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फिर परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल?

14/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में बृहस्पतिवार रात पानी और मलबा आने से हुए हादसे ने एक बार फिर परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग में यह पहली दुर्घटना नहीं है। आठ महीने पहले दिसंबर 2025 में भी सुरंग के भीतर दो लोको ट्रॉली आपस में टकरा गई थीं। चमोली टनल हादसे के मंजर दिल दहला देने वाला था। अचानक सुरंग में करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज के साथ भारी भूस्खलन हुआ और मलबा, पानी व पत्थर तेज गति से टनल के अंदर घुस आए। इसके धक्के से कई लोग दूर जा गिरे, जबकि कुछ लोग मलबे में दब गए। मलबे के धक्के से कुछ लोग टनल के बाहर की ओर आ गए।मजदूर बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। टनल में कई जगह से मलबा आने से ऑक्सीजन लेवल बेहद कम हो गया था। कुछ लोग दम घुटने के कारण मलबे में आगे चल नहीं पा रहे थे। जेसाल गांव के नीचे यहा हादसा हुआ। हैरानी के बात यह सामने आ रही है कि मलबा दो दिन से गिर रहा था, लेकिन परियोजना प्रबंधन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। चमोली जिले के मायापुर (पीपलकोटी) क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में मलबा और पानी भरने के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र देहरादून के अनुसार करीब तीन किलोमीटर लंबी टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा और पानी आने से अंदर काम कर रहे लोग फंस गए थे। विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में बृहस्पतिवार रात पानी और मलबा आने से हुए हादसे ने एक बार फिर परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग में यह पहली दुर्घटना नहीं है। आठ महीने पहले दिसंबर 2025 में भी सुरंग के भीतर दो लोको ट्रॉली आपस में टकरा गई थीं। हादसे में कई मजदूर घायल हुए थे।जलविद्युत परियोजना की क्षमता 444 मेगावाट है और परियोजना का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। ऐसे में लगातार दूसरी दुर्घटना होना चिंता का विषय है। सुरंग के भीतर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि परियोजना का संचालन कर रही टीएचडीसी ने मौजूदा घटना को भूगर्भीय आपदा बताया है। परियोजना प्रबंधन का कहना है कि अचानक पानी और मलबा आने की वजह से यह स्थिति बनी। प्रबंधन ने राहत एवं बचाव कार्य में सभी उपलब्ध संसाधनों को लगाया है। इस जवाब से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सुरंग निर्माण के दौरान संभावित भूगर्भीय जोखिमों का पर्याप्त आकलन किया गया, क्या श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन हो रहा और दिसंबर में हुई दुर्घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में किए गए जरूरी बदलाव लागू किए गए हैं। चमोली की सुरंग में फंसे मजदूरों के परिवारों के लिए हर पल भारी था. कोई अपने बेटे की खबर का इंतजार कर रहा था, कोई पति की. लेकिन जिस कंपनी को सबसे पहले यह बताना चाहिए था कि अंदर कितने मजदूर फंसे हैं, वही घंटों तक सही आंकड़ा नहीं दे सकी. 24 या 28 यह सिर्फ संख्या नहीं थी, हर संख्या के पीछे एक परिवार की उम्मीद और एक जिंदगी थी. देर रात अधिकारियों के दबाव के बाद आंकड़े सामने आए. टनल का निर्माण कराने वाली कंपनी की लापरवाही लगातार सामने आ रही है. पहले तो मजदूरों की लिस्ट नहीं दे पा रही थी. अब सामने आया है कि टनल में कई खामियां थी, जिसके बारे में कंपनी को अवगत कराया गया था. मगर उसे भी अनदेखा कर दिया गया. अब सीएम ने कहा कि हर लापरवाही की जांच की जाएगी. प्रशासन के अनुसार हादसे के समय टनल के अंदर 22 कर्मचारी फंस गए, जबकि प्रशासन ने 9 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 14 लोगों के घायल होने की सूचना है. वहीं तीन लापता लोगों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी है. बता दें कि टीएचडीसी की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टनल की लंबाई करीब 3 किलोमीटर है. टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा एवं पानी आने की स्थिति उत्पन्न हुई. जिसके चलते टनल के अंदर कर्मचारी फंस गए.राहत एवं बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस समेत अन्य तकनीकी एवं विशेषज्ञ टीमें मौके पर मौजूद हैं. टनल के भीतर मलबा एवं पानी की चुनौती के बीच बचाव दल अत्यंत सावधानी एवं समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं. जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मौके पर अधिकारियों एवं रेस्क्यू टीमों से लगातार जानकारी लेते हुए शेष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों एवं तकनीकी सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन द्वारा घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्यों के साथ ही घायलों के उपचार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी लगातार जुटाई जा रही हैं.बताते चलें कि यह पहली बार नहीं है जब विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना में हादसा हुआ हो, 30 दिसंबर 2025 को भी लोको ट्रॉली टकराने से हादसे में कई लोग घायल हुए थे. टनल में चल रहे कार्य पर जाने के लिए 81 श्रमिकों को बैठाकर लोको ट्रॉली चली, रास्ते में एक माल वाहक लोको ट्रॉली खड़ी थी. जिसके अचानक ब्रेक फेल हो गए और वह अपनी जगह से खिसक गई थी. इस कारण श्रमिकों को ले जा रही लोको ट्रॉली उससे टकरा गई और घटना घटित हुई थी. इस घटना में 81 श्रमिक घायल हो गए थे, जिन्हें बाहर निकाल कर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. स्थानीय लोगों में हादसे को लेकर गहरा आक्रोश और चिंता भी है. अब सभी की निगाहें टनल के अंदर फंसे तीन लापता श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान पर टिकी हैं.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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