डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
देवभूमि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धार्मिक पर्यटन के लिहाज से बहुत कुछ है. यहां ध्वज मंदिर, कोटगारी देवी मंदिर, मोस्टामानू मंदिर, अर्जुनेश्वर मंदिर, पाताल भुवनेश्वर, शिवगुफा, छिपला केदार मंदिर, देव छिपलाकेदार, कामाक्ष्या मंदिर, बेरीनाग के नाग मांदिर और थल केदार मंदिर प्रसिद्ध हैं. कोटगाड़ी माता का दरबार एक छोटे से मंदिर के रूप में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में प्रसिद्ध पर्यटक स्थल चौकोड़ी के करीब कोटमन्या तथा मुन्स्यारी मार्ग के एक पड़ाव थल से 17-17 किमी की दूरी पर पाखू नामक के स्थान के पास कोटगाड़ी नाम के एक गांव में स्थित है।स्थानीय लोगों के अनुसार एक दौर में माता कोटगाड़ी यहां स्वयं प्रकट हुई थीं लिहाजा यह स्थान माता का शक्तिपीठ भी कहलाता है। माता ने स्वयं स्थानीय निवासियों को पास के दशौली गांव के पाठक जाति के एक ब्राह्मण को यहां बुलाया था।कोटगाड़ी गांव के जोशी लोग माता के आदेश पर दशौली के एक पाठक पंडित को यहां लेकर आए, और उन्हें माता के मंदिर के दूसरी ओर के ‘मदीगांव” नाम के गांव में बसाया।इन्हीं पाठक पंडित परिवार को ही मंदिर में पूजा-पाठ कराने का अधिकार दिया गया। वर्तमान में उन पाठक पंडित की करीब 10 पीढ़ियों के उपरांत करीब 28 परिवार हो चुके हैं। इस तथ्य से मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा लगाया जा सकता है।कोटगाडी देवी के दरबार को न्याय का दरबार कहना अतिशयोक्ति न होगा। नाम लेने अथवा डाक द्वारा भी मंदिर के नाम पर पत्र भेजने मात्र से कोटगाड़ी देवी पुकार सुन लेती हैं, और सच्चा न्याय करते हुए चमत्कारदिखातीहैं।माना जाता है कि इनके शरणागत सब प्रकार से मनोंवाछित फल प्राप्त करते हैं। इनके बारे में एक दंत कथा भी काफी प्रसिद्ध है कि माता के प्रभाव से आजादी के पूर्व अग्रेजों के शासन काल में एक जज ने जटिल यात्रा कर यहां पहुंचकर क्षमा याचना की।इसके पीछे कारण बताया जाता है कि क्षेत्र के एक निर्दोष व्यक्ति को जब अदालत से भी न्याय नहीं मिला, तो सामाजिक दंश से आहत होकर स्वंय को निर्दोष साबित करने के लिए उसने करुण पुकार के साथ भगवती कोटगाडी के चरणों में विनती की।भक्त की विनती के फलस्वरुप चमत्कारिक घटना के साथ कुछ समय के बाद जज ने यहां पहुंचकर उसे निर्दोष बताया। इस तरह के एक नही सैकड़ों चमत्कार देवी के इस दरबार से जुड़े हुए हैं।जनश्रुति के अनुसार जब सभी देवता कुछ विशेष परिस्थितियों में स्वयं को न्याय देने व फल प्रदान करने में असमर्थ मानते हैं, तो ऐसी स्थिति में कोकिला कोटगाडी देवी तत्काल न्याय देने को तत्पर रहती हैं, हिमालय के देवी शक्ति पीठों में कोकिला माता का महात्म्य निराला है, सिद्धि की अभिलाषा रखने वाले और ऐश्वर्य की कामना करने वाले लोगों के लिए भी यह स्थान त्वरित फलदायक है।देवी के उपासक इन्हें विश्वेश्वरी, चन्दि्रका, कोटवी, सुगन्धा, परमेश्वरी, चण्डिका, वन्दनीया, सरस्वती, अभया प्रचण्डा, देवमाता, नागमाता, प्रभा आदि अनेक नामों से भी पुकारते हैं।इस पौराणिक मंदिर में शक्ति कैसे और कब अवतरित हुई इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी नही मिलती है, लेकिन दंत कथाओं में कई भक्त मानते हैं कि यह देवी नेपाल से यहां आईं हैं इनके विश्राम स्थल अनेकों स्थानों पर है, जहां नित्य इनकी पूजा होती है।कोट का तात्पर्य अदालत से माना जाता है, पीडितों को तत्काल न्याय देने के कारण ही इस देवी को न्याय की देवी माना जाता है और इसी भाव से इनकी पूजा प्रतिष्ठा सम्पन्न कराने की परम्परा है।सच्चे श्रद्वालुओं को इस पहर में यहां पर माता के वाहन शेर के दर्शन होते है, इस प्रकार की एक नहीं सैकडों दंत कथाएं इस शक्तिमयी देवी के बारे प्रचलित हैं, जो माता कोकिला के विषेश महात्मय को दर्शाती है, इस दरबार में माता कोकिला के साथ बाण मसूरिया, उडर, घशाण आदि अनेकों देवताओं की पूजा की जाती है स्थानीय गांव के पुजारी पाठक मंदिर में पूजा अर्चना का कार्य सम्पन करते हैमान्यता है कि माता कोटगाड़ी के मुख्य सेवक भंडारी ग्वल्ल हैं. माता कोटगाड़ी को यहां सात्विक भोग ही लगता है. जब भी किसी की मनोकामना पूरी होती है, तो माता कोटगाड़ी के दरबार में अठवार चढ़ाई जाती है. माता कोटगाड़ी के दरबार में लोग न्याय के लिए न्यायालयों से दिए गए निर्णयों को स्टांप पेपर में लिखकर यहां जमा करते हैं. मान्यता है कि माता कोटगाड़ी के मुख्य सेवक भंडारी ग्वल्ल हैं. माता कोटगाड़ी को यहां सात्विक भोग ही लगता है. जब भी किसी की मनोकामना पूरी होती है, तो माता कोटगाड़ी के दरबार में अठवार चढ़ाई जाती है. माता कोटगाड़ी के दरबार में लोग न्याय के लिए न्यायालयों से दिए गए निर्णयों को स्टांप पेपर में लिखकर यहां जमा करते हैं. पहाड़ के लोगों का भोलापन कहें या आस्था. आज के आधुनिक दौर में भी यहां के लोग न्यायालयों से ज्यादा विश्वास कोटगाड़ी देवी पर करते हैं. इसलिए ही इसे पहाड़ का ‘सुप्रीम कोर्ट’ भी कहा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि मां कोटगाड़ी न्याय की प्रत्यक्ष देवी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राचीन समय में उस पूरे क्षेत्र में फैसले ही मां के दरबार में ही होते थे. पहाड़ के लोगों का भोलापन कहें या आस्था. आज के आधुनिक दौर में भी यहां के लोग न्यायालयों से ज्यादा विश्वास कोटगाड़ी देवी पर करते हैं. इसलिए ही इसे पहाड़ का ‘सुप्रीम कोर्ट’ भी कहा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि मां कोटगाड़ी न्याय की प्रत्यक्ष देवी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राचीन समय में उस पूरे क्षेत्र में फैसले ही मां के दरबार में ही होते थे. पहले देवी के सामने अपने प्रति हो रहे अन्याय की पुकार और घात की प्रथा थी. अब अर्जी को पत्र और स्टांप में लिख कर देने का प्रचलन बढ़ गया है. कोटगाड़ी देवी के मुख्य सेवक भंडारी ग्वल्ल हैं, यह मंदिर चंद राजाओं के समय में स्थापित बताया जाता है. मंदिर बनाने को लेकर स्थानीय लोगों को सपने में इस मंदिर की स्थापना का आदेश मिला था. जिसके बाद ग्रामीणों ने यहां मंदिर बनाया था. यहां हर साल चैत्र और अश्विन मास की अष्टमी के साथ भादों में ऋषि पंचमी को भव्य मेला लगता है पहले देवी के सामने अपने प्रति हो रहे अन्याय की पुकार और घात की प्रथा थी. अब अर्जी को पत्र और स्टांप में लिख कर देने का प्रचलन बढ़ गया है. कोटगाड़ी देवी के मुख्य सेवक भंडारी ग्वल्ल हैं, यह मंदिर चंद राजाओं के समय में स्थापित बताया जाता है. मंदिर बनाने को लेकर स्थानीय लोगों को सपने में इस मंदिर की स्थापना का आदेश मिला था. जिसके बाद ग्रामीणों ने यहां मंदिर बनाया था. यहां हर साल चैत्र और अश्विन मास की अष्टमी के साथ भादों में ऋषि पंचमी को भव्य मेला लगता है पहले देवी के सामने अपने प्रति हो रहे अन्याय की पुकार और घात की प्रथा थी. अब अर्जी को पत्र और स्टांप में लिख कर देने का प्रचलन बढ़ गया है. कोटगाड़ी देवी के मुख्य सेवक भंडारी ग्वल्ल हैं, यह मंदिर चंद राजाओं के समय में स्थापित बताया जाता है. मंदिर बनाने को लेकर स्थानीय लोगों को सपने में इस मंदिर की स्थापना का आदेश मिला था. जिसके बाद ग्रामीणों ने यहां मंदिर बनाया था. यहां हर साल चैत्र और अश्विन मास की अष्टमी के साथ भादों में ऋषि पंचमी को भव्य मेला लगता हैकोटगाड़ी देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि न्याय, विश्वास और आत्मबल का प्रतीक है. देवी के प्रति लोगों की अटूट आस्था यही दर्शाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद बनी रहती है. जो भी व्यक्ति सच्चे मन से देवी की शरण में आता है, उसे मानसिक शांति, मार्गदर्शन और न्याय जरूर मिलता है. ऐसा मान्यता है कि माता रानी के मंदिर में अपने घर के लिए पाठ करा लेने से सारी परेशानियां खत्म हो जाती हैं. माना जाता है कि अगर किसी ने आपके साथ अपराध या छल किया है, तो उसको भी सजा मिल जाती है.यही कारण है कि पिथौरागढ़ की धरती पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के दिलों में खास स्थान रखता है..लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











