850 के दशक में अंग्रेज ट्राउट फिश का बीज, स्विट्जरलैंड से लेकर आए थे. इसके बाद से ही ट्राउट फिश, उत्तराखंड के हिमालय राज्यों की पहचान बनी हुई है, लेकिन अभी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है.यह चुनौती है ट्राउट फिश के बीज. दरअसल, डिमांड ज्यादा होने पर ट्राउट फिश के बीज को डेनमार्क से खरीदने पड़ रहे हैं, जो काफी ज्यादा महंगे पड़ते हैं. क्योंकि, उत्तराखंड में अत्याधुनिक हैचरी और कोल्ड स्टोरेज चैन सिस्टम नहीं है. फिलहाल, राज्य सरकार अत्याधुनिक हैचरी और कोल्ड स्टोरेज चैन सिस्टम को विकसित करने पर जोर दे रही है. जिससे ट्राउट फिश के बीज यही तैयार हो सकेंगे. हिमालयन ट्राउट फिश उत्तराखंड का एक प्रीमियम फिश यानी मछली है. जिसका उत्पादन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में किया जा रहा है. जिसकी मुख्य वजह यही है कि वहां पर कोल्ड रनिंग वाटर उपलब्ध है. वित्तीय वर्ष 2020-21 में 250 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 800 मीट्रिक टन हो गया है.करीब 800 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का उत्पादन 1625 रेसवेज के जरिए उत्पादन हुआ हैं. इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2021-22 में 10,011 परिवार मत्स्य पालन से जुड़े हुए थे. जिनकी संख्या साल 2025- 26 में बढ़कर 15,657 हो गई है। खास बात यह है कि इन सभी मत्स्य पालकों में 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल है. इतना ही नहीं उत्तराखंड सरकार का मुख्य फोकस है कि ट्राउट फिश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ ही देश के तमाम बड़े शहरों में भेजा जाए. क्योंकि, ये काफी महंगी मछली है. साथ ही इससे मत्स्य पलकों को काफी ज्यादा लाभ मिलेगा. जबकि, अन्य मछलियों की सप्लाई उत्तराखंड समेत अन्य जगहों पर की जा रही है. उत्तराखंड में भले ही साल दर साल मछलियों के उत्पादन में वृद्धि हो रही हो, लेकिन अभी भी मछलियों के मार्केटिंग की समस्या बरकरार है, जिस सवाल पर मत्स्य पालन मंत्री ने कहा कि लगातार सोशल मीडिया के जरिए ट्राउट फिश को प्रमोट किया जा रहा है. इसके साथ ही एक एडवरटाइजिंग एजेंसी को भी हायर करने जा रहे हैं. जिसके जरिए देश भर में इसकी मार्केटिंग की जाएगीं. इसके साथ ही एक्सपोर्टर्स से भी मुलाकात की जा रही है. क्योंकि, वो तमाम देशों में एक्सपोर्ट कर रहे हैं. पिछले महीने दुबई में गल्फूड का आयोजन किया गया था. जहां मत्स्य विभाग की ओर से उत्तराखंड ट्राउट फिश की प्रदर्शनी लगाई गई थी. वहां के लोगों ने उत्तराखंडी ट्राउट को काफी ज्यादा पसंद किया. लिहाजा, दुबई में ट्राउट फिश एक्सपोर्ट करने की कागजी कार्रवाई चल रही है. ट्राउट फिश के एक्सपोर्ट से मत्स्य पलकों को काफी ज्यादा फायदा मिलेगा. साथ ही दुबई में एक्सपोर्ट की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अन्य देशों में भी ट्राउट फिश के एक्सपोर्ट को लेकर पहल किया जाएगा.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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