• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

कोरोना वायरस को काबू करेगी काली मिर्च

20/04/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
161
SHARES
201
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
वनस्पति जगत् में पिप्पली कुल के मरिचपिप्पली नामक लता सदृश बारहमासी पौधे के अधपके और सूखे फलों का नाम काली मिर्च है। पके हुए सूखे फलों को छिलकों से बिलगाकर सफेद गोल मिर्च बनाई जाती है जिसका व्यास लगभग ५ मिमी होता है। काली मिर्च के पौधे का मूल स्थान दक्षिण भारत ही माना जाता है। भारत से बाहर इंडोनेशिया, बोर्नियो, चीन, मलय, लंका और स्याम जैसे देशों में भी इसकी खेती की जाती है। विश्वप्रसिद्ध भारतीय गरम मसाले में ऐतिहासिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से काली मिर्च का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। यह मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है अपनी रोजमर्रा के जीवन में खाना बनाते वक्त बहुत सारे मसालों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें कुछ हमारी हेल्थ पर बुरा असर भी डालते हैं, तो वहीं बहुत सारे ऐसे हैं जो हमारी हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे ही मसाले के बारे में जो हमारे स्वास्थ और ब्यूटी के लिए बहुत लाभकारी है।
औषधीय गुणों से भरपूर काली मिर्च हमारे स्वास्थ और स्किन के लिए रामबाण है। काली मिर्च में पिपरिन नामक तत्व पाएं जाता है जो इसके स्वाद को खास बनाता है। काली मिर्च में आयरन, पौटेशियम, मैग्नीशियम, जिंक, क्रोमियम, विटामिन ए और सी के अलावा कई अन्य पोषक तत्व पाएं जाते हैं। गरम मसालों में इस्तेमाल की जाने वाली काली मिर्च, जिसे ष्क्वीन ऑफ स्पाइस भी कहा जाता है, वह कई औषधियों से भी भरपूर है।
खाने में स्वाद बढ़ाने वाली काली मिर्च को कई तरह की सब्जियों में डालकर खाया जाता है, लेकिन इसके औषधीय गुण हैरान कर देने वाले हैं। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटिन के अलावा और भी कई पोषक तत्व होते हैं। काली मिर्च में पेपराइन नामक रसायन होता है। इसी के कारण तीखा स्वाद आता है। पेपराइन पाचन सुधारता है। काली मिर्च की तासीर बहुत गर्म होती है। इसलिए यह स्वास्थ के लिए ज्यादा फायदेमंद है। ज्यादातर लोग सर्दी के मौसम में चाय और सब्जी में इसका इस्तेमाल करते हैं। कोरोना वायरस भारत पहुंच चुका है। हमला लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका खतरा चारों तरफ मंडराने लगा है, लिहाजा सरकार लगातार एहतियात और सावधानी बरतने की अपील कर रही हैं। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने भी इससे बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग के मुताबिक समय रहते बचाव कर लिया जाए तो गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार तुलसी, काली मिर्च और पिप्पली जैसी आयुर्वेदिक जड़ी.बूटियां लोगों का बचाव कर सकती हैं। 5 दिन पहले थोक भाव 355 रुपये प्रति किलो अब कीमत हो गई है 415-420 रुपये प्रति किलो दिल्ली की मंडी दो सप्ताह पहले भाव 360-460 रुपये किलो अब काली मिर्च के भाव 430-500 रुपये किलो रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में मजबूती को देखते हुए काली मिर्च की निर्यात मांग तेज हो गई है।
पिछले दो सप्ताह में इसका निर्यात 35 फीसदी तक बढ़ गया है। घरेलू निर्यातकों का कहना है कि रुपया सस्ता होने के कारण व्यापारियों को लाभ हो रहा है और वह सस्ते में कम डॉलर पर घरेलू काली मिर्च को विश्व बाजार में बेच रहे हैं। केरल के व्यापारी प्रति दिन औसतन 100-150 क्विंटल मांग के अनुसार, काली मिर्च निर्यात कर रहे हैं। निर्यात मांग में आई तेजी के कारण घरेलू बाजार में काली मिर्च के भाव में तेजी का रुख भी बना हुआ है। पिछले दो सप्ताह में भाव 60 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। केरल की मंडियों में काली मिर्च के थोक भाव 415-420 रुपये प्रति किलो तक चल रहे हैं। केरल के व्यापारी यज्डी पालिया ने बताया रुपये की कमजोरी के कारण विश्व बाजार में घरेलू काली मिर्च अन्य देशों की तुलना में सस्ता पड़ रहा है जिससे निर्यात मांग बढ़ गई है।
पिछले एक पखवाड़े में घरेलू व्यापारी 10.35 फीसदी तक अधिक निर्यात कर रहे हैं। निर्यात में आई तेजी के कारण काली मिर्च के भाव में भी तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले दो सप्ताह में भाव 60 रुपये प्रति किलो तक उछल गए हैं। केरल की मंडियों में 15 दिन पहले काली मिर्च का थोक भाव 355 रुपये प्रति किलो था जो अब 415-420 रुपये प्रति किलो चल रहा है। उन्होंने कहा कि निर्यात मांग बनी रहने के कारण आगे भी तेजी का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौजूदा समय पर 6.9-7.2 डॉलर प्रति किलो पर काली मिर्च निर्यात किया जा रहा है। दिल्ली के थोक बाजार खारी बावली स्थित व्यापारी सुरेन्द्र नाथ सुरेश कुमार ने बताया कि मांग में आई तेजी के कारण काली मिर्च के भाव पिछले दो सप्ताह से तेज बने हुए हैँ। दिल्ली की थोक मंडियों में दो सप्ताह पहले काली मिर्च के भाव 360-460 रुपये किलो चल रहे थे जो अब 430-500 रुपये किलो पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि कम गुणवत्ता वाली काली मिर्च के भाव में भारी तेजी आई है। इनके भाव 65-90 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। स्पाइस बोर्ड के अनुसार मौजूदा वर्ष में हुई बेहतर बारिश के कारण पिछले वर्ष के मुकाबले 12000 टन अधिक काली मिर्च का उत्पादन बढऩे का अनुमान है। किशनगंज के किसान भी पीछे नहीं रहना चाहते है काली मिर्च की खेती कर जय प्रकाश सिंह क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गए है प्रत्येक वर्ष एक पौधे से लगभग 4 से 6 किलोग्राम तक गोल मिर्च काली मिर्च मिल जाती है। जिससे एक पौधा से दो से तीन हजार रुपये की आमदनी सालाना होती है। काली मिर्च एक एकड़ क्षेत्रफल मे लगभग 1000 पौधे लगाए जा सकते है। जिसमें खर्च 25-30 हजार रुपये होते है। आमदनी दो से तीन लाख की होती है। यदि प्रदेश के काली मिर्च उत्पादक क्षेत्रों में केवल व्यवसायिक रूप से उन्ही का उत्पादन किया जाय तो सर्वाधिक बाजार मॉग भी रखती है, तो अपनी एक विशिष्ट पहचान के साथ.साथ आर्थिकी का भी बेहतर साधन बन सकती हैं। मिर्च उत्पादक क्षेत्रों को चिन्ह्ति कर स्थानीय स्तर पर काश्तकारों के लिए सामूदायिक सुविधा केन्द्र स्थापित कर के तहत मूल्य संवर्धन किया जाय तो मिर्च उत्पादकों को बाजार के साथ.साथ रोजगार का विकल्प भी बनाया जा सकता है। जिससे प्रदेश के इस बहुमूल्य उत्पाद को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शुद्ध वैज्ञानिक रूप में पहचान मिल सकें तथा प्रदेश के आर्थिकी का साधन भी बनाया जा सकें। ण् इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने के साथ.साथ यह हमारे शरीर को कई रोगों से भी छुटकारा दिलाने में मदद करता है।
उत्तराखंड को औषधि प्रदेश, यानी हर्बल स्टेट भी कहा जाता है। यहां पाई जाने वाली औषधीय गुणों की वनस्पतियों के सही उत्पादन व मार्केटिंग पहुंचना बहुत ही मुश्किल है। अधिकांश हिस्सा मैदानी इलाक़ों में है। पहाड़ी इलाक़ों में बेहद सीमित, लिए अनुकूल वातावरण है। लंबे समय से इस दिशा में पहल की जा रही है। इसके बावजूद भी संभावनाओं के सापेक्ष के उत्पादन को व्यावसायिक स्वरूप नहीं मिला है। काली मिर्च के उपयोग के बिना एक भारतीय रसोई लगभग शून्य है। काली मिर्च को लगभग किसी भी पकवान में जोड़ा जा सकता है और इसे मीठे बिस्कुट और केक में भी जोड़ा जा सकता है।

Share64SendTweet40
Previous Post

कच्ची शराब बनाने वाला गिरफ्तार, शराब और लाहन नष्ट किया

Next Post

दून में दो और जमाती कोरोना संक्रमित मिले, 46 पहुंचा आकड़ा

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला: सौड़ा सरोली में ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगाकर किया प्रदर्शन

August 21, 2026
6
उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड को पीएफसी (PFC) ने दी ‘ए+’ श्रेणी

August 21, 2026
36
उत्तराखंड

मंदाकिनी में कचरे का संकट एसटीपी व्यवस्था पर उठे सवाल

August 21, 2026
5
उत्तराखंड

डाक्टर दाभोलकर की शहादत को याद कर मनाया राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस

August 21, 2026
9
उत्तराखंड

रिवर्स पलायन के लिए विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : मुख्यमंत्री

August 21, 2026
8
उत्तराखंड

हिन्दी के प्रथम डी. लिट डॉ पीतांबर दत्त बड़थ्वाल

August 20, 2026
7

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67724 shares
    Share 27090 Tweet 16931
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45790 shares
    Share 18316 Tweet 11448
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38075 shares
    Share 15230 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37455 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37374 shares
    Share 14950 Tweet 9344

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला: सौड़ा सरोली में ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगाकर किया प्रदर्शन

August 21, 2026

यूजेवीएन लिमिटेड को पीएफसी (PFC) ने दी ‘ए+’ श्रेणी

August 21, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.