• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

राजकुमार से महापुरुष बनने तक की यात्रा बुद्ध पूर्णिमा

29/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
8
SHARES
10
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
आज से लगभग अढ़ाई हजार वर्ष पहले जब पृथ्वी पर हिंसा बढ़ गई थी और धर्म के नाम पर निर्दोष पशुओं का वध हो रहा था। तब जीवों की हत्या रोकने के लिए मायादेवी के गर्भ से भगवान स्वयं बुद्ध के रूप में अवतरित हुए। उनके पिता का नाम शुद्धोदन था। उनकी राजधानी कपिल वस्तु थी। भगवान बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। सिद्धार्थ के जन्म के बाद उनकी माता का देहांत हो गया। सिद्धार्थ का पालन-पोषण उनकी विमाता गौतमी देवी ने किया।ज्योतिषियों ने कहा था कि राजकुमार या तो चक्रवर्ती राजा होंगे या विरक्त होकर जगत का कल्याण करेंगे। महाराज शुद्धोदन ज्योतिषियों की इस बात से चिंतित रहते थे। उन्होंने राजकुमार के लिए बहुत बड़ा भवन बनवा दिया था और उस भवन में दुख, रोग और मृत्यु की कोई बात न पहुंचे इसकी कड़ी व्यवस्था कर दी थी। राजकुमार का विवाह राजकुमारी यशोधरा से हुआ था। उनके पुत्र का नाम राहुल था। राजकुमार सिद्धार्थ अत्यंत दयालु थे। एक बार उन्होंने पिता से नगर देखने की आज्ञा मांगी। राज्य की ओर से ऐसी व्यवस्था हो गई कि राजकुमार को नगर में कोई दुखद दृश्य न नजर आए लेकिन होनी को कौन रोक सकता है। नगर घूमते समय एक बूढ़ा आदमी सिद्धार्थ को दिखाई पड़ा। इसी प्रकार जब वह दूसरी बार नगर घूमने निकले तो एक रोगी उन्हें मिला। तीसरी बार एक मुर्दा उन्होंने देखा।इन दृश्यों को देख कर संसार के सब सुखों से उनका मन हट गया। संसार के सुखों से वैराग्य हो जाने पर अमरता की खोज का सिद्धार्थ ने निश्चय कर लिया। एक दिन आधी रात को वह चुपचाप राजभवन से निकल पड़े। वन में कठोर तप करने लगे। अंत में वह ज्ञान बोध को प्राप्त करके सिद्धार्थ से भगवान बुद्ध हो गए। जब भारत में घोर अंधविश्वास, धार्मिक पाखंड, जाति-प्रथा व बलि प्रथा जैसी अनेक अमानवीय कुरीतियां फल-फूल रही थीं समाज की तार्किक शक्ति क्षीण हो गई थी, मानव-मानव में भेद करने वाली जाति व्यवस्था अपनी पराकाष्ठा पर थी, एकता सामंजस्य और मेल-मिलाप का नामोनिशान नहीं था, इन्हीं परिस्थितियों में महामानव बुद्ध का कपिलवस्तु के राजा शुद्धोदन के घर प्रादुर्भाव हुआ। 29 साल की उम्र में ही अपना राज-पाट तथा पत्नी और पुत्र राहुल को सोई अवस्था में त्याग कर दुनिया के दुख का कारण ढूंढने संसार में निकल पड़े।
विषम परिस्थितियों को झेलते हुए कठोर आत्मचिंतन के बाद बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने पाया कि दुनिया में दुख हैं और दुख का कारण तीव्र इच्छा और मानसिक लगाव है। दुख से छुटकारा पाया जा सकता है। छुटकारा पाने के लिए इच्छाओं को वश में करना पड़ेगा। उन्होंने अष्टांग मार्ग पर चलने को कहा। उन्होंने कहा कि संसार अनित्य है। जिसकी उत्पत्ति हुई है उसका अंत भी निश्चित है। यही संसार का नियम है।
महात्मा बुद्ध ने तत्कालीन प्रचलित मान्यताओं को तर्क से काटा और दुख निवारण के सारे व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने अपने शिष्यों को निर्देश दिया कि दुनिया में अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करें। घृणा को प्रेम से, शत्रुता को मैत्री से, हिंसा को करुणा से दूर करें।
उन्होंने बताया कि सारे मानव और जीव-जंतु प्रकृति प्रदत्त हैं और सभी समान हैं। कोई भी मनुष्य जन्म से न ऊंच हैं, न नीच। सभी बराबर हैं। उन्होंने  मानव मात्र में भेद करने वाली सारी मान्यताओं को समाप्त करने को कहा।
उन्होंने कहा कि कोई भी बात इसलिए मत मानो कि मैंने कहा है या पुराने धर्मशास्त्रों में लिखी गई है या परंपरा से चली आ रही है बल्कि उसे अपने तर्क की कसौटी पर कस कर देखो कि वह सही है तथा साथ ही मानव हित में है तब उसे मानो, अन्यथा छोड़ दो।
बौद्ध धर्म का व्यापक प्रभाव सम्राट अशोक के वक्त हुआ। जब कलिंग युद्ध में लाखों सैनिकों की मौत के दर्दनाक दृश्य ने उन्हें द्रवित कर दिया। उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली और समानता, भ्रातृत्व और करुणा पर आधारित इस धर्म को अपना राजधर्म बनाया। अशोक से लेकर उनके परपौत्र बृहद्रथ के शासनकाल तक बौद्ध धर्म का देश-विदेश में खूब प्रचार-प्रसार हुआ।
भारतीय संविधान का आधार बौद्ध धर्म के सिद्धांत समानता, करुणा व भ्रातृत्व पर है जो जाति, धर्म, क्षेत्र व वर्ग के भेद खत्म कर सबको समान न्याय और सत्ता में हिस्सेदारी का अवसर सुनिश्चित करता है। राष्ट्रध्वज में बौद्ध धर्म चक्र और अशोक स्तंभ इसी बौद्ध दर्शन को इंगित करते हैं। इसमें मनुष्य से लेकर जीव-जंतु, पशु-पक्षी के भी स्वतंत्र रूप से जीने की व्यवस्था की गई है।बुद्ध जयंती भारत के साथ साथ चीन, नेपाल, जापान, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कंबोडिया, जैसे दुनिया के कई देशों में बुद्ध पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है। बौद्ध अनुयायी इस दिन अपने घरों में दिये जलाते हैं और फूलों से घर सजाते हैं। इस दिन बौद्ध धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाता है। सनातन धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन बौद्ध धर्म के संस्थापक ज्योति पुंज गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था तथा कठोर साधना के बाद बौद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। मान्यता है कि इस दिन श्रीहरि भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख समृद्धि का वास होता है। तथा भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद अपने भक्तों पर सदैव बना रहता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार महात्मा बुद्ध भगवान विष्णु का नौवां अवतार हैं। ।बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन गौतम बुद्ध की जयंती भी मनाते हैं। कहा जाता है कि भगवान बुद्ध ने वर्षों तक वन में भटकने और कठोर तपस्या के बाद इस दिन सत्य का ज्ञान प्राप्त किया था। इसके बाद भगवान बुद्ध ने अपने ज्ञान के प्रकाश से संपूर्ण जगत को प्रकाशमयी कर दिया था। इस पर्व की धूम कुशीनगर में अधिक देखने को मिलती है,यहां पूर्णिमा तिथि से 10 दिन पहले भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।बुद्ध पूर्णिमा स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व यातायात व्यवस्था की पुख्ता तैयारियां की हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने अतिरक्त पुलिस बल की तैनाती करते हुए मेला सेल का गठन कर दिया। एसपी सिटी को स्नान पर्व व्यवस्था का नोडल अधिकारी बनाया गया है। सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा स्नान पर्व पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश आदि स्थानों से भारी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर हरकी पौड़ी पर गंगा स्नान करेंगे। भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व शांति और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। निर्देशित किया कि स्नान से पूर्व बस अड्डा, रेलवे स्टेशन एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर चेकिंग की जाए। बनेगी।ये लेखक के निजी विचार हैं वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरतहैं।

Share3SendTweet2
Previous Post

औषधीय गुणों से भरपूर पांगर फल किसानों की आर्थिकी करेगा मजबूत

Next Post

लकड़ियों में जीवंत आकृति उकेर रहे हैं जसपाल

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: लच्छीवाला नेचर पार्क ने रचा इतिहास, एक दिन में 08 हजार से अधिक पर्यटक और ₹6.20 लाख की आय

June 14, 2026
64
उत्तराखंड

खटीमा में “जन-जन की सरकार, आपके द्वार” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गिनाई केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियां

June 14, 2026
7
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान भोलेनाथ एवं महाबली हनुमान जी की प्रतिमाओं का किया अनावरण

June 14, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाला : विशेष सफाई अभियान में चार टन कूड़ा हटाया

June 14, 2026
25
उत्तराखंड

डोईवाला: विश्व रक्तदाता दिवस पर ‘एक मदद ब्लड ग्रुप समिति’ सम्मानित

June 14, 2026
32
उत्तराखंड

डोईवाला: बैडमिंटन प्रतियोगिता में आयुषी काला और अजमाया चमोली रहे प्रथम

June 14, 2026
107

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67699 shares
    Share 27080 Tweet 16925
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45782 shares
    Share 18313 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38060 shares
    Share 15224 Tweet 9515
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37448 shares
    Share 14979 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37335 shares
    Share 14934 Tweet 9334

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: लच्छीवाला नेचर पार्क ने रचा इतिहास, एक दिन में 08 हजार से अधिक पर्यटक और ₹6.20 लाख की आय

June 14, 2026

खटीमा में “जन-जन की सरकार, आपके द्वार” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गिनाई केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियां

June 14, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.